April 22, 2026

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I.N.D.I.A. में पाकिस्तानी आतंकवाद के मुद्दे पर भी तगड़ा विरोधाभास

I.N.D.I.A. में पाकिस्तानी आतंकवाद के मुद्दे पर भी तगड़ा विरोधाभास

एनसीआई@सेन्ट्रल डेस्क

जम्मू कश्मीर के अनंतनाग में आतंकी हमले में भारतीय सेना के कर्नल, मेजर और एक जवान के अलावा जम्मू कश्मीर पुलिस के डीएसपी भी शहीद हो चुके हैं। इस प्रकार भारत को यह भारी हानि झेलनी पड़ी है। अब एक ऊंची पहाड़ी पर फंसे हुए आतंकियों को ढेर करने के लिए सुरक्षा बलों ने तीसरे दिन भी बहुत बड़ा अभियान चला रखा है। मगर राजनीतिज्ञ है कि ऐसे माहौल में भी राजनीति करने से बाज नहीं आ रहे हैं, अपना पाकिस्तानी प्रेम दिखाने से नहीं चूक रहे हैं।

इनमें कांग्रेस के अलावा नेशनल कांफ्रेंस और पीडीपी भी हमेशा की तरह शामिल है। ये तीनों पार्टियां नवगठित I.N.D.I. एलाइंस का हिस्सा हैं। वहीं इसी विपक्षी गठबंधन के एक अन्य घटक शिव सेना (उद्धव गुट) ने इनसे विरोधी रुख दिखाया है। दरअसल आतंकी हमले के बाद एक बार फिर नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष फारुक अब्दुल्ला ने कहा कि मोदी सरकार को कश्मीर में स्थायी शांति के लिए पाकिस्तान से बातचीत करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि युद्ध से शांति नहीं हो सकती है। कांग्रेस के सांसद सैफुद्दीन सोज ने तो फारुक अब्दुल्ला से भी दो कदम आगे बढ़कर बयान दिया। उन्होंने पीएम नरेन्द्र मोदी को पाकिस्तान और आतंकी संगठनों से बातचीत करने की सलाह दे दी। अभी तक कांग्रेस ने उनके बयान पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है। वहीं शिवसेना ( उद्धव गुट ) की नेता प्रियंका चतुर्वेदी ने पाकिस्तान से बातचीत की सलाह को गलत बताया। गौरतलब है कि I.N.D.I. एलाइंस में शुरुआत से ही विभिन्न मुद्दों पर विरोधाभास सामने आ रहे हैं।

सोज ने गिरा दी थी अटल बिहारी की सरकार

कांग्रेस नेता सैफुद्दीन सोज 1999 तक नेशनल कॉन्फ्रेंस से जुड़े रहे और जनता दल की संयुक्त मोर्चा की सरकारों में केन्द्रीय मंत्री भी रहे। नेशनल कॉन्फ्रेंस के टिकट पर तीन बार लोकसभा और एक बार राज्यसभा के लिए चुने जा चुके हैं। 1998 में फारुक अब्दुल्ला ने अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार को समर्थन दिया था। तब नेशनल कॉन्फ्रेंस एनडीए का हिस्सा भी बना। उमर अब्दुल्ला वाजपेयी मंत्रिमंडल में शामिल भी हुए। 1999 में जयललिता के समर्थन वापस लेने के कारण वाजपेयी सरकार संकट में आ गई। जब सदन में विश्वास प्रस्ताव आया तो उड़ीसा के तत्कालीन मुख्यमंत्री गिरिधर गोमांग ने लोकसभा की कार्रवाई में हिस्सा लिया और सरकार के खिलाफ वोटिंग की। इसके अलावा नेशनल कॉन्फ्रेंस के सैफुद्दीन सोज ने पार्टी व्हिप का उल्लंघन करते हुए विरोध में वोट दिया। परिणाम यह रहा कि अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार एक वोट से अल्पमत में आ गई। इसके बाद उन्हें नेशनल कॉन्फ्रेंस से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया।

