April 20, 2026

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मावा विक्रेता के गोदाम में 273 किलो विशेष पाउडर व नमक विक्रेता का 6.550 हजार किलो आयोडाइज्ड नमक सीज

मावा विक्रेता के गोदाम में 273 किलो विशेष पाउडर व नमक विक्रेता का 6.550 हजार किलो आयोडाइज्ड नमक सीज

मावा विक्रेता के यहां सीज किया गया डेयरी परमिटेड स्प्रे ड्राइड पाउडर पहली बार देखा गया, जांच के बाद ही पता चलेगा यह हानिकारक है या नहीं।

एनसीआई@कोटा

खाद्य सुरक्षा दल ने मंगलवार को संतोष नगर, थेगड़ा स्थित सिद्धि विनायक मावा विक्रेता के गोदाम में 273 किलो‌ डेयरी परमिटेड स्प्रे ड्राइड पाउडर व गुमानपुरा स्थित नमक विक्रेता के यहां 262 बैग्स में रखा 6 हजार 550 किलो आयोडाइज्ड नमक सीज किया। साथ ही चार नमूने लिए।

खास बात यह है कि मावा विक्रेता ने इस पावडर को डेयरी वालों को बेचना स्वीकार किया। पूछताछ करने पर बताया कि यह स्प्रे ड्राइड वह सवाई माधोपुर के बजरिया स्थित ज्ञानसिंह नामक मिल्क सप्लायर को विक्रय करता है।‌ फोन पर बात कराने पर ज्ञानसिंह ने इसे दूध में एसएनएफ बढ़ाने के लिए मिलाना स्वीकार किया। सब स्टेंडर्ड खाद्य पदार्थ की आंशका पर डेयरी परमिटेड स्प्रे पाउडर को सीज किया गया। यह 25 -25 किलोग्राम के 11 कट्टों में रखा हुआ था। लेबल पर इसके विवरण में मिल्क पाउडर होने की बात अंकित नहीं थी। इनमें से एक कट्टे में से नमूना लेकर शेष 10 कट्टे (प्रत्येक 25 किलो) व एक कट्टा 23 किलो का नमूना रिपोर्ट प्राप्त होने तक सीज किया गया।

इसके बाद गुमानपुरा स्थित एक नमक विक्रेता के यहां निरीक्षण करने पर राजावास के एक नमक विक्रेता से 120 रुपए में 25 किलो के भाव से आयोडाइज्ड नमक सप्लाई किया जाना पाया, जबकि बाजार में इसे 10 रुपए प्रति किलो के हिसाब से बेचा जा रहा है। भाव कम होने के कारण अवमानक के शक के आधार पर तीन नमूने लेकर 262 कट्टों में रखा 6 है 550 किलो आयोडाइज्ड नमक सीज किया।

लिए गए कुल 4 नमूनों को खाद्य प्रयोगशाला कोटा भिजवाया गया, जहां से प्राप्त रिपोर्ट के आधार पर नियमानुसार कार्यवाही की जाएगी। इस कार्रवाई में खाद्य सुरक्षा अधिकारी संदीप अग्रवाल, अरुण सक्सेना, चंद्रवीर सिंह जादोन व मोजी लाल कुम्भकार शामिल रहे।

 

कोटा में पहली बार मिला है यह पाउडर

खाद्य सुरक्षा अधिकारी संदीप अग्रवाल ने सीज किए गए डेयरी परमिटेड स्प्रे

ड्राइड पाउडर के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि कोटा में पहली बार ही यह देखा गया है। इसलिए इस पाउडर‌ के बारे में उन्हें भी खास मालूम नहीं है। उन्होंने बताया कि संभवतया इसे दूध में से फेट निकालने के बाद जब उसमें पतलापन आ जाता है‌ तो उसके गाढ़ेपन को मेंटेन रखने के लिए मिलाया जाता है। यह हानिकारक है या नहीं इस बात का पता तो प्रयोगशाला की जांच रिपोर्ट के बाद में पता चलेगा। अग्रवाल का यह भी कहना था कि यह पाउडर तमिलनाडु की एक प्रतिष्ठित कम्पनी का है।

कामयाब कोटा अभियान के तहत कार्रवाई

यह कार्रवाई कोटा प्रशासन द्वारा चलाए जा रहे ‘कामयाब कोटा’ व राज्य में चलाए जा रहे ‘शुद्ध आहार-मिलावट पर वार’ होली स्पेशल अभियान के तहत प्रमुख शासन सचिव मेडिकल एंड हेल्थ गायत्री राठौर व आयुक्त खाद्य सुरक्षा एवं औषधि नियंत्रण एच गुइटे के मार्गदर्शन, जिला कलेक्टर डॉ. रविन्द्र गोस्वामी के निर्देशन में तथा अभिहित अधिकारी एवं सीएमएचओ डॉ. नरेन्द्र नागर के नेतृत्व में की गई।

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