अन्नू कपूर की फिल्म ‘हमारे बारह’ की रिलीज पर सुप्रीम कोर्ट ने लगाई रोक, कहा- ट्रेलर इतना आपत्तिजनक है तो मूवी कैसी होगी?
सुप्रीम कोर्ट ने अन्नू कपूर की फिल्म ‘हमारे बारह’ की स्क्रीनिंग पर एक दिन पहले रोक लगा दी है। पीठ ने इस फिल्म की रिलीज पर रोक लगाते हुए कहा- हमने सुबह फिल्म का ट्रेलर देखा, ट्रेलर में सभी आपत्तिजनक डायलॉग अभी भी मौजूद हैं।
एनसीआई@नई दिल्ली
सुप्रीम कोर्ट ने अन्नू कपूर की फिल्म ‘हमारे बारह’ की रिलीज पर एक दिन पहले गुरुवार, 13 जून को रोक लगा दी। ये फिल्म 14 जून को रिलीज होनी थी। कोर्ट ने फिल्म पर इस्लामी आस्था और विवाहित मुस्लिम महिलाओं का अपमान करने के आरोपों पर यह फैसला दिया है।
जस्टिस विक्रम नाथ और संदीप मेहता की अवकाशकालीन पीठ (वेकेशन बेंच) ने याचिकाकर्ता अजहर बाशा तम्बोली की ओर से पेश हुईं वकील फौजिया शकील की दलीलों पर विचार करते हुए बम्बई उच्च न्यायालय से याचिका पर जल्द से जल्द फैसला लेने को कहा है।
‘ट्रेलर में सभी आपत्तिजनक डायलॉग अब भी मौजूद’
पीठ ने फिल्म को रिलीज करने पर रोक लगाते हुए कहा, ‘हमने सुबह फिल्म का ट्रेलर देखा। ट्रेलर में सभी आपत्तिजनक डायलॉग अभी भी मौजूद हैं।’ पीठ ने बम्बई उच्च न्यायालय द्वारा याचिका का निपटारा किए जाने तक फिल्म रिलीज पर रोक लगा दी है। शकील ने कहा कि हाईकोर्ट ने एक ‘अकारण आदेश’ के तहत फिल्म की रिलीज पर लगी रोक हटा दी थी ।
मामले में दोनों पक्षों के लिए समिति का चयन करने का विकल्प
फौजिया शकील ने कहा, ‘हाईकोर्ट, सेंसर बोर्ड को समिति गठित करने का निर्देश इसलिए नहीं दे सकता क्योंकि सीबीएफसी खुद भी मामले में एक पार्टी है।’ सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मामले में दोनों पक्षों के लिए समिति का चयन करने के लिए सीबीएफसी को निर्देश देने पर आपत्ति सहित सभी आपत्तियों को हाईकोर्ट के सामने रखने का विकल्प खुला रखा गया है।
14 जून को रिलीज होनेवाली थी फिल्म
उल्लेखनीय है कि विवादित फिल्म ‘हमारे बारह’ 14 जून, शुक्रवार को रिलीज होनी थी। हालांकि कर्नाटक में इसकी रिलीज को पहले ही बैन किया जा चुका है। याचिकाकर्ता का आरोप है कि फिल्म का टीजर इस्लामिक मान्यताओं और शादीशुदा मुस्लिम महिलाओं का अपमान करता है। अगर फिल्म को रिलीज किया गया तो यह संविधान के आर्टिकल 19(2) और आर्टिकल 25 का उल्लंघन होगा।
याचिका में यह कहा गया
गौरतलब है कि बम्बई उच्च न्यायालय में दाखिल अर्जी में कहा गया था कि यह फिल्म विवाहित मुस्लिम महिलाओं का गलत चित्रण करती है। फिल्म कहती है कि एक इंसान के तौर पर मुस्लिम महिलाओं के अधिकार नहीं हैं और ऐसा कुरान में कहा गया है। इस फिल्म में कुरान की आयत की गलत व्याख्या की गई है। इस पर उच्च न्यायालय ने पहले फिल्ममेकर्स से कहा था कि वह 14 जून तक फिल्म रिलीज न करें। इसके बाद एक और आदेश दिया गया, जिसमें फिल्म प्रमाणन बोर्ड से कहा गया कि वह तीन सदस्यों की एक समिति बनाए। इसमें कम से कम एक मुस्लिम सदस्य जरूर होना चाहिए।
