एडीजीपी (IPS) से राजनीति में उतरे, हो गए बुरी तरह फेल, जमानत तक हुई जब्त
डॉ. जय प्रकाश सिंह का पहला चुनाव बना करियर की सबसे बड़ी गलती, राजनीति में उतरने के लिए हिमाचल प्रदेश के एडीजीपी पद से लिया था वीआरएस
एनसीआई@सेन्ट्रल डेस्क
हिमाचल प्रदेश के एडीजीपी रहे डॉ. जय प्रकाश सिंह अपनी तेज़-तर्रार छवि और सफल पुलिस करियर के लिए जाने जाते थे। मगर राजनीति में आने के जुनून में सब कुछ दांव पर लगा बैठे, लेकिन नतीजा बेहद निराशाजनक और शर्मनाक रहा।
प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी ने बिहार विधानसभा चुनाव में उन्हें छपरा सीट से टिकट दिया। स्वभाविक रूप से आईपीएस रहे डॉ. जय प्रकाश सिंह से केवल पार्टी ही नहीं, अपितु उनके परिजनों और परिचितों को भी बड़ी उम्मीदें रहीं, लेकिन चुनाव परिणाम ने सभी के अरमानों को जैसे आसमान से जमीन पर धड़ाम से ला पटका। कुल दस उम्मीदवारों में से पूर्व आईपीएस चौथे नम्बर पर तो रहे ही, वह अपनी जमानत बचाने लायक वोट तक हासिल नहीं कर सके। उन्हें जमानत जब्त होने जैसी शर्मनाक स्थिति तक का सामना करना पड़ा। परिणाम इस प्रकार पर रहे-
• छोटी कुमारी (भाजपा) – 86,845 वोट
• शत्रुघ्न यादव (आरजेडी) – 79,245 वोट
• राखी गुप्ता (निर्दलीय) – 11,488 वोट
• डॉ. जय प्रकाश सिंह (जन सुराज) केवल 3,433 वोट
(जमानत ज़ब्त)
डॉ. जय प्रकाश सिंह को जनवरी 2025 में एडीजीपी पद पर पदोन्नति मिली, लेकिन 5 महीने बाद ही उन्होंने राजनीति में उतरने के लिए वीआरएस ले लिया। उनकी सेवानिवृत्ति में अभी 2 साल बचे थे। वह हिमाचल प्रदेश पुलिस की सीआईडी में एडीजीपी थे। पर राजनीति ने उन्हें ऐसा झटका दिया कि पूरा करियर दांव पर लग गया। उनके इस राजनीतिक परिणाम से सबक मिलता है कि-राजनीति सिर्फ लोकप्रियता नहीं, जमीन और जनाधार मांगती है। कुर्सी छोड़ना आसान है, वोट पाना नहीं।
