कोटा: बूढ़ादीत गांव में स्थित 9 वीं शताब्दी का सूर्य मंदिर पर्यटन स्थल के रूप में होगा विकसित
एनसीआई@कोटा
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के प्रयासों से कोटा को पर्यटन के क्षेत्र में एक और सौगात मिलने जा रही है। केन्द्रीय पर्यटन मंत्रालय ने बूढ़ादीत स्थित सूर्य मंदिर को धार्मिक पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने के लिए सैद्धांतिक रूप से चिह्नित कर लिया है। मंत्रालय ने राजस्थान सरकार के पर्यटन विभाग को पत्र लिख कर इसके लिए डीपीआर बनाने के निर्देश दिए हैं।
9वीं शताब्दी का है सूर्य मंदिर
कोटा से करीब 55 किमी दूर बूढ़ादीत में स्थित सूर्य मंदिर नागर शैली में बना हुआ है। यह एक हजार साल से अधिक पुराना है। मंदिर का निर्माण किसने करवाया, इसकी कोई जानकारी नहीं है। लेकिन ढलते हुए सूर्य के प्रतीक बूढ़-आदित्य के कारण ही इस जगह का नाम बूढ़ादीत पड़ा। यह मंदिर झालरापाटन के सूर्य मंदिर से भी पुराना है। अभी इसका संरक्षण राजस्थान पुरातत्व विभाग द्वारा किया जा रहा है। मंदिर के पास एक कुंड भी है, जो भी उसी समय का है।
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला का मानना है कि कोटा समेत सम्पूर्ण हाड़ोती क्षेत्र गौरवशाली विरासत से समृद्ध है। यह विरासत बड़ी संख्या में पर्यटकों को आकर्षित कर सकती हैं। इनके आसपास मूलभूत सुविधाओं के विकास व इनको वैश्विक स्तर पर प्रचारित करने के लिए अब तक गम्भीर प्रयास नहीं हो सके। इसे देखते हुए उन्होंने केंद्र सरकार के पर्यटन मंत्रालय को कोटा-बूंदी के अनेक ऐतिहासिक स्थलों की जानकारी देकर वहां विभिन्न योजनाओं के तहत विकास करवाने को कहा है। इसी के तहत बूढ़ादीत के सूर्य मंदिर को केन्द्रीय पर्यटन मंत्रालय ने प्रसाद योजना के तहत धार्मिक पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने का निर्णय लिया है।
उल्लेखनीय है कि बूंदी जिले के केशवरायपाटन स्थित भगवान केशवराय जी के मंदिर को धार्मिक पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया जा रहा है। वहां चम्बल नदी के किनारे को भी रिवर फ्रंट के रूप में विकसित किया जाएगा। इसकी डीपीआर तैयार हो गई है, जल्द ही वहां कार्य शुरू हो जाएगा।
स्पीकर बिरला ने सुनी आमजन की समस्याएं
ओम बिरला गुरुवार को संसदीय क्षेत्र के पांच दिवसीय प्रवास पर कोटा पहुंचे। उन्होंने दोपहर में लोक सभा केम्प कार्यालय में आमजन से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने लोगों की समस्याओं को सुना और अधिकारियों को समाधान के निर्देश दिए।
