राजस्थान: एशिया की सबसे बड़ी निर्माणाधीन फेक्ट्री का विरोध, उग्र ग्रामीणों ने दीवार तोड़ी, कई गाड़ियों को आग लगाई, पुलिस ने लाठीचार्ज के साथ आंसू गैस के गोले छोड़े, विधायक व पुलिसकर्मियों सहित कई आंदोलनकारी घायल
एनसीआई@हनुमानगढ़
जिले के टिब्बी इलाके में राठीखेड़ा गांव के पास निर्माणाधीन एशिया की सबसे बड़ी एथेनॉल फेक्ट्री का ग्रामीण लम्बे समय से विरोध कर रहे हैं। आज बुधवार को यहां हालात तब बुरी तरह बिगड़ गए जब हजारों किसान व ग्रामीण बेरिकेड्स को तोड़ आगे बढ़ने लगे। ट्रेक्टरों से फेक्ट्री की चारदीवारी तोड़ दी और परिसर में घुसकर तोड़फोड़ कर दी। यही नहीं उग्र ग्रामीणों ने कई निजी व सरकारी वाहनों को आग के हवाले कर दिया।

इस पर पुलिस को भीड़ को नियंत्रित करने के लिए लाठीचार्ज करने के साथ आंसू गैस के गोले छोड़ने पड़े, लेकिन स्थिति बेकाबू होने पर पुलिसबल को पीछे हटना पड़ा। इस झड़प में कांग्रेस विधायक अभिमन्यु पूनिया, कई आंदोलनकारी व पुलिसकर्मी घायल हो गए। इन्हें हनुमानगढ़ जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। वहीं टिब्बी क्षेत्र में धारा 163 लागू कर दी गई है। एसपी हरिशंकर के नेतृत्व में करीब 500 जवान और 6 थाना क्षेत्रों की पुलिस टिब्बी में तैनात की गई है। इनमें एक एएसपी व दो डीएसपी भी शामिल हैं।
प्रशासन ने इंटरनेट बंद कराया
हिंसा फैलने के बाद प्रशासन ने टिब्बी और आसपास के गांवों में इंटरनेट सेवा बंद कर दी। स्कूल और बाजार भी एहतियातन बंद कर दिए गए। क्षेत्र में तनाव को देखते हुए अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है। राठीखेड़ा के पास चक 4 आरके में करीब 450 करोड़ रुपए की लागत से एशिया की सबसे बड़ी एथेनॉल फैक्ट्री का निर्माण किया जा रहा है। इसी से ग्रामीणों में आक्रोश है।

ग्रामीणों का आरोप है कि फेक्ट्री से क्षेत्र में गम्भीर प्रदूषण फैलेगा। इसकी अलावा क्षेत्र की उपजाऊ जमीन बंजर हो जाएगी। इसी मुद्दे को लेकर ग्रामीण और किसान संगठन पिछले कई महीनों से आंदोलन कर रहे हैं। किसान नेताओं का कहना है कि उन्होंने दोपहर 2 बजे तक जिला कलेक्टर से वार्ता की मांग की थी और फेक्ट्री निर्माण रोकने का लिखित आश्वासन मांगा था। प्रशासन की ओर से लिखित जवाब न मिलने पर किसान उग्र हो गए और फेक्ट्री की ओर कूच कर दिया।

महापंचायत से पहले ही टिब्बी बन गया था छावनी
उल्लेखनीय है कि इथेनॉल फेक्ट्री के विरोध में बुलाई गई महापंचायत को लेकर टिब्बी कस्बे को सुबह से ही छावनी में तब्दील कर दिया गया था। भारी पुलिस बल तैनात करने के साथ आने-जाने वाले रास्ते भी बंद कर दिए थे। बाजार को बंद करवाया गया। इंटरनेट सेवा भी बंद कर दी गई थी।

‘फेक्ट्री हटाओ क्षेत्र बचाओ’ संघर्ष समिति के नेतृत्व में पिछले 15 माह से चल रहा यह आंदोलन बुधवार को महापंचायत के बाद उग्र हो गया। एसडीएम कार्यालय के सामने सभा के बाद भीड़ सीधे निर्माणाधीन प्लांट की ओर बढ़ी और दीवार तोड़ने का प्रयास किया, जिसके बाद हालात तनावपूर्ण हो गए।
