प्रतिमा विसर्जन जुलूस के दौरान युवक की हत्या के मुख्य आरोपी सरफराज को फांसी की सजा, 9 अन्य आरोपियों को उम्र कैद, घटना के 14 महीने के भीतर आ गया फैसला
रामगोपाल मिश्रा (फाइल फोटो)
उत्तर प्रदेश के बहराइच में 14 महीने पूर्व हुई धार्मिक हिंसा मामले में दोषी सरफराज को फांसी की सजा सुनाई गई है। जिला एवं सत्र न्यायाधीश पवन कुमार शर्मा ने अन्य 9 दोषियों को उम्रकैद की सजा दी है।
एनसीआई@लखनऊ/बहराइच
उत्तर प्रदेश के बहराइच जिले में महाराजगंज बवाल कांड में कोर्ट ने 14 महीने में बड़ा फैसला सुनाया है। अपर एवं जिला सत्र न्यायाधीश पवन कुमार शर्मा ने गुरुवार को इसके मुख्य आरोपी सरफराज को दोषी मानते हुए फांसी की सजा सुनाई है, जबकि 9 अन्य दोषियों को उम्रकैद की सजा दी है। इस मामले पर आज आने वाले फैसले के मद्देनजर एहतियातन पुलिस विभाग ने अदालत परिसर सहित जिलेभर में, विशेषकर महाराजगंज और इसके आसपास सुरक्षा के कड़े बंदोबस्त किए थे। अदालत परिसर में काफी कड़ी सुरक्षा व्यवस्था रही।

उल्लेखनीय है कि हरदी थाने के महाराजगंज में 13 अक्तूबर 2024 को प्रतिमा विसर्जन जुलूस के दौरान भड़की हिंसा में रामगांव थाने के रेहुवा मंसूर गांव निवासी राम गोपाल मिश्रा की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इसके बाद लगभग एक सप्ताह तक क्षेत्र में भारी बवाल मचा रहा। इस मामले में सरकार ने तत्कालीन सीओ महसी रूपेन्द्र गौड़ व एएसपी ग्रामीण डॉ. पवित्र मोहन त्रिपाठी को हटा दिया था। स्थित सामान्य होने के बाद एसपी वृंदा शुक्ला का भी तबादला कर दिया गया था। 13 अक्तूबर की ही रात हरदी थाने के अब्दुल हमीद सहित 13 आरोपियों को नामजद कर दंगा, हत्या सहित विभिन्न संज्ञेय धाराओं में केस दर्ज किया गया था।
इस मामले में अदालत में चली सुनवाई के बाद मंगलवार को अदालत ने गोपाल मिश्रा की हत्या के मामले में 10 आरोपियों को दोष सिद्ध घोषित किया था। एडीजीसी क्रिमिनल प्रमोद कुमार सिंह ने कहा कि तेज पैरवी के चलते कोर्ट में 4 मार्च से साक्ष्य शुरू होकर 26 नवम्बर को पूर्ण हो गए। तीन आरोपियों को संदेह के आधार पर बरी किया गया। वहीं, दस आरोपियों पर दोष सिद्ध हुआ। फैसला सुरक्षित कर लिया गया था। इसे आज सुनाया गया।

इस बवाल से जुड़े 12 अन्य मामले भी थानों में दर्ज
इस केस के अलावा दंगे से प्रभावित 10 अन्य एफआईआर हरदी थाने व 2 रामगांव थाने में दर्ज हैं। तत्कालीन एसएचओ सुरेश कुमार वर्मा को हटाकर कमल शंकर चतुर्वेदी को हरदी थानाध्यक्ष की कमान सौंपी गई थी। पुलिस के सामने सबसे बड़ी चुनौती दंगा पर नियंत्रण व आरोपियों की गिरफ्तारी की थी। इस मामले में तत्कालीन थानाध्यक्ष कमल शंकर चतुर्वेदी ने विवेचना के बाद 11 जनवरी 2025 को कोर्ट में चार्जशीट दाखिल कर दी थी। यही नही कोर्ट ने इस मामले में तेजी से संज्ञान लेते हुए 18 फरवरी को 13 आरोपियों पर अपराध तय किए।
