April 22, 2026

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राजस्थान भाजपा प्रदेशाध्यक्ष जोशी ने अपने इस्तीफे की फिर की पेशकश

राजस्थान भाजपा प्रदेशाध्यक्ष जोशी ने अपने इस्तीफे की फिर की पेशकश

एनसीआई@जयपुर

भाजपा प्रदेशाध्यक्ष सीपी जोशी ने अपने पद से इस्तीफे की पेशकश कर दी है। चार दिन से जोशी दिल्ली में हैं। वे इस‌ दौरान केन्द्रीय गृहमंत्री अमित शाह और पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्‌डा से भी मिले।

जोशी दिसम्बर 2023 में विधानसभा चुनाव परिणामों में राज्य में भाजपा की सरकार बनने के बाद से ही पद छोड़ना चाह रहे हैं। मगर उन्हें पार्टी आलाकमान ने फिलहाल पद पर बने रहने को कहा था।

लोकसभा चुनाव से पहले भी जोशी ने आलाकमान से कहा था‌ कि चूंकि वे स्वयं चित्तौड़गढ़ से चुनाव लड़ रहे हैं, इसलिए वे राज्यभर में चुनाव प्रचार नहीं कर सकेंगे। अब लोकसभा चुनाव‌ के परिणाम आए भी करीब डेढ़ महीने हो गए हैं। ऐसे में उन्होंने एक बार फिर पद छोड़ने की पेशकश कर दी है। इस बार जल्द ही उनका इस्तीफा मंजूर हो जाने की बात सामने आई है।‌ सूत्र ने पांच विधानसभा सीटों पर होने वाले उपचुनाव नए प्रदेशाध्यक्ष के नेतृत्व में ही होने की बात कही है।‌

संसद भवन में हुई अमित शाह से मुलाकात

जोशी ने सोमवार को संसद भवन में गृहमंत्री अमित शाह से मुलाकात की थी। इस दौरान जोशी ने उन्हें पीएम नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में तीसरी बार सरकार बनने पर बधाई दी थी। साथ ही दोनों नेताओं के बीच राजस्थान की पांच विधानसभा सीटों पर होने वाले उप चुनाव के बारे में भी चर्चा हुई थी। जोशी पिछले दिनों उप चुनाव वाले जिलों की कार्य समितियों की बैठक में भी शामिल हुए थे। इन बैठकों से मिले फीडबैक के बारे में भी जोशी ने शाह को अवगत करवाया।

पार्टी के लिए सही नहीं है यह स्थिति

उल्लेखनीय है कि इस समय राजस्थान में सीएम और प्रदेशाध्यक्ष दोनों महत्वपूर्ण पदों पर ब्राह्मण नेता काबिज हैं। भाजपा इससे पहले तक दोनों पदों की जिम्मेदारी अलग-अलग जाति के नेताओं को देती आई है। चुनावी जातिगत समीकरण के हिसाब से यह स्थिति पार्टी के लिए सही नहीं मानी जाती है।

इसके अलावा मध्यप्रदेश और हरियाणा में भी भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष ब्राह्मण हैं। छत्तीसगढ़ और उत्तरप्रदेश के उप मुख्यमंत्री इस जाति से हैं। यह स्थिति भी पार्टी में राजस्थान के प्रदेश अध्यक्ष को बदलने के लिए बाध्यकारी है।

लोकसभा परिणामों से असंतुष्ट थे

राजस्थान में भाजपा ने पिछले दो लोकसभा चुनावों 2014 और 2019 में सभी 25 सीटें जीती थीं। मगर इस बार पार्टी 11 सीटें हार गई। इस परिणाम से भी जोशी को झटका लगा था। हालांकि उन्होंने पार्टी नेतृत्व को अपनी तरफ से इसके कारण बता दिए थे। इसमें कुछ जातियों की नाराजगी की बात शामिल थी।

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