हरिकृष्ण बिरला ने गुंजल से कहा-अपनी औकात देख, टूटी साइकिल लेकर ओम बिरला को कविताएं सुनाने आता था, सिद्धांतों की बात करने वाला छुरा नहीं घोपता (वीडियो)
एनसीआई@कोटा
कोटा लोकसभा सीट से भाजपा प्रत्याशी ओम बिरला के बड़े भाई हरिकृष्ण बिरला का सोमवार को सामने आया एक वीडियो पूरे दिन जबरदस्त चर्चा में रहा। इस वीडियो में हरिकृष्ण बिरला पूर्व दिग्गज भाजपाई एवं वर्तमान में कांग्रेस उम्मीदवार प्रहलाद गुंजल पर जमकर निशाना साधते नजर आ रहे हैं।
इस वीडियो में हरिकृष्ण कह रहे हैं- ‘उसे जाकर पूछो, ओम बिरला जी के कपड़े जब पुराने हो जाते थे तो अल्टरेशन करवा कर कौन पहनता था? मेरी मोटरसाइकिल पर नेतागिरी कौन करता था? प्रहलाद गुंजल, ओम बिरला की बराबरी करने की कोशिश न करे। पहले अपनी औकात देख ले। टूटी साइकिल पर ओम बिरला को कविता सुनाने आया करता था। बिरला तो बड़े हृदय वाला है, जो इतनी गालियां सुनने के बाद भी उसे (गुंजल) पास बैठाकर टिकट (विधान सभा का) दिया। कहा- जा लड़ चुनाव। मैं चैलेंज करता हूं, पहले भाजपा कार्यकर्ताओं ने विपक्षियों को जमीन में गाड़ा था। इस बार लोकसभा चुनाव में पाताल में पहुंचा देंगे।
सिद्धांतों की बात करने वाला पीठ पर छुरा नहीं घोपता
यह वीडियो कुन्हाड़ी क्षेत्र में स्थित एसजीएन गार्डन का बताया गया है। यहां 27 मार्च काे रात 8.30 बजे से हुई पार्टी कार्यकर्ताओं की सभा को हरिकृष्ण बिरला ने सम्बोधित किया था। यहां प्रहलाद गुंजल पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा था- सिद्धांतों की बातें करने वाला पीठ पर छुरा नहीं मारता। जिसने खिलाया है, उस थाली में छेद नहीं करता। चुनाव, चुनाव के हिसाब से लड़ना चाहिए। मतदाताओं का आदर, सम्मान लेकर चुनाव जीतना चाहिए। यह पाकिस्तान-हिन्दुस्तान की लड़ाई हो रही है क्या?
हरिकृष्ण बिरला ने कहा- मतदाताओं का मान-सम्मान रखो। मतदाताओं से वोट मांगो। मतदाताओं का आदर करो। चाहे डाकू हो, करोड़पति हो, अरबपति हो, मतदाता किसी के बाप का गुलाम नहीं होता है। हिन्दुस्तान का मतदाता तो इतना समझदार होता है, उसे सब पता है, मेरे हित में कौन-सा पक्ष है, अहित में कौन-सा पक्ष है। उसको समझाने की जरूरत नहीं है।
गालियां दीं, फिर भी कहा ‘जा लड़ चुनाव’
हरिकृष्ण ने कहा- वह (गुंजल) सिद्धांत की बात कह रहे हैं। वह कह रहे हैं कि मुझे जलील किया गया। अरे भाई, क्या जलील किया? ओम बिरला वह आदमी है, जिसको सामने वाले ने 5 साल तक बहुत गालियां दीं। फिर भी उसने अपने घर पर बुलाकर, अपने पास बैठाकर कहा- जा लड़ चुनाव। ओम बिरला की इतनी बड़ी छाती थी। गाली देने से ओम बिरला के फर्क नहीं पड़ता। ओम बिरला जमीन पर पैदा हुआ है, जमीन पर रहता है, हवा में नहीं उड़ता।
घर के बाहर आकर कविताएं सुनाता था
ओम बिरला के बड़े भाई ने आगे कहा- ओम बिरला के लिए कहते हैं, हमारे कॉलेज का साथी है। तेरा… ओम बिरला कॉलेज का साथी कब से हो गया? मैं बताता हूं आपको, जब श्रीमान (गुंजल) के पास टूटी साइकिल थी, पीछे मडगार्ड नहीं था। एक छोटी-सी चरी लगी हुई रहती थी। कैथूनीपोल के मकान पर आता था। जो भी दुकान पर बैठा रहता था, उससे कहता था कि मैं ओम बिरला जी को कविता सुनाने आया हूं। ऊपर मेरी रिक्वेस्ट पहुंचा दो। कविता सुनाता था, और आज कह रहा है ओम बिरला ने बेईमानी कर ली, भ्रष्टाचार कर लिया। अरे भाई, पहले तेरी औकात देख, तू क्या था। अपनी ताकत देख, ओम बिरला से तुलना मत कर।
हरिकृष्ण बिरला ने पार्टी कार्यकर्ताओं से कहा- ओम बिरला तो बड़े हृदय वाला है, सबको माफ कर देता है। कभी भी किसी को नाराज नहीं करता। उससे कोई कुछ भी बोल दे, वह उसे कभी कुछ नहीं बोलेगा। विधानसभा चुनाव के दौरान ओम बिरला ने अपने पास बैठाकर इसे टिकट दिया था। गलती किसी की भी हो, आप ओम बिरला पर आरोप लगा दो, तुम्हारे करम होंगे ऐसे। जनता ने मान-सम्मान नहीं रखा।
इस बार विपक्षियों को पाताल में पहुंचा देंगे
हरिकृष्ण बिरला कहा- मैं चैलेंज देता हूं, विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ताओं ने राजस्थान में विपक्षियों को जमीन में गाड़ा था। लोकसभा चुनाव में पाताल में पहुंचा देंगे। कांग्रेसियों को पाताल में पहुंचा देंगे। इसके बाद कभी भी कोई विपक्षी भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ताओं के सामने चुनाव लड़ने नहीं आ सकता, कभी भी नहीं आएगा।
गुंजल ने कहा था- गुलामी की बजाय बाहर का रास्ता चुना
उल्लेखनीय है कि प्रहलाद गुंजल ने 20 मार्च को कांग्रेस जॉइन की थी। तब से वे लगातार ओम बिरला पर जुबानी हमले कर रहे हैं। उन्होंने संसदीय क्षेत्र के इटावा में एक सभा में कहा था- ‘मैंने गिरोह की गुलामी के बजाय भाजपा से बाहर का रास्ता चुना। भारतीय जनता पार्टी में अब गिरोह का कब्जा है। जो गिरोह के बादशाह को सलाम करेगा, वह भारतीय जनता पार्टी की राजनीति में सलामत रह पाएगा। ये सब जानते हैं। देश में चल रहे वातावरण के आधार पर लोगों को गुमराह कर वोट लेकर जीत जाऊं, लेकिन आत्मा से मैं उस जीत को स्वीकार नहीं करता हूं। इसलिए उस गिरोह की गुलामी को स्वीकार करने की बजाय मैंने भारतीय जनता पार्टी से बाहर का रास्ता चुना’।
गुंजल ने कहा था- ‘बीजेपी में एक ताकतवर व्यक्ति जो आजकल लोकसभा का तीसरी बार का उम्मीदवार है। उसने इस प्रकार से अपना कब्जा बना लिया कि उसके और उसके भाइयों की मर्जी के बगैर कोई राजनीति नहीं कर पाएगा। मैं उनकी ताकत से कतई विचलित नहीं हूं’।
