April 22, 2026

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सीएम गहलोत ने चल दिया एक और बहुत बड़ा चुनावी दाव

सीएम गहलोत ने चल दिया एक और बहुत बड़ा चुनावी दाव

एनसीआई@बांसवाड़ा

चुनावी साल को देखते हुए सीएम अशोक गहलोत ने बुधवार को एक और बड़ा कार्ड चल दिया। उन्होंने राजस्थान में जातिगत जनगणना करवाने की घोषणा कर दी। साथ ही, ओबीसी का आरक्षण 21 फीसदी से बढ़ाकर 27 फीसदी करने और मूल ओबीसी के लिए अलग से छह फीसदी आरक्षण करने की घोषणा की। गहलोत बांसवाड़ा के मानगढ़ धाम में विश्व ​आदिवासी दिवस पर हुई सभा को सम्बोधित कर रहे थे।

गहलोत ने सभा में कहा- राहुल गांधी ने कहा कि जातिगत जनगणना होनी चाहिए तो पूरे देश में एक मैसेज चला गया। हम चाहेंगे आपकी भावना के हिसाब से राजस्थान में जातिगत जनगणना शुरू होगी। जाति के आधार पर जिसका जितना हक है, उसे मिलेगा। आज राजस्थान में ओबीसी का 21 फीसदी आरक्षण है। उसे 27 फीसदी करने की मांग लम्बे समय से चल रही है। उसे हम पूरा करेंगे। मूल ओबीसी के लिए 6% अलग से रिजर्व कर देंगे। इस प्रकार की सोच को हम आगे बढ़ाना चाहते हैं।

राजस्थान में हो जाएगा 70 फीसदी आरक्षण

प्रदेश में अभी एससी को 16 फीसदी, एसटी को 12 फीसदी, ओबीसी को 21 फीसदी, ईडब्ल्यूएस को 10 फीसदी और एमबीसी को 5 फीसदी आरक्षण है। ओबीसी का आरक्षण छह फीसदी और बढ़ाकर 27 फीसदी करने के बाद राजस्थान में 70 फीसदी आरक्षण हो जाएगा।

ओबीसी वोटर्स को साधने के लिए बड़ा सियासी दाव

गहलोत ने ओबीसी वोटर्स को पक्ष में करने के लिए चुनावी साल में यह बड़ा ऐलान किया है। ओबीसी आरक्षण को बढ़ाने की मांग लम्बे समय से की जा रही थी। वरिष्ठ नेता हरीश चौधरी सहित कांग्रेस के कई नेता ओबीसी आरक्षण को 21 फीसदी से बढ़ाकर 27 फीसदी करने की मांग उठा रहे थे। ओबीसी आरक्षण के वर्गीकरण की मांग भी लम्बे समय से की जा रही थी। विधानसभा चुनावों से ठीक पहले ओबीसी आरक्षण बढ़ाने और मूल ओबीसी को अलग से आरक्षण देने का ऐलान करके गहलोत ने बड़ा सियासी दांव खेला है।

विधानसभा में संकल्प पारित कर चुकी सरकार

विधानसभा में पिछले दिनों सरकार ने जातिगत जनगणना को लेकर संकल्प पारित करके केन्द्र सरकार को भिजवाया था। इस संकल्प में केन्द्र सरकार से जातिगत जनगणना करवाने और पुराने आंकड़े सार्वजनिक करने की मांग की गई थी।

बिहार में जारी है जातिगत जनगणना

बिहार सरकार जातिगत जनगणना करवा रही है। पटना हाईकोर्ट ने जातिगत जनगणना पर रोक लगाई थी, मगर हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने यह रोक हटा दी है। जातिगत जनगणना शुरू से ही विवादों में रही है। बीजेपी इसका विरोध करती रही है, जबकि कांग्रेस और उसके सहयोगी दल इसका समर्थन करते रहे हैं।

यूपीए सरकार ने 2011 में सामाजिक आर्थिक और जातिगत जनगणना करवाई थी। सरकार ने आर्थिक सामाजिक जनगणना के आंकड़े तो जारी कर दिए थे, लेकिन जातिगत जनगणना के आंकड़े जारी नहीं किए थे।

समय पर पूरी नहीं हो सकेगी जातिगत जनगणना

सीएम अशोक गहलोत ने जातिगत जनगणना करवाने की घोषणा ऐसे समय में की है, जब विधानसभा चुनाव की आचार संहिता लगने में तीन महीने से भी कम‌ का समय बचा है। इतने कम समय में जातिगत जनगणना पूरी करना सम्भव नहीं है। चुनाव की घोषणा होते ही इसके अटकने के आसार हैं।

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