July 13, 2026

News Chakra India

Never Compromise

संजीवनी मामला: केन्द्रीय मंत्री शेखावत की गिरफ्तारी पर अदालत का यह आया आदेश, सीएम गहलोत को आया गुस्सा

संजीवनी मामला: केन्द्रीय मंत्री शेखावत की गिरफ्तारी पर अदालत का यह आया आदेश, सीएम गहलोत को आया गुस्सा

एनसीआई@जयपुर

बहुचर्चित संजीवनी क्रेडिट काे-ऑपरेटिव सोसायटी घोटाले के आरोपों में घिरे केन्द्रीय जलशक्ति मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत को हाईकोर्ट से राहत मिल गई है। हाईकोर्ट ने गुरुवार को सुनवाई करते हुए संजीवनी घोटाले में उनकी गिरफ्तारी पर रोक लगा दी। हाईकोर्ट ने एसओजी व राजस्थान में कहीं भी दर्ज एफआईआर पर गिरफ्तारी पर अंतरिम रोक लगाने के आदेश दिए हैं।

इधर, केन्द्रीय मंत्री शेखावत को मिली इस राहत पर सीएम गहलोत को बहुत गुस्सा आया। उन्होंने खुद इस बात को इन शब्दों में कहा-पैसे लौटाने की बजाय गजेन्द्र सिंह हाईकोर्ट जा रहे हैं, मुझे इस पर गुस्सा आ रहा है।

दो सुनवाई से इनकार के बाद तीसरे पर आया फैसला

दरअसल, संजीवनी क्रेडिट को-ऑपरेटिव सोसायटी घोटाले मामले में एसओजी ने जोधपुर सहित जालोर और बाड़मेर जिले में एफआईआर दर्ज करनी शुरू कर दी थी। इन एफआईआर के बाद केन्द्रीय मंत्री गजेन्द्र सिंह ने 24 मार्च को जोधपुर हाईकोर्ट में मामले की जांच सीबीआई से करवाने और गिरफ्तारी पर रोक की मांग को लेकर याचिका दायर की थी।

इससे पूर्व 28 मार्च और 3 अप्रेल को हुई सुनवाई में हाईकोर्ट जस्टिस मनेाज गर्ग और प्रवीर भटनागर की बेंच ने सुनवाई पर इनकार कर दिया था। लेकिन, 13 अप्रेल गुरुवार को हुई सुनवाई में जस्टिस कुलदीप माथुर ने राहत देते हुए गिरफ्तारी पर रोक लगा दी और 3 सप्ताह बाद दोबारा सुनवाई के लिए कहा गया है। केन्द्रीय जलशक्ति मंत्री गजेन्द्र सिंह की ओर से जोधपुर हाईकोर्ट में सीनियर एडवोकेट मनीन्द्र सिंह, उनके सहायक एडवोकेट युवराज सिंह और आदित्य विक्रम सिंह भी मौजूद थे।

शेखावत को हाईकोर्ट नहीं जाना चाहिए था: सीएम

इधर, केन्द्रीय मंत्री शेखावत को राहत मिलने के बाद सीएम गहलोत ने अपनी अजीब प्रतिक्रिया दी। वे गुरुवार को जयपुर के बिड़ला ऑडिटोरियम में आयोजित आरयूएचएस के दीक्षांत समारोह में हिस्सा लेने पहुंचे थे। यहां उन्होंने मीडिया से बातचीत के दौरान कहा-गजेन्द्र सिंह शेखावत ने गिरफ्तारी पर रोक लगवाई है। कल तक तो कह रहे थे मैं तो इस मामले में हूं ही नहीं, तो फिर हाईकोर्ट क्यों पहुंचे? अपने अरेस्ट न होने पर अपील क्यों लगवाई है?

