April 20, 2026

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मुस्लिमों के खिलाफ कोई एक्शन न हो, सीएए पर रोक लगाएं मी लॉर्ड, सुप्रीम कोर्ट पहुंचा मामला

मुस्लिमों के खिलाफ कोई एक्शन न हो, सीएए पर रोक लगाएं मी लॉर्ड, सुप्रीम कोर्ट पहुंचा मामला

एनसीआई@नई दिल्ली

नागरिकता संशोधन कानून (CAA) लागू होते ही इसके खिलाफ मुस्लिम संगठन सुप्रीम कोर्ट पहुंच गए हैं। इनमें इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (IUML) भी शामिल है। इस संगठन ने सुप्रीम कोर्ट से इस कानून पर तत्काल रोक लगाने की मांग की है।

आईयूएमएल ने सुप्रीम कोर्ट में अर्जेंट सुनवाई की एप्लिकेशन देकर कहा है कि यह कानून असंवैधानिक और भेदभावपूर्ण है। यह मुस्लिमों के खिलाफ है। याचिका में कहा गया है कि मुसलमानों के खिलाफ किसी तरह का एक्शन ना लिया जाए।

कानून बनने के बाद से ही सक्रिय

उल्लेखनीय है कि सीएए की धारा 6 बी की वैधता के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका देने वालों में आईयूएमएल भी शामिल है। वर्ष 2020 में कानून बनने के बाद ही संगठन ने सुप्रीम कोर्ट का रुख कर लिया था। हालांकि लम्बे समय से इस मामले में सुनवाई नहीं हुई है।

केरल के राजनीतिक दल आईयूएमएल ने दावा किया है कि इस कानून में मुस्लिमों को शामिल नहीं करके उनके साथ भेदभाव किया गया है। यह कानून धर्म के आधार पर बनाया गया है, जो कि संविधान के मूल सिद्धांत का उल्लंघन करता है। वहीं शरणार्थियों के मामले में भी भेदभाव किया जा रहा है। याचिका में कहा गया है कि सुप्रीम कोर्ट से फाइनल फैसला आए बिना ही केन्द्र सरकार ने इसे लागू कर दिया। वहीं इसमें अगर खामियां नहीं थीं तो केन्द्र सरकार को चार साल का इंतजार क्यों करना पड़ा?

आईयूएमएल ने कहा, अगर कोर्ट फैसला करता है कि सीएए असंवैधानिक है तो जिन लोगों को तब तक नागरिकता दी जाएगी, उनसे नागरिकता छीन भी ली जाए। इसलिए जब तक शीर्ष न्यायालय से इस कानून की वैधता पर फैसला नहीं हो जाता, इसे लागू नहीं किया जाना चाहिए। गौरतलब है कि लगभग एक साल से सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की सुनवाई नहीं की है।

कानून की यह है मुख्य बात

सीएए कानून में दिसम्बर 2014 से पहले पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से आए वहां के अल्पसंख्यकों को फास्ट ट्रेक तरीके से नागरिकता देने का प्रावधान है। साथ ही इससे किसी भी भारतीय की नागरिकता प्रभावित नहीं होगी। पहले से ही कहा जा रहा था कि आम चुनाव से पहले केन्द्र सरकार सीएए को लागू कर देगी। हालांकि अब कई राजनीतिक दलों का कहना है कि चुनाव को देखते हुए ध्रुवीकरण के उद्देश्य से सरकार ने इसे लागू किया है। उल्लेखनीय है कि केरल के मुख्यमंत्री पिनारायी विजयन और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कह दिया है कि वे अपने राज्यों में इसे लागू नहीं होने देंगे।

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