बाड़मेर ड्यूटी पर लौटे कोटा निवासी 33 वर्षीय शिक्षक की अचानक तबीयत बिगड़ी, अस्पताल में हो गई मौत, प्रारंभिक तौर पर हार्ट अटेक की सम्भावना
एनसीआई@बाड़मेर
जिले के रामसर थाना इलाके के गागरिया गांव में रहने वाले कोटा निवासी 33 वर्षीय शिक्षक की मंगलवार रात अचानक तबीयत बिगड़ी। इसके बाद देर रात जिला अस्पताल में इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। इससे पहले उनकी तबीयत बिलकुल सामान्य थी। सूचना पाकर शिक्षक के परिजन कोटा से बाड़मेर पहुंचे। उन्हें शव सौंप दिया गया। साथ ही जांच के लिए मृतक के हॉर्ट का सेम्पल लिया गया है।
रामसर पुलिस के अनुसार- कोटा निवासी भानु प्रकाश मेहरा (33) बाड़मेर जिले के गागरिया चाड़वा-तख्तावाद के सरकारी सीनियर स्कूल में शिक्षक थे। वह मंगलवार को सुबह ही कोटा से बाड़मेर ड्यूटी पर पहुंचे थे। शाम को गागरिया में अपने साथी शिक्षकों के साथ किराए के मकान में चले गए थे।
रात को खाना खाने के बाद बिगड़ी तबीयत
रात को खाना खाने के बाद अचानक उनकी तबीयत बिगड़ गई। इसके बाद उनके साथी उन्हें गागरिया हॉस्पिटल लेकर गए। वहां प्राथमिक उपचार के बाद उन्हें बाड़मेर जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया। यहां इलाज के दौरान रात करीब दो बजे डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। जानकारी मिलने पर रामसर पुलिस अस्पताल पहुंची। शव को मॉर्च्युरी में रखवाकर शिक्षक के परिजनों को सूचना दी। इस पर बुधवार को परिजन कोटा से बाड़मेर पहुंचे। पोस्टमार्टम के बाद उन्हें शव सौंप दिया गया।

शिक्षक भानु प्रकाश छुट्टी पर अपने घर कोटा गए हुए थे। वहां से वह मंगलवार सुबह ही लौटे थे। उनके दो बच्चे हैं।
जिला अस्पताल के डॉ. महावीर ने बताया- मृतक का पोस्टमॉर्टम कर दिया गया है। उनके हार्ट के सेम्पल लिए हैं। इसकी जांच से ही मौत के कारण का पता चल सकेगा।
7 दिन पहले भी करवाई थी जांच
भानु प्रकाश मेहरा के साथी शिक्षक नरेन्द्र सिंह सोलंकी ने बताया कि वह तृतीय श्रेणी के शिक्षक थे। इसके पहले 26 अगस्त को भी उनकी तबीयत खराब हुई थी। तब उन्होंने गागरिया हॉस्पिटल में ही इलाज करवाया था। वहां जांंच में सब कुछ नॉर्मल आया था। इसके बाद वह 27 अगस्त को बस से कोटा चल गए थे। वहां पर इको व ईसीजी जांच करवाई थी। उन जांचों की सभी रिपोर्ट भी नॉर्मल आई थी। प्रारम्भिक तौर पर भानु प्रकाश को हॉर्ट अटेक की ही संभावना है। हालांकि जांच के बाद ही सब कुछ क्लियर हो सकेगा।
राजस्थान में 50 हजार से ज्यादा मौतें हो रहीं
आईसीएमआर (ICMR) की ताजा रिपोर्ट बताती है कि भारत में 4 करोड़़ दिल की बीमारी के मरीज हैं। हर साल 7 लाख लोगों की हार्ट अटेक से मौत हो जाती है। राजस्थान में यह आंकड़ा सालाना 50 हजार है।
डॉक्टर इसका सबसे बड़ा कारण डायबिटीज को मानते हैं। इंग्लैंड की जनसंख्या के बराबर देश में 8 करोड़ डायबिटीज के मरीज हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर हार्ट अटेक से बचना है तो डायबिटीज को कंट्रोल रखना होगा।
कम उम्र में इसलिए हो रहे हार्ट अटेक
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के मुताबिक, हर साल करीब 6 करोड़ लोगों की मौत होती है। इनमें से लगभग 32% मौतों की वजह कार्डियोवस्कुलर डिजीज है। यह बीमारी दुनिया में सबसे अधिक मौतों की वजह बनती है। हर साल लगभग पौने दो करोड़ लोग किसी न-किसी हार्ट डिजीज के कारण जान गंवा रहे हैं।
पहले हार्ट डिजीज के ज्यादातर पेशेंट 60 साल से अधिक उम्र के होते थे। मगर बीते कुछ सालों में 30 साल से कम उम्र के लोग भी इसका शिकार बन रहे हैं। कोविड के बाद से हार्ट अटेक के मामले बढ़ते ही जा रहे हैं।
कम उम्र में हार्ट अटेक के यह हैं रिस्क फेक्टर्स
लम्बे अरसे तक माना जाता रहा है कि उम्र के साथ हमारा दिल भी बूढ़ा होता जाता है। इसलिए उम्र बढ़ने के साथ हार्ट डिजीज के मामले भी बढ़ जाते हैं, लेकिन बीते सालों में युवाओं को हो रहे हार्ट अटेक और स्ट्रोक्स ने सबको चौंकाया है।
अनहेल्दी लाइफ स्टाइल बीमारियों की जड़
देर रात तक जागना, सुबह देर से उठना, एक्सरसाइज न करना, खाने में फास्ट फूड और तली-भुनी चीजें खाना आदि बीमारियों के प्रमुख कारण हैं। इसके कारण डायबिटीज, ब्लड प्रेशर, ओबिसिटी जैसी लाइफ स्टाइल डिजीज होती हैं, जो आगे चलकर हार्ट अटेक का कारण बनती हैं।
हाई ब्लड प्रेशर हार्ट अटैक के सबसे बड़े रिस्क फेक्टर्स में से एक है। असल में ब्लड प्रेशर हाई होने का मतलब है कि ब्लड फ्लो में कोई समस्या है तो हार्ट को इसका फ्लो बरकरार रखने के लिए पम्पिंग तेज करनी पड़ रही है। इससे ब्लड वेसल्स डैमेज होती है, दिल थक रहा होता है। जो कभी भी हार्ट अटेक या अरेस्ट की वजह बन सकता है।
