कोटा: अचानक धधक उठी आग, 6 घंटे की मशक्कत के बाद पाया जा सका काबू, क्षेत्रवासियों का आरोप: भू-माफिया जमीन हड़पने के लिए करते हैं आगजनी (वीडियो)
काफी संख्या में पेड़ और झाड़ियां जलकर हुई खाक, धुआं ही धुआं फैल गया
-विनोद गौड़
एनसीआई@कोटा
शहर के बाहरी क्षेत्र नांता में मुनिजी कुंड के पास रविवार सुबह 11 बजे के करीब अचानक आग धधक गई। इस क्षेत्र में झाड़ियां और पेड़ जलने लगे। कुछ ही देर में हर तरफ भारी धुआं हो गया। सूचना पाकर दमकल की गाड़ी मौके पर पहुंचे तो गई, मगर यहां के विकट हालात के मद्देनजर कर्मचारियों को आग बुझाने में काफी मशक्कत का सामना करना पड़ा। इसके चलते करीब 6 घंटे बाद आग पर काबू पाया जा सका।
स्थानीय निवासियों का आरोप है कि पिछले कुछ दिनों से क्षेत्र की जमीन पर कब्जा करने के लिए भू माफिया यहां की झाड़ियों और पेड़-पौधों में आग लग रहे हैं। चार दिन से थर्मल के तालाब की बाउंड्री के बाहर आसपास थोड़े-थोड़े हिस्से में आग लगाई जा रही है। वन विभाग व पीडब्ल्यूडी की सामूहिक भूमि के खसरे हैं। भूमाफिया इसे हड़पना चाहते हैं।
आग पर काबू पाने के लिए करनी पड़ी यह मशक्कत
सूचना मिलने पर राजस्थान विद्युत प्रसारण निगम के सकतपुरा स्थित कार्यालय से पहुंचे कर्मियों ने नांता जीएसएस की हाईटेंशन लाइनों पर शट डाउन लिया। इसके बाद आग पर काबू पाने की मशक्कत शुरू हुई।
यहां दलदली जमीन और ऊपर हाईटेंशन प्रसारण की लाइन होने से आग बुझाने में फायर ब्रिगेड के कर्मचारियों को काफी मशक्कत करनी पड़ी। इसके लिए उन्होंने थर्मल की राख वाले तालाब की दीवार पर चढ़कर आग बुझाने का प्रयास किया, लेकिन दमकल वहां तक नहीं पहुंच पाई। इस पर मुनिजी कुंड के सामने वैकल्पिक रास्ता बनाने के लिए एक जेसीबी मंगवाई गई। इसके द्वारा रास्ता बनाने के बाद दमकलें आगे जा सकीं। तब जाकर करीब 6 घंटे की मशक्कत के बाद में आग पर पूरी तरह काबू पाया जा सका। फायर फाइटिंग में शुभम शर्मा टीम के साथ मौके पर मौजूद रहे। वहीं वन विभाग की ओर से धर्मेंद्र चौधरी ने दमकलों के लिए रास्ता बनवाने के लिए जेसीबी की व्यवस्था करवाई।
हो सकता था बड़ा हादसा
आग की चपेट में आने से वन क्षेत्र में खजूर व नीम जैसे पेड़ों के अलावा बम्बूल की झाड़ियां जल कर खाक हो गईं। यदि ये पेड़ लगातार जलते रहते तो ऊपर से निकल रही हाईटेंशन लाइन के तार पिघल जाते। इससे बड़ा हादसा होना तय था। इसके अलावा यह आग आगे तीन किलोमीटर तक तक फैल कर यहां की भी वनस्पति को खाक कर देती।
