राष्ट्रीय महिला आयोग की पूर्व अध्यक्ष ममता शर्मा की घर वापसी, बीजेपी से निष्कासित विधायक व एक उम्मीदवार रहे भाजपाई ने भी थामा कांग्रेस का दामन, जानिए पूरा गणित और क्या होगा असर?
एनसीआई@जयपुर/झुंझुनूं
झुंझुनूं जिले के अरदावता में बुधवार को हुई कांग्रेस की राष्ट्रीय महासचिव प्रियंका गांधी की सभा में राष्ट्रीय महिला आयोग की पूर्व अध्यक्ष ममता शर्मा वापस कांग्रेस में शामिल हो गईं। इनके अलावा भाजपा से धौलपुर विधायक बनीं शोभारानी कुशवाह व किशनगढ़ से गत बार भाजपा प्रत्याशी रहे विकास चौधरी ने भी कांग्रेस का दामन थाम लिया।

भाजपा पर नहीं पड़ेगा असर
भाजपा के इन नेताओं के कांग्रेस में शामिल होने को बीजेपी पर पहला प्रहार माना जा रहा है। हालांकि, इन तीनों नेताओं से भाजपा पर कोई खास असर पड़ने की आशंका नहीं है। ऐसा इसलिए कि शोभा रानी कुशवाहा 25 सितम्बर कांड में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के समर्थन में कांग्रेस विधायकों के साथ विधानसभा अध्यक्ष को इस्तीफा सौंपने वाले नेताओं में शामिल थीं। राज्यसभा चुनाव में उन्होंने कांग्रेस के पक्ष में मतदान किया था। इसके अलावा वर्ष 2018 के चुनाव में भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ चुके विकास चौधरी की जगह पहले ही भाजपा किशनगढ़ से भागीरथ चौधरी को उम्मीदवार बना चुकी है। विकास चौधरी भाजपा से इसीलिए नाराज चल रहे थे।
ममता का नहीं बैठ सका तालमेल
वहीं ममता शर्मा भी वर्ष 2018 में उनके पुत्र समृद्ध शर्मा को बूंदी सीट से टिकट नहीं दिए जाने से नाराज होकर कांग्रेस छोड़ भाजपा में शामिल हो गईं थीं। वह पहले कांग्रेस पार्टी से विधायक और कांग्रेस सरकार के समय महिला आयोग की राष्ट्रीय अध्यक्ष रह चुकीं थीं। बूंदी सीट से लगातार दो चुनाव हारने के चलते वर्ष 2018 में उनका टिकट कट गया था। भाजपा में शामिल होने पर इन्हें पीपल्दा से टिकट मिला, हालांकि, वह यहां से भी कांग्रेस उम्मीदवार रामनारायण मीणा से हार गईं। इसके बाद भाजपा से उनका नाता कमजोर ही रहा। ऐसे में अब ये तीनों नेता भले ही भाजपा से अलग होकर कांग्रेस में शामिल हुए हों, लेकिन हकीकत यह है कि भाजपा ने पहले ही इन नेताओं को अलग-थलग कर रखा था।
तीनों को मिल सकता है टिकट?
शोभा रानी कुशवाहा को कांग्रेस पार्टी धौलपुर विधानसभा से प्रत्याशी बना सकती है। बूंदी विधानसभा से ममता शर्मा को या फिर उनके पुत्र समृद्ध शर्मा को प्रत्याशी बनाया जा सकता है। इसी तरह विकास चौधरी को भी कांग्रेस पार्टी अपना उम्मीदवार बना सकती है। इन तीनों नेताओं को कांग्रेस पार्टी की ओर से टिकट दिए जाने की संभावनाएं इसलिए भी प्रबल हो जाती हैं, क्योंकि बूंदी विधानसभा सीट पर 1998 और 2003 में ममता शर्मा ने ही कांग्रेस को जीत दिलाई थी। इसके बाद कांग्रेस के टिकट पर लगातार दो बार चुनाव हारने के चलते 2018 में ममता शर्मा का कांग्रेस ने टिकट काटा था, लेकिन तब भी कांग्रेस को यहां से जीत नहीं मिल सकी।
इसलिए इन सीटों पर दांव खेल सकती है कांग्रेस
किशनगढ़ विधानसभा सीट से कांग्रेस पार्टी लगातार दो चुनाव हार चुकी है। कांग्रेस के पास इस बार भी कोई मजबूत प्रत्याशी नहीं है। ऐसे में या तो विकास चौधरी को पार्टी टिकट देगी या फिर वह कांग्रेस को जिताने का काम करेंगे। धौलपुर विधानसभा की बात करें तो यहां अगर एक उपचुनाव को भी जोड़ दिया जाए तो कांग्रेस चार चुनाव हार चुकी है। ऐसे में कहा जा सकता है कि कांग्रेस पार्टी इन नेताओं को विधानसभा चुनाव में टिकट देकर हारी हुई सीटों पर जीतने के लिए दांव खेल सकती है।
