अदालत ने दिया बड़ा फैसला, अवैध सम्बन्ध में रहने वाली पत्नी भरण-पोषण की हकदार नहीं, घरेलू हिंसा में दायर केस को किया खारिज
एनसीआई@जोधपुर
जोधपुर के एडीजेएम-5 कोर्ट ने कहा है कि अवैध सम्बंध में रहने वाली पत्नी भरण पोषण की हकदार नहीं है। आदेश के साथ ही कोर्ट ने घरेलू हिंसा में दायर केस को खारिज कर दिया।
जज प्रकाश चंद मीणा ने नीतू प्रजापत बनाम सुनील प्रजापत मामले में आदेश दिया कि पत्नी पति को छोड़कर अवैध सम्बंध में रह रही है। साथ ही भरण पोषण की मांग भी कर रही है, ऐसी स्थिति में वह भरण पोषण की हकदार नहीं होगी।
एडवोकेट हेमंत कुमार आसेरी ने बताया- मिल्ट्री इंजीनियर सर्विस में कार्यरत सुनील प्रजापत की शादी जून 2016 में हुई थी। उसकी पत्नी नीतू प्रजापत 2020 में घर छोड़ कर अपने बॉय फ्रेंड धीरज चौहान के साथ चली गई थी। नीतू ने पति के खिलाफ घरेलू हिंसा में मुकदमा दर्ज करवाया था। इस पर कोर्ट ने 8 हजार रुपए महीना भरण पोषण के ऑर्डर दिए थे। नीतू और उसके पति के बीच राजीनामा हो गया था। राजीनामे की शर्त यह थी कि पति नीतू के अकाउंट में 8 हजार रुपए मासिक जमा करवाएगा, लेकिन वह अपने बॉय फ्रेंड के साथ नहीं रह कर ससुराल में रहेगी।
राजीनामे के बाद भी जब नीतू ससुराल नहीं आई तो सुनील ने उसके अकाउंट में पैसे भेजना बंद कर दिया। इस पर नीतू ने अपने वकील मदन बलाई के मार्फत कोर्ट में घरेलू हिंसा में अक्टूबर 2022 को फिर से मुकदमा दर्ज कर दिया।
इसकी सुनवाई में कोर्ट ने अवैध सम्बंध में रहने का सबूत मांगा। पति सुनील की ओर से वकील हेमंत ने नीतू द्वारा भरे रीट एग्जाम फॉर्म में अन्य कॉन्टेक्ट नम्बर में बॉय फ्रेंड धीरज के फोन नम्बर को सबूत के साथ पेश किया। इस पर कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलील सुनने के बाद 23 नवम्बर को यह आदेश दिया कि अवैध सम्बंध में रहने वाली पत्नी भरण पोषण की हकदार नहीं होगी और केस को खारिज कर दिया।
