रेजिडेंशियल कॉलोनी और सोसाइटी के सम्बन्ध में राजस्थान हाईकोर्ट ने दिया बहुत बड़ा फैसला, ग्राहकों को मिलेगी बड़ी राहत
पानी-बिजली और सड़क होने पर ही बिल्डर बेच सकेंगे प्रॉपर्टी, यूडीएच-निगम को देना होगा सर्टिफिकेट कि कॉलोनी रहने योग्य है या नहीं….
एनसीआई@जोधपुर
राज्य में रेजिडेंशियल कॉलोनी और सोसाइटी के सम्बन्ध में राजस्थान हाईकोर्ट ने मंगलवार को बड़ा फैसला सुनाया। अब कोई भी डेवलपर या बिल्डर पानी, बिजली और सड़क सहित अन्य मूलभूत सुविधाओं के बिना प्रॉपर्टी (मकान-फ्लेट) नहीं बेच पाएगा। इसके लिए यूडीएच और निगम को पहले सर्टिफिकेट जारी करना होगा कि रेजिडेंशियल कॉलोनी या सोसाइटी रहने लायक है या नहीं। हाईकोर्ट ने एक याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया है।
दरअसल, जोधपुर के सुशांत सिटी में रहने वाले लोगों को पिछले 20 साल से पीने का पानी नहीं मिल रहा था। उन्होंने 2021 में जनहित याचिका (पीआईएल) दायर की थी। 23 दिसम्बर 2023 की सुनवाई में हाईकोर्ट ने जेडीए के अधिकारियों को सख्त आदेश देते हुए इसके निस्तारण के लिए कहा था। सात महीने पहले भी सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने आदेश न मानने वाले अधिकारियों को फटकार लगाई थी।
मामले में मंगलवार (1 अक्टूबर) को चीफ जस्टिस एमएम श्रीवास्तव और जस्टिस मदन गोपाल व्यास की बेंच में सुनवाई हुई। हाईकोर्ट ने आदेश दिया कि अरबन डेवलपमेंट एंड हाउसिंग डिपार्टमेंट (यूडीएच) यह प्रमाण पत्र जारी करे कि कॉलोनी रहने योग्य है या नहीं। इस मामले में अगली सुनवाई इसी महीने के अंतिम सप्ताह में होगी।
हाईकोर्ट ने कहा- मूलभूत सुविधाएं होने पर ही सर्टिफिकेट जारी करें
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने यूडीएच सेक्रेटरी को आदेश जारी किए। आदेश में हाईकोर्ट ने कहा-पहले यूडीएच प्राइवेट विकसित कॉलोनी को लेकर पूरी जांच करे और मूलभूत सुविधाएं होने के बाद सर्टिफिकेट जारी करे। इसके बाद ही बिल्डर मकान, फ्लेट और भूखंड सेल कर पाएंगे।
यूडीएच और निगम को यह प्रमाणित करना है कि बिल्डर की ओर से विकसित कॉलोनी सभी मामलों में रहने योग्य है।
यानी भविष्य में रहने वालों के लिए जल निकासी, बिजली और पानी की सुविधाएं उपलब्ध हैं। अगर इनमें नियमानुसार सभी सुविधाएं शामिल हैं, तभी आवासीय स्थानों पर पजेशन यानी कब्जा देने की परमिशन होगी।
राज्य और विकास प्राधिकरण यह सुनिश्चित करेंगे कि बिल्डर व्यक्तिगत खरीदारों के साथ धोखाधड़ी न करें। विकास प्राधिकरणों की यह जिम्मेदारी होगी कि वे सुनिश्चित करें कि विकास योजना के अनुसार डेवलपमेंट हो और वर्तमान जैसी स्थिति न हो, जहां पानी की सुविधा के बिना हजारों लोग रहने लगे हैं। इसके लिए यूडीएच सेक्रेटरी सहित प्रदेश के सभी विकास प्राधिकरणों को इस सम्बंध में निर्देश जारी करने के लिए कहा गया है।
जोधपुर में 2003 में सुशांत सिटी को बसाया गया था। अब तक यहां के लोगों को पीने के पानी की सुविधा नहीं मिली है।
300 लोगों को नहीं मिल रहा था पानी
जोधपुर में झालामंड स्थित सुशांत सिटी के निवासियों ने 2021 में पानी की समस्या को लेकर हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। याचिका में बताया गया था कि मूलभूत सुविधाओं के बिना वहां लोग रह रहे हैं और परेशान हो रहे हैं। बिल्डर ने ड्रेनेज सिस्टम, इलेक्ट्रिसिटी कनेक्शन के बिना लेंड और हाउस अलॉट किए हैं।
पानी की पाइप लाइन को लेकर जेडीए, पीएचईडी और बिल्डर अंसल प्रॉपर्टी के बीच 2008 में एमओयू भी हो चुका था। इसके बाद एमओयू (MOU) के अनुसार जेडीए ने डिमांड नोट जारी किया था। 3 करोड़ रुपए डेवलपर की ओर से जेडीए में जमा करवा दिए गए थे। इसके बाद भी यहां रहने वाले 300 लोगों को पानी नहीं मिल पाया था।
