राजस्थान: 20 साल से खतरनाक सांपों को पकड़ रहे स्नेकमैन को आखिरकार कोबरा ने डस लिया, हो गई मौत
विनोद तिवाड़ी एक साथ पांच-पांच ब्लेक कोबरा जैसे सांपों को काबू कर लिया करते थे। वह सांप, गोह और गोहिरे को मारने नहीं देते थे, बल्कि इन्हें बचाने के लिए स्वयं पहुंच जाते थे।
एनसीआई@चूरू
बीकानेर सम्भाग के चूरू जिले के सरदारशहर इलाके में 20 साल से जहरीले सांप पकड़ने के लिए मशहूर रहे स्नेक केचर विनोदी तिवाड़ी की कोबरा सांप के डसने से मौत हो गई। शनिवार,10 सितम्बर को एक कोबरा सांप को पकड़ने के बाद उसने विनोद तिवाड़ी की अंगुली पर डस लिया था। इससे मौके पर ही विनोद तिवाड़ी की मौत हो गई। रविवार, 11 सितम्बर को निकली उनकी अंतिम यात्रा में बड़ी संख्या लोग शामिल हुए। तिवाड़ी को कोबरा के डसने का यह पूरा घटनाक्रम सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गया।

विनोद तिवाड़ी शनिवार को सरदारशहर में श्रीराम मंदिर के पास रखे कचरा पात्र के नीचे सांप होने की सूचना मिलने पर उसे पकड़ने गए थे। मौके पर मिले कोबरा को उन्होंने आसानी से काबू कर लिया था, मगर उसे थैले में डालने के दौरान कोबरा ने तिवाड़ी के हाथ की अंगुली पर डस लिया। इसका पता चलने के बाद भी उन्होंने थैले को ठीक से बंद किया। बाद में अंगुली को चूसकर जहर बाहर निकलने का प्रयास किया, लेकिन उन्हें अहसास हो गया था कि आज गड़बड़ हो गई है।
गोगामेड़ी पर गए और वहां मत्था टेका
उसके बाद तिवाड़ी पास ही स्थित लोक देवता महाराज गोगामेड़ी के स्थान पर गए और वहां मत्था टेका, लेकिन उसी दौरान उनका जी घबराने लगा। पास ही मौजूद लोगों ने उन्हें सम्भालने का प्रयास किया। इस दौरान उनके मुंह से अंतिम शब्द निकले कि ”आज जच गया लगता है।” इसके साथ ही वे जमीन पर गिर गए। सूचना मिलने पर पास ही स्थित विनोद तिवाड़ी के घर से उनकी पत्नी व पुत्र मौके पर पहुंचे। ये उन्हें ऑटो से अस्पताल लेकर गए, लेकिन तब तक विनोद तिवाड़ी दम तोड़ चुके थे।
घायल सांपों का उपचार भी करते थे
बताया जा रहा है सांप को रेस्क्यू करने के दौरान विनोद तिवाड़ी पानी तक नहीं पीते थे। इसका कारण यह था कि वे जिस सांप को पकड़ते थे, उसे बिना देरी किए सुरक्षित स्थान पर छोड़ना चाहते थे, जिससे वह परेशान नहीं हो। वे घायल सांपों का उपचार भी करते थे। उन्हें कई दिन तक खुले में अपने घर पर रखते थे। उनकी मरहम पट्टी किया करते थे। तिवाड़ी को सांप ने यह पहली बार नहीं काटा था। इससे पहले भी उन्हें सांप कई बार काट चुके थे, लेकिन वे कोबरा जितने जहरीले नहीं थे। तिवाड़ी का कहना था कि हर सांप जहरीला नहीं होता है। सांप स्वत: किसी को नहीं काटते। वे अपने आप को व्यक्ति विशेष से खतरा महसूस होने पर अपनी जीवन रक्षा के लिए ही काटते हैं। विनोद तिवाड़ी बरसों तक जिस मुहिम में लगे रहे आखिरकार वही मुहिम उनकी जान की दुश्मन बन गई।
