देश के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अचानक बिगड़ी तबीयत, एम्स दिल्ली में भर्ती
एनसीआई@नई दिल्ली
देश के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह को आज तड़के अचानक तबीयत बिगड़ जाने के बाद दिल्ली के एम्स में भर्ती कराया गया। उन्हें तेज पीठ दर्द की शिकायत हुई थी। रक्षा मंत्री एम्स के न्यूरो सर्जरी विभाग में एडमिट किए गए। न्यूरो सर्जन डॉ. अमोल रहेजा की देखरेख में उनका ध्यान रखा जा रहा है। अभी तक अस्पताल ने उनकी सेहत को लेकर कोई बयान जारी नहीं किया है। इस बारे में राजनाथ सिंह या उनके परिवार की तरफ से भी कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है।
जानकारी के अनुसार तड़के साढ़े तीन बजे करीब राजनाथ सिंह की पीठ में अचानक दर्द की शिकायत हुई। इसके बाद उन्हें सीधे एम्स में भर्ती कराया गया। उनकी यह कितनी गम्भीर समस्या है, कितना दर्द है, अभी तक कुछ भी स्पष्ट नहीं है। न्यूरो सर्जन डॉ. अमोल रहेजा उनका इलाज कर रहे हैं। वैसे इससे पहले भी राजनाथ सिंह को दर्द की शिकायत रही है। मेडिकल चेकअप के लिए भी वे अस्पताल गए हैं।
राजनाथ सिंह की बात करें तो वे वर्तमान सरकार में भी रक्षा मंत्री की भूमिका निभा रहे हैं। 2019 के लोकसभा चुनाव के बाद भी उन्हें यही मंत्रालय सौंपा गया था। मोदी सरकार के पहले कार्यकाल के दौरान उन्होंने बतौर गृह मंत्री भी अपनी सेवा दी थी। उन्हें राजनीतिक गलियारों में एक सशक्त नेता के रूप में जाना जाता है, जो बड़े फैसले लेने से नहीं हिचकिचाते हैं।
राजनाथ सिंह का जीवन
राजनाथ सिंह का शुरुआती जीवन भी काफी दिलचस्प रहा है। उनका जन्म 10 जुलाई 1951 को भभौरा गांव में एक राजपूत परिवार में हुआ था। यह गांव उस समय उत्तर प्रदेश के वाराणसी जिले में था और बाद में चंदौली जिले का हिस्सा बना। उनके पिता राम बदन स्वतंत्रता सेनानी थे। पिता राम बदन सिंह और मां गुजराती देवी की सात संतानों (तीन बेटों और चार बेटियों) में सबसे छोटे राजनाथ अक्सर अपने पिता को उन लोगों की बातें धैर्यपूर्वक सुनते हुए देखते थे, जिन्हें वह पहचान नहीं पाते थे और थोड़ी देर बाद कागज के एक टुकड़े पर कुछ लिखते थे।
राजनाथ सिंह की प्रारम्भिक शिक्षा घर पर हुई थी। इसके बाद उनका दाखिला एक स्थानीय प्राथमिक विद्यालय में कराया गया, जहां वह हमेशा अपनी क्लास में फर्स्ट आते रहे। अपने तेरहवें जन्मदिन पर राजनाथ को डबल प्रमोशन मिला और वे अपने सहपाठियों से आगे निकल गए।
राजनीति में ऐसे आए
इसी दौरान स्कूल और आसपास के स्थानों पर जाने वाले स्थानीय आरएसएस प्रचारकों में से एक ने सीखने के प्रति राजनाथ की रुचि को देखा और उन्हें संघ द्वारा आयोजित कार्यक्रमों में अपने साथ आने के लिए आमंत्रित किया। तहसील प्रचारक ने राजनाथ को स्थानीय शाखा से परिचित कराया। राजनाथ सिंह ने मास्टर्स करने के लिए गोरखपुर विश्वविद्यालय में दाखिला लिया, जिसके बाद ही वह कॉलेज स्तर पर राजनीति में हिस्सा लेने लगे। वह आरएसएस के छात्र संघ अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) के सदस्य बन गए और जल्द ही अपने संगठनात्मक कौशल और अनुशासन, समर्पण की बदौलत नाम कमाया।
