एईएन-जेईएन को पीटने के आरोपी पूर्व विधायक की जमानत रद्द, करना होगा सरेंडर, कोर्ट ने कहा-बेल मिलते ही जुलूस निकाला, गवाहों को धमकाया
एनसीआई@जयपुर
धौलपुर के बाड़ी डिस्कॉम ऑफिस में एईएन और जीईएन को पीटने के आरोपी पूर्व विधायक गिर्राज सिंह मलिंगा की जमानत याचिका हाईकोर्ट ने रद्द कर दी है। एईएन हर्षदापति की याचिका पर शुक्रवार को जस्टिस फरजंद अली की अदालत ने मलिंगा की जमानत को निरस्त करते हुए 30 दिन में सरेंडर करने के लिए कहा है।
कोर्ट के फैसले के बाद पीड़ित पक्ष के वकील एके जैन ने कहा कि न्यायालय ने माना है कि मलिंगा ने झूठ बोलकर जमानत ली थी। जमानत मिलने के बाद जूलुस निकालकर न्यायालय के आदेश का मजाक बनाया था।
कोरोना के चलते मिली थी जमानत
यहां उल्लेखनीय है कि हाईकोर्ट ने करीब दो साल पहले गिर्राज सिंह मलिंगा को कोरोना के चलते जमानत दी थी। शुक्रवार को एईएन हर्षदापति की याचिका पर सुनवाई करते हुए अदालत ने माना कि मलिंगा ने जमानत का मिस यूज किया है। इसके चलते कोर्ट ने उसकी जमानत को निरस्त कर दिया।
हर्षदापति की ओर से पैरवी करते हुए वकील एके जैन ने कहा- मलिंगा ने कोर्ट से कोरोना का बहाना बनाकर जमानत का लाभ लिया था। जमानत मिलते ही उसने जुलूस निकाला था। मामले में पीड़ित और गवाहों को धमकाया था। ऐसे में आरोपी की जमानत याचिका को निरस्त किया जाए।
यह है पूरा मामला
धौलपुर के बाड़ी डिस्कॉम ऑफिस में 28 मार्च 2022 को एईएन हर्षदापति और जेईएन नितिन गुलाटी से मारपीट हुई थी। प्रकरण में एईएन हर्षदापति ने मलिंगा और अन्य के खिलाफ 29 मार्च को नामजद मारपीट, राज कार्य में बाधा और एससी-एसटी एक्ट के तहत केस दर्ज कराया था। इस मामले में 5 लोगों को गिरफ्तार किया गया था।
इस घटना के बाद तत्कालीन धौलपुर एसपी शिवराज मीणा का भी तबादला कर दिया गया था। वहीं, विद्युत निगम के इंजीनियर्स से मारपीट होने के बाद निगम के कर्मचारियों में आक्रोश भड़क गया था। मलिंगा की गिरफ्तारी को लेकर विद्युत निगम के कर्मचारियों ने प्रदेश स्तर तक धरने प्रदर्शन किए थे। इसके बाद तत्कालीन विधायक राजेंद्र गुढ़ा को साथ लेकर मलिंगा ने सीएम हाउस पहुंचकर तत्कालीन मुख्यमंत्री अशोक गहलोत से मुलाकात की और इसके बाद सरेंडर कर दिया था।
हाईकोर्ट ने ही दी थी जमानत
मलिंगा ने 11 मई को जयपुर के तत्कालीन पुलिस कमिश्नर आनंद श्रीवास्तव के सामने सरेंडर किया था। 12 मई की दोपहर को उन्हें एससी-एसटी कोर्ट में पेश किया गया। जहां से कोर्ट ने मलिंगा को 15 दिन की न्यायिक अभिरक्षा में भेज दिया था। इसके बाद मलिंगा ने हाईकोर्ट में जमानत याचिका दायर की। हाईकोर्ट ने 17 मई को उसे जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया था।
किसी भी पार्टी की हो सरकार, मलिंगा की मौज
वकील एके जैन ने कहा कि घटना के वक्त की सरकार और वर्तमान सरकार ने भी मलिंगा की मदद की है। दो साल बाद अनुसूचित जाति के एक सहायक अभियंता को न्याय मिला है। वो दो साल से अस्पताल में मौत से जंग लड़ रहे हैं। कोर्ट ने अपने फैसले से ऐसे नेताओं को संदेश भी दिया है कि कानून से ऊपर कोई नहीं है।
गिर्राज सिंह मलिंगा धौलपुर जिले की बाड़ी सीट से कांग्रेस के विधायक रहे हैं। बीते विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस उम्मीदवारों की आखिरी लिस्ट आने से कुछ घंटे पहले ही ये पाला बदल कर बीजेपी में शामिल हो गए थे।
