April 19, 2026

News Chakra India

Never Compromise

मुकदमों की पैरवी में सरकार की उदासीनता पर हाईकोर्ट नाराज, 25 हजार रुपए जुर्माना लगाया और पूछा-कब तक बने रहेंगे यह हालात?

मुकदमों की पैरवी में सरकार की उदासीनता पर हाईकोर्ट नाराज, 25 हजार रुपए जुर्माना लगाया और पूछा-कब तक बने रहेंगे यह हालात?

एनसीआई@जयपुर

हाईकोर्ट में दायर मुकदमों में सरकारी वकीलों के पेश नहीं होने और समय पर जवाब फाइल नहीं करने के मामले में हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। जस्टिस गणेश राम मीणा की कोर्ट ने मुख्य सचिव और प्रमुख शासन सचिव (विधि) को व्यक्तिगत रूप से शपथ पत्र पेश करके यह बताने को कहा है कि अदालतों में कब तक ऐसी स्थिति बनी रहेगी।

दरअसल, हाईकोर्ट में मुकेश कुमार मीणा की याचिका पर सुनवाई चल रही थी। इस दौरान चौंकाने वाली बात सामने आई। वह यह कि चिकित्सा विभाग ने पिछले 5 साल में अपना जवाब ही पेश नहीं किया है। इस पर कोर्ट ने कड़ी नाराजगी जताई।

कोर्ट ने कहा कि कई बार अदालत समय पर जवाब पेश नहीं करने पर राज्य सरकार पर जुर्माना भी लगा चुकी है। इसके बावजूद सरकार ने लिटिगेशन सिस्टम को सुधारने के लिए कोई कदम नहीं उठाया है।

राज्यपाल तक को लिखा, नहीं बदले हालात

कोर्ट ने इस पर अपने आदेश में कहा कि हमने सरकार के इस तरह के रवैये पर पहले भी एक केस के सिलसिले में राज्यपाल को लिखा था। हो सकता है राजभवन ने सरकार से स्पष्टिकरण मांगते हुए उन्हें लिटिगेशन सिस्टम को सुधारने के लिए दिशा-निर्देश भी दिए हो, लेकिन ऐसा लगता है कि सरकारी मशीनरी को लिटिगेशन सिस्टम और कोर्ट के आदेशों की परवाह ही नहीं है।

आज भी कोर्ट के सामने कई ऐसे केसेज हैं, जिनमें नोटिस जारी हो चुके हैं, लेकिन सरकार को रिप्रजेंट करने के लिए कोई नहीं है। ऐसे हालात को देखते हुए हम मुख्य सचिव और प्रमुख शासन सचिव विधि को निर्देश देते हैं कि वह व्यक्तिगत रूप से अपना-अपना शपथ पत्र पेश करके बताएं कि इस तरह के हालात कब तक बने रहेंगे। वहीं सरकार यह भी बताए कि उसने कोर्ट के सामने सरकारी वकीलों के समय पर उपस्थित रहने और याचिकाओं में समय पर जवाब देने के लिए क्या कदम उठाए हैं।

जुर्माने के साथ जवाब के लिए अंतिम अवसर

याचिकाकर्ता के वकील तनवीर अहमद ने बताया कि शिकायतकर्ता ने साल 2018 में हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। इसमें कहा गया था कि मेरिट में होने के बावजूद उसे सहायक रेडियोग्राफर के पद पर नियुक्ति नहीं दी जा रही है। कोर्ट के नोटिस जारी करने के बाद 4 अक्टूबर 2018 को तत्कालीन अतिरिक्त महाधिवक्ता (एएजी) ने कोर्ट से जवाब देने के लिए समय मांगा था, लेकिन जब 18 सितम्बर 2019 तक मामले में जवाब पेश नहीं हुआ तो याचिकाकर्ता ने अदालत में प्रार्थना पत्र लगाकर सरकार के जवाब देने के अवसर को बंद करने के लिए कहा, लेकिन कोर्ट ने याचिकाकर्ता के प्रार्थना पत्र को खारिज करते हुए सरकार को दो सप्ताह का समय देते हुए अगली तारीख को केस इंचार्ज को पेश होने के निर्देश दिए।

उसके बाद भी 7 दिसम्बर 2023 तक मामले में ना तो कोई जवाब पेश किया गया, ना ही सरकार की ओर से कोई पेश हुआ। अगली तारीख पर कोर्ट जब इस मामले में विस्तृत आदेश लिखा रही थी, उस समय एएजी जीएस गिल कोर्ट के समक्ष उपस्थित हुए। उन्होंने फिर से जवाब के लिए समय देने का आग्रह किया, लेकिन इस बार अदालत एक दिन का भी समय देने की इच्छुक नहीं थी, लेकिन न्याय हित कोर्ट ने 25 हजार के जुर्माने के साथ सरकार को 2 मई तक मामले में जवाब देने का अंतिम अवसर दिया है। कोर्ट ने जुर्माने की यह राशि अगली तारीख से पहले याचिकाकर्ता को देने के निर्देश भी दिए हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Copyright © All rights reserved. | Newsphere by AF themes.