July 13, 2026

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खेल संकुल के महिला-पुरुष सांझा शौचालय मामले में खेल अधिकारी व जिला कलक्टर को न्यायालय ने माना दोषी, लगाया जुर्माना

खेल संकुल के महिला-पुरुष सांझा शौचालय मामले में खेल अधिकारी व जिला कलक्टर को न्यायालय ने माना दोषी, लगाया जुर्माना

एनसीआई@बूंदी

न्यायालय स्थाई लोक अदालत बूंदी के अध्यक्ष जिला एवं सत्र न्यायाधीश दिनेश कुमार गुप्ता, सदस्य हिमांशी शर्मा व सुनीता जैन ने पीड़िता अलीना शेख की याचिका स्वीकार करते हुए जिला खेल अधिकारी व जिला कलक्टर बूंदी, पदेन अध्यक्ष जिला क्रीड़ा परिषद को आदेश दिया है कि पीड़िता को एक लाख रुपए मानसिक संताप व 10 हजार रुपए मुकदमा खर्च अदा करें। साथ ही विवादित सांझा शौचालय को पुरुष शौचालय घोषित करने व तीन माह के अंदर पृथक महिला शौचालय बनाकर उसमें महिला चित्र एव महिला अंकन कर रिपोर्ट पेश करने के निर्देश भी दिए। शौचालय की साफ-सफाई की माकूल व्यवस्था रखने को भी कहा। इस फैसले के अनुसार पीड़िता दोषियों के विरुद्ध अलग से फौजदारी कार्रवाई करने के लिए स्वतंत्र रहेगी।

एडवोकेट अजय नुवाल ने पीड़िता एडवोकेट अलीना शेख की ओर से पैरवी करते हुए दलील दी कि पूरे देश में मात्र खेल संकुल बूंदी में ही सांझा महिला-पुरुष शौचालय एक ही कमरे में है। इसके दरवाजे के एक ओर सुविधाएं पुरुष एवं इसी दरवाजे की दूसरी तरफ सुविधाएं महिलाएं लिख रखा है। महिला और पुरुष के चित्र इसी क्रम में बनाए हुए हैं। अंदर की स्थिति जर्जर, गंदगी से परिपूर्ण, बीमारियां फैलाने वाली तथा बच्चियों व महिलाओं को लज्जित करने वाली है। इस बाबत कई बार खेल अधिकारी, जिला कलक्टर एवं पदेन अध्यक्ष जिला क्रीड़ा परिषद बूंदी को अवगत कराया। अखबारों में भी यह पीड़ा प्रकाशित हुई, किंतु जानबूझकर इस स्थिति को निरंतर बरकरार रखा गया। इसी कारण पीड़िता, जो खेल संकुल में घूमने आई और शौचालय के लिए अंकित महिला शौचालय पढ़कर अंदर चली गई, किंतु वहां पहले से पेशाब कर रहे पुरुषों को देखकर शर्मसार होकर रोते हुए बाहर निकली। ऐसा अन्य महिलाओं के साथ भी हुआ है, किंतु यहां पीड़ित वकील थी, इसलिए उसने इस बेइज्जती को जड़ से समाप्त करने और दोषियों को दण्डित करवाने के लिए अदालत में याचिका दी।

इसमें अप्रार्थीगण द्वारा याचिका के नोटिस तामील हो जाने के उपरांत विवादित शौचालय में अंकित महिला शब्द व चित्र को खुरच कर मिटाने का प्रयास किया गया, जो स्पष्ट दर्शित है। न्यायालय ने इस पर सुनवाई कर अपना फैसला दिया। इससे खिलाड़ियों के साथ अधिवक्ताओं में भी खुशी की लहर है।

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