मनमोहन सरकार में केबिनेट मंत्री बने थे कश्मीरी नेता

नेशनल कॉन्फ्रेंस से निकाले जाने के बाद सैफुद्दीन सोज ने कांग्रेस का हाथ थाम लिया। कांग्रेस पार्टी ने उन्हें दो बार राज्यसभा में भेजा। वह 2002 से 2015 तक कांग्रेस सांसद रहे। मनमोहन सिंह की यूपीए वन में 2006 से 2009 तक सैफुद्दीन सोज केन्द्रीय मंत्री भी बने। उन्हें जल संसाधन विभाग का मंत्री बनाया गया था। 2008 में वह जम्मू-कश्मीर में कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष भी बनाए गए। 2007 में वह कांग्रेस की ओर से उपराष्ट्रपति के रेस में शामिल हुए, मगर हामिद अंसारी ने बाजी मार ली थी। 2014 में मोदी सरकार बनने के बाद सैफुद्दीन सोज ने बीजेपी की खिलाफत शुरू की। कश्मीर में धारा 370 हटाए जाने के बाद उन्होंने खुद को नजरबंद करने का आरोप भी लगाया था, तब उनके समर्थन में प्रियंका गांधी ने मोर्चा संभाला था। सैफुद्दीन सोज कश्मीर को लेकर कई बार विवादित बयान दे चुके हैं। 2017 में एक इंटरव्यू में उन्होंने कश्मीर समस्या के लिए भारत को दोषी ठहरा दिया था। इस मुद्दे पर वह शो में वकील राम जेठमलानी से उलझ गए थे।

भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता संबित पात्रा ने कहा कि जम्मू कश्मीर में शहीद हुए हमारे जवानों और अधिकारियों की अंतिम यात्रा और आतंकियों के खिलाफ चल रहे ऑपरेशन के बीच कांग्रेस के दिग्गज नेता सैफुद्दीन सोज बयान दे रहे हैं कि भारत को पकिस्तान से बात करना चाहिए। साथ ही यह जानने का भी प्रयास करना चाहिए कि आतंकियों के दिमाग और मन में क्या चल रहा है और वे क्या चाहते हैं। उन्होंने आगे कहा कि फारुक अब्दुल्ला जैसे बड़े नेता भी पाकिस्तान के साथ बातचीत की वकालत कर रहे हैं। जबकि, भारत सरकार कई बार स्पष्ट कर चुकी है कि बातचीत और आतंक एक साथ नहीं चल सकते। पात्रा ने भाजपा मुख्यालय में पत्रकारों से बात करते हुए इन नेताओं के बयान को अनुचित और दुखद बताते हुए कहा कि विपक्षी ‘आईएनडीआई’ गठबंधन सैफुद्दीन सोज और फारुक अब्दुल्ला जैसे नेताओं का बहिष्कार करने की बजाय पत्रकारों का बहिष्कार कर रहा है, जो लोकतंत्र के इतिहास में कभी नहीं हुआ।

राहुल गांधी के ‘मोहब्बत की दुकान’ वाले स्‍लोगन पर हमला

जवाहर लाल नेहरू द्वारा संविधान में किए गए पहले संशोधन, इंदिरा गांधी द्वारा लाए गए आपातकाल और राजीव गांधी द्वारा लाए गए डिफेमेशन कानून, जिसके बाद में वापस लेने का जिक्र करते हुए भाजपा प्रवक्ता ने राहुल गांधी से भी सवाल पूछा कि क्या यह मोहब्बत के दुकान की लिस्ट है? सामान नफरत का है और बात मोहब्बत की दुकान की करते हैं। उन्होंने कहा कि मीडिया के प्रति नफरत का प्रदर्शन किया गया है। यह उनकी सच्चाई दिखाता है। यह सबको बॉयकॉट करके अपने लिए सत्ता का शॉर्टकट ढूंढ रहे हैं।

पत्रकारों का बायकॉट किया है या टारगेट करने के लिए बनाई लिस्ट’

लिस्ट में शामिल 14 एंकर्स की सुरक्षा का सवाल उठाते हुए भाजपा राष्ट्रीय प्रवक्ता संबित पात्रा ने यह भी पूछा कि इनका बॉयकाट किया गया है या इन्हें टारगेट करने के लिए इनके नामों की लिस्ट को जारी किया गया है? क्या यह एक हिटलिस्ट है? एफआईआर करेंगे? उन्होंने पूछा कि अगर कांग्रेस के कार्यकर्ता इस हिटलिस्ट में शामिल पत्रकारों के साथ दुर्व्यवहार करें, उन पर हमला कर दें तो इसके लिए जिम्मेदार कौन होगा? यह बॉयकॉट लिस्ट नहीं है, हिटलिस्ट है, हिट जॉब है। क्या कांग्रेस सोज, अब्दुल्ला और रामचरित मानस को लेकर विवादित बयान देने वाले चंद्रशेखर का बॉयकॉट कर सकते हैं?

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