वकील ने उठाया जिला उपभोक्ता प्रतितोष आयोग के फैसले पर गम्भीर सवाल, विभिन्न स्तरों पर की शिकायत
एनसीआई@बूंदी
एडवोकेट श्रीराम आर्य ने जिला उपभोक्ता प्रतितोष आयोग पर बड़ा सवाल उठाया है। उनके अनुसार उनकी जिस विभाग से शिकायत थी, उसने तो अपनी गलती स्वीकार कर ली, मगर जिला उपभोक्ता प्रतितोष आयोग ने उस विभाग के खिलाफ निर्णय नहीं दिया। इससे वह अपने आपको काफी अपमानित महसूस कर रहे हैं, उन्हें काफी मानसिक वेदना है।
मामले के अनुसार बूंदी जिला उपभोक्ता प्रतितोष आयोग में फरवरी 2021 से प्रकरण संख्या 74/2021 राजबाला आर्य बनाम जयपुर विद्युत वितरण निगम लिमिटेड विचाराधीन था। इसमें विद्युत निगम ने स्वीकार किया था कि कम्प्यूटर व लिपिक की गलती से उपभोक्ता के बिलों में गलत राशि जुड़कर बिल जारी हो रहे हैं। विभाग ने स्वीकार किया था कि 21,572 रुपए की गलत राशि जुड़ गई थी। विद्युत निगम की इस स्वीकारोक्ति के बावजूद उपभोक्ता प्रतितोष आयोग ने उपभोक्ता के हित में स्टे तक नहीं दिया।
याचि एडवोकेट श्रीराम आर्य के अनुसार घरेलू विद्युत कनेक्शन उनकी पत्नी राजबाला आर्य के नाम से लिया गया है। यह विवाद अधिवक्ता अजय नुवाल के जरिये फरवरी 2021 में पेश किया गया था। इसमें प्रत्येक माह बिल में उपभोग की राशि के अतिरिक्त एकतरफा मनमानी राशि लगाकर जोड़ दी जाती थी। इसे दुरुस्त करवाने हर माह निगम के कार्यालय में हाजिरी देनी पड़ती थी। अधिकारियों के हाथ जोड़ने पर उसे सही किया जाता था,किंतु अगले महीने फिर वही राशि जुड़कर आ जाती थी। इससे गहरी मानसिक पीड़ा से गुजरना पड़ा, किंतु उपभोक्ता प्रतितोष आयोग ने उपभोक्ता की पीड़ा व विभाग की घोर लापरवाही को दरकिनार कर अपने निर्णय में उपभोक्ता को स्टे तक नहीं दिया । इससे निगम को लगातार गलत राशि के बिल भेजने की छूट मिलती रही। इससे गहरी मानसिक पीड़ा हुई, सामाजिक प्रतिष्ठा धूमिल हुई है। आयोग के इस कृत्य की शिकायत उचित कार्यवाही के लिए जिला कलक्टर व अन्य सम्बन्धित स्तरों पर कर दी गई है।