जोधपुर में संजीवनी आनंदा की इस इमारत को दिखाकर निवेशकों को भरोसे में लिया गया। बिल्डिंग में 200 फ्लेट हैं।

जोधपुर में संजीवनी आनंदा की इस इमारत को दिखाकर निवेशकों को भरोसे में लिया गया। बिल्डिंग में 200 फ्लेट हैं।

मैं कहना चाहूंगा कि- 2 लाख परिवार बर्बाद हो गए, उन्हें शर्म आनी चाहिए कि केन्द्रीय मंत्री होकर अपनी गलती स्वीकार नहीं कर रहे हैं। अपने दोस्तों को कहें, जो प्रॉपर्टी देश-विदेश में है उन्हें बेच कर रुपए चुकाएं।

वे शेखावत को लेकर बोले-केन्द्रीय मंत्री बनना बड़े मान-सम्मान की बात है और जिंदगी में फिर क्या चाहिए? राजस्थान के लोग बर्बाद हो रहे हैं, मेरे पास भी आए थे, लोग रोने लगे थे। इन्हें शर्म आनी चाहिए, लोग एमएलए बनकर खुश हैं। ऐसे मंत्री को केन्द्रीय मंत्री रहने का अधिकारी नहीं। पीएम को चाहिए कि ऐसे मंत्री को बर्खास्त करें। मुझे गुस्सा आ रहा है। ये आगे बढ़कर नहीं कह रहे हैं कि पैसे दिलवाऊंगा। पैसे क्यों नहीं दिलवा रहे हैं। यदि मुलजिम नहीं थे तो क्यों गए हाईकोर्ट?

मुख्यमंत्री और केन्द्रीय मंत्री हैं आमने-सामने

पिछले कुछ महीने से संजीवनी को-ऑपरेटिव सोसायटी के मुद्दे को लेकर मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और केन्द्रीय जलशक्ति मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत आमने-सामने हैं। संजीवनी मुद्दे को लेकर 21 फरवरी को सीएम ने शेखावत सहित उनके परिवार को इस घोटाले का आरोपी बताया था। इसके बाद शेखावत ने मार्च के पहले सप्ताह में गहलोत के खिलाफ दिल्ली की कोर्ट में मानहानि केस दायर किया था।

मुख्यमंत्री पर मानहानि का केस दायर करने के बाद राजस्थान में एसओजी एक्टिव हुई और सोसायटी के संचालकों के खिलाफ मामला दर्ज करना शुरू किया। 22 मार्च से अब तक जोधपुर, बाड़मेर व जालोर में 200 से ज्यादा मामले दर्ज हो चुके हैं।

बड़ा सवाल: मुख्यमंत्री अशोक गहलोत केन्द्रीय मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत के कथित घोटाले पर तो बहुत मुखर हैं, उन्हें सजा दिलाने के लिए पूरी ताकत लगाए हुए हैं। वहीं इस समय राजस्थान की राजनीति में इससे भी अधिक ज्वलंत मुद्दा, पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे पर उन्हीं के द्वारा लगाए गए घोटालों की साढ़े चार साल बाद भी जांच नहीं कराए जाने के मसले पर वह बिलकुल खामोश हैं, जबकि वह इस प्रकरण में अपनी ही पार्टी के भीतर निशाने पर हैं।

यहां यह भी उल्लेखनीय है कि अशोक गहलोत और वसुंधरा राजे के निकटतम सम्बन्धों के कयास आम हैं। गहलोत के द्वारा बीजेपी के एक एमएलए से कही गई बात से यह भी साबित होना माना जा रहा है कि वसुंधरा राजे गुट के विधायकों ने संकट के समय उनकी सरकार बचाने में अपनी भूमिका निभाई थी। वहीं वसुंधरा राजे, उनके खिलाफ जांच की मांग उठाने वाले सचिन पायलट की विरोधी बताई जाती हैं। यह चर्चा आम है कि सचिन पायलट की बगावत के समय वसुंधरा के विरोध के कारण ही उन्हें बीजेपी में एंट्री नहीं मिल सकी। दूसरी ओर जहां वसुंधरा राजे अपने आपको वापस राजस्थान की मुख्यमंत्री के रूप में बीजेपी की ओर प्रमुख उम्मीदवार मानती हैं तो गजेन्द्र सिंह शेखावत का नाम भी इसके लिए चर्चा में हैं। इस प्रकार वसुंधरा और शेखावत आपस में कड़े प्रतिद्वंदी हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Copyright © All rights reserved. | Newsphere by AF themes.