April 20, 2026

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किसी मुस्लिम की शादी में बेंड, डीजे बजा तो मिलेगी जोरदार सजा, निकाह के लिए भी तरस जाएगा परिवार

किसी मुस्लिम की शादी में बेंड, डीजे बजा तो मिलेगी जोरदार सजा, निकाह के लिए भी तरस जाएगा परिवार

उत्तर प्रदेश के अमेठी में निकाह को लेकर मुस्लिम समुदाए ने बड़ा फैसला किया है। सुन्नी उलेमा काउंसिल की बैठक में निर्णय लिया गया है कि किसी भी मुस्लिम शख्स के निकाह में डीजे, बेंड नहीं बजेगा। अगर परिवार इस बात को नहीं मानेगा तो उस पर कार्रवाई होगी। उसके घर में होने वाले अंतिम संस्कार में भी कोई नहीं जाएगा।

एनसीआई@अमेठी

उत्तर प्रदेश के अमेठी में उलेमाओं ने बैठक आयोजित कर निकाह में बैंड को बैन करने का फैसला किया है। जानकारी के मुताबिक, उलेमाओं की बैठक तिलोई विधानसभा के बारकोट में हुई। बैठक के दौरान मौलाना मोहम्मद नासिर हुसैन अशरफी ने बताया कि आर्थिक बजट को देखते हुए मदरसा एदारे अशर्फियां शमशुल उलूम लतीफिया में सुन्नी उलेमा काउंसिल की बैठक में बड़ा फैसला लिया गया। किसी की भी शादी में अगर डीजे, बैंड बाजे या नाच-नौटंकी होगी तो मौलाना निकाह नही कराएंगे।

मौलाना नासिर हुसैन ने कहा अगर कोई बात नहीं मानेगा तो उस पर पर कार्रवाई होगी। उसके अंतिम संस्कार में भी कोई नहीं जाएगा। उनका यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।

मौलाना मोहम्मद नासिर हुसैन अशरफी ने बताया कि मदरसा एदारे अशर्फियां शमशुल उलूम लतीफिया में सुन्नी उलेमा काउंसिल की शादी-ब्याह के मौके पर समाज में फैली बुराइयों डीजे, नाच-गाना, बाजा पर बैठक हुई। बैठक में फैसला किया गया कि निकाह को आसान किया जाए। निकाह में फैली खुराफात की रस्मों को खत्म किया जाए। बैठक में फैसला लिया गया है कि जिस निकाह में डीजे, बाजा, नाच-गाना होगा उसमें उलैमा निकाह पढ़ने से परहेज करेंगे। उस निकाह में हम जैसे लोग शरीक नहीं होंगे। इस दौरान अगर कोई आदमी अपनी जिद पर अड़ेगा, हठधर्मी करेगा तो उस परिवार के जनाजे में भी जाने में हम लोग परहेज करेंगे। ये तभी तक जारी रहेगा, जब तक शख्स को अपनी गलती का अहसास न हो जाए।

नशा मुक्ति के खिलाफ भी चलेगा अभियान

मौलाना मोहम्मद नासिर हुसैन अशरफी ने कहा, इसके अलावा हमें नशा मुक्ति के लिए भी अभियान चलाना है। नशे की वजह से हमारे नौजवान भटक गए हैं। बच्चों को पढ़ाने के लिए भी लोगों को जागरूक करना है। उन्होंने कहा कि घर-घर जाकर यह जागरुकता फैलाई की जाएगी कि दहेज न लें। शादियों को आसान करें, सस्ती शादियां हों। महंगी शादियों की वजह से गरीब आदमी पिसता चला जा रहा है। उसकी बच्चियां बैठी हैं। रिश्ता करना मुश्किल हो गया। कई लोगों ने हमारी बात माननी भी शुरू कर दी है। कई शादियां बिना ताम-झाम के हो गईं।

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