आईएएस-आरएएस अधिकारी तक जुटे हुए हैं ‘भारत बंद’ सफल कराने में, मोदी तो गर्दन काट कर भी दे दें, तब भी………
–राजीव सक्सेना
रक्षाबंधन का दिन है। बड़े नेताजी के आवास पर हमेशा की तरह सुबह से ही छोटे-बड़े कार्यकर्ताओं-नेताओं की रेलम पेल लगी हुई थी। त्योहार के कारण आज कुछ ज्यादा थी। चर्चा चल पड़ी एससी-एसटी आरक्षण में क्रीमीलेयर के सम्बन्ध में सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए फैसले के खिलाफ 21 अगस्त को प्रस्तावित भारत बंद पर।
यह बड़ा विरोधाभास आया सामने
इसी बीच एससी वर्ग के एक प्रभावशाली व्यक्ति व नेता भी वहां आ पहुंचे। ये बीमा क्षेत्र से जुड़े रहे थे। इन्होंने इस चर्चा में भागीदारी निभाते हुए जो कहा उसका सारांश यह है कि, भारत बंद की तैयारी तो की जा रही है, मगर हमारे लोगों (एससी वर्ग) में इसके प्रति खास उत्साह नहीं है, क्योंकि क्रीमीलेयर में आने जैसी कोई स्थिति ही नहीं है। एसटी वर्ग की एक प्रमुख जाति के अधिकारियों-कर्मचारियों को इंगित करते हुए कहा कि, इसकी इनमें ही विशेष चिंता है।
आईएएस-आरएएस अधिकारी खास सक्रिय
यहां इन नेता जी ने एक बड़ी चौंकाने वाली बात कह डाली। इन्होंने कहा कि-जयपुर से कुछ आईएएस और आरएएस अधिकारियों तक के इनके पास फोन आए हैं। उन्होंने किसी भी हालत में भारत बंद को सफल बनाने को कहा है।
मोदी गर्दन उतार कर भी दे दें, तब भी….
जब बात आगे चली और इस स्थिति का मूल्यांकन किया जाने लगा कि मोदी सरकार क्या वास्तव में आरक्षण को कम करने या खत्म करने का प्रयास कर रही है? इस पर एससी वर्ग के इन बड़े नेता का साफ कहना था कि, चाहे मोदी ऐसा नहीं कर रहे हैं, मगर उनके खिलाफ माहौल ऐसा बन गया है कि वह अपनी बात का विश्वास दिलाने के लिए खुद की गर्दन उतार कर (गर्दन काट कर) रख दें, तब भी लोग उन पर विश्वास नहीं करेंगे।
बड़ी बात यह है कि एससी वर्ग के इन नेता की किसी भी बात का राजनीतिक रूप से कट्टर विरोधी बड़े नेता जी तक के द्वारा विरोध करना तो दूर, उलटे उन्होंने सहमति जताई।
इन उदाहरणों से जो 2 बड़ी बातें साफ हुईं, वह ये कि-
1. सुप्रीम कोर्ट के आदेश के खिलाफ आरक्षित वर्ग में एकजुटता नहीं है। यह बात भारत बंद का विरोध करने वाले आरक्षित वर्ग के एक बड़े गुट के निर्णय से वैसे भी स्पष्ट है। इस गुट का मानना है कि जो व्यक्ति या परिवार आरक्षण का लाभ ले चुके हैं, उन्हें क्रीमीलेयर के दायरे में रखा जाए, जिससे आरक्षित वर्ग में होने के बावजूद अभी तक इसके लाभ से वंचित बाकी जातियां भी लाभान्वित हो सकेंगी। वरना अभी हालत यह है कि आरक्षित वर्ग की इन जातियों के लिए पहले से ही आरक्षण का लाभ लेकर उच्च वर्ग में आ चुके आरक्षित परिवारों से प्रतियोगिता करना सम्भव नहीं है।
2. दूसरी बात यह कि वास्तव में मोदी या बीजेपी सरकार आरक्षण में कोई छेड़छाड़ नहीं कर रही है। मगर विपक्षी पार्टियों ने सिर्फ रणनीतिक रूप से तगड़ी अफवाह फैलाकर ऐसा माहौल बना दिया है कि जैसे ये वास्तव में आरक्षण खत्म करने जा रहे हैं, हालांकि इनकी ओर से आज तक ऐसा कोई प्रमाण प्रस्तुत नहीं किया जा सका है। यहां तक कि प्रधानमंत्री मोदी ने आरक्षित वर्ग में वर्गीकरण की सुप्रीम कोर्ट की सलाह को मानने से ही इनकार कर दिया है।
यह है वस्तु स्थिति
यह सच्चाई है कि आरक्षण में भी ‘दबंग’ सामाजिक और आर्थिक रूप से मजबूत जातियों का ही वर्चस्व है। इसी के चलते आरक्षित वर्ग में ही होने के बावजूद आरक्षण के लाभ से वंचित जातियां या वर्ग दशकों से आंतरिक वर्गीकरण कर, सक्षम हो चुके परिवारों को क्रीमीलेयर घोषित करने की मांग कर रहे हैं। इससे उन्हें लाभ मिलना सम्भव हो सकेगा।
यह है सुप्रीम कोर्ट का फैसला
सुप्रीम कोर्ट ने एससी-एसटी आरक्षण में क्रीमीलेयर को लेकर फैसला सुनाते हुए कहा था, ”सभी एससी और एसटी जातियां और जनजातियां एक समान वर्ग नहीं हैं। कुछ जातियां अधिक पिछड़ी हो सकती हैं। उदाहरण के लिए – सीवर की सफाई और बुनकर का काम करने वाले। ये दोनों जातियां एससी में आती हैं, लेकिन इस जाति के लोग बाकियों से अधिक पिछड़े रहते हैं। इन लोगों के उत्थान के लिए राज्य सरकारें एससी-एसटी आरक्षण का वर्गीकरण (सब-क्लासिफिकेशन) कर अलग से कोटा निर्धारित कर सकती हैं। ऐसा करना संविधान के आर्टिकल-341 के खिलाफ नहीं है।”
सुप्रीम कोर्ट ने कोटे में कोटा निर्धारित करने के फैसले के साथ ही राज्यों को जरूरी हिदायत भी दी। कहा कि राज्य सरकारें मनमर्जी से यह फैसला नहीं कर सकतीं। इसमें भी दो शर्तें लागू होंगी।
नोट-जिन बड़े नेता जी के आवास पर यह चर्चा हुई, वह खुद सबसे उच्च मानी जाने वाली सवर्ण जाति के सदस्य हैं।
