April 17, 2026

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स्पीकर बिरला का सनसनीखेज खुलासा: कांग्रेस पार्टी के सदस्य प्रधानमंत्री मोदी के साथ कुछ भी कर सकते थे, पुख्ता जानकारी थी, मेरा आग्रह मान वो नहीं आए, वरना अप्रिय दृश्य होता

स्पीकर बिरला का सनसनीखेज खुलासा: कांग्रेस पार्टी के सदस्य प्रधानमंत्री मोदी के साथ कुछ भी कर सकते थे, पुख्ता जानकारी थी, मेरा आग्रह मान वो नहीं आए, वरना अप्रिय दृश्य होता

एनसीआई@नई दिल्ली/सेन्ट्रल डेस्क

लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने सदन में एक ऐसा खुलासा किया, जिसने पूरे देश में सनसनी फैला दी है। बिरला ने गुरुवार को लोकसभा में जो जानकारी दी उसके अनुसार कल बुधवार को लोकसभा में विपक्ष के चल रहे हंगामे के बीच खुद बिरला ने ही पीएम मोदी को सदन में आने से मना किया था। इसका कारण बताते हुए स्पीकर बिरला ने कहा- “प्रधानमंत्री के साथ कुछ भी अप्रत्याशित हो सकता था। कल जो सदन में हुआ, वह काले धब्बे की तरह है।”

उल्लेखनीय है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी बुधवार, 4 फरवरी को शाम 5 बजे लोकसभा में धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा का जवाब देने वाले थे, मगर विपक्ष के हंगामे के कारण ऐसा नहीं हो सका। विपक्ष की महिला सांसदों के हंगामे के चलते पीठासीन स्पीकर संध्या राय ने कार्यवाही आज गुरुवार तक के लिए स्थगित कर दी थी।

इसके बाद आज गुरुवार को पीएम के जवाब के बिना ही लोकसभा से धन्यवाद प्रस्ताव ध्वनिमत से पारित हो गया। धन्यवाद प्रस्ताव पारित होने के बाद सदन में स्पीकर ओम बिरला ने यह जानकारी दी कि कल बुधवार को प्रधानमंत्री से उन्होंने ही सदन में न आने का आग्रह किया था।

सदन के इतिहास में आज तक नहीं हुआ ऐसा

स्पीकर बिरला ने तीन बजे सदन की कार्यवाही शुरू होने पर चेयर से कहा कि कल लोकसभा के चेम्बर में इस सदन के कुछ सदस्यों ने जिस तरह का व्यवहार किया, जिस तरह के दृश्यों का सृजन किया, वैसा इस सदन के इतिहास में आज तक कभी नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि हमारी संसदीय प्रणाली में सदन के सभापति का गरिमामयी स्थान हमारे संविधान ने ही सुनिश्चित किया है। स्पीकर ने कहा कि राजनीतिक मतभेदों को सदन के कार्यालय तक कभी नहीं लाया गया, यही इतिहास रहा है।

पुख्ता जानकारी, प्रधानमंत्री के साथ कुछ भी कर सकते थे

बिरला ने कहा कि प्रतिपक्ष के सदस्यों ने जो व्यवहार अध्यक्ष के कार्यालय में किया, वह हमारी संसदीय परम्पराओं के लिए उचित नहीं था। वह एक काले धब्बे की तरह था। हम सभी को सदन सुचारू रूप से चलाने में सहयोग करना चाहिए। स्पीकर ने कहा कि इसके बाद जब सदन के नेता प्रधानमंत्री को राष्ट्रपति के अभिभाषण पर जवाब देना था, मेरे पास ऐसी पुख्ता जानकारी आई कि कांग्रेस पार्टी के कुछ सदस्य प्रधानमंत्री के आसन पर पहुंचकर कोई भी अप्रत्याशित घटना कर सकते हैं।

प्रधानमंत्री ने आग्रह मान सदन को अप्रिय दृश्य से बचाया

स्पीकर ने आगे कहा कि यह दृश्य मैंने सदन में देखा भी। अगर यह घटना हो जाती, तो ये अलोकप्रिय दृश्य देश की लोकतांत्रिक परम्पराओं को तार-तार कर देता। इसे टालने के लिए मैंने प्रधानमंत्री से आग्रह किया कि उन्हें सदन में नहीं आना चाहिए। बिरला ने कहा कि सदन का सभापति होने के नाते मेरी जिम्मेदारी बनती थी कि सदन की उच्च परम्पराओं, गरिमाओं को अक्षुण्ण बनाए रखें। स्पीकर ने आगे कहा कि सदन के नेता सदन में ना बोलें, यह सभा के लिए किसी भी प्रकार से उचित नहीं है। सदन के नेता ने मेरे आग्रह को मानकर सदन को अप्रिय दृश्य से बचाया।

 

व्यूह रचना : इस तरह घेर लिया था महिला सांसदों ने प्रधानमंत्री मोदी की कुर्सी को।
व्यूह रचना : इस तरह घेर लिया था महिला सांसदों ने प्रधानमंत्री मोदी की कुर्सी को।

बिरला ने विपक्ष के सांसदों से कहा कि आप पोस्टर लेकर आएंगे तो सदन नहीं चलेगा। जिस तरह से महिला सदस्य पीएम की सीट तक पहुंचीं, उसे देश ने देखा। ये उचित नहीं था। ये सदन की गरिमा के अनुकूल भी नहीं था।

बुधवार को पीएम की प्रस्तावित स्पीच से पहले यह हुआ

शाम 5 बजे जब सदन की कार्यवाही शुरू हुई‌ तो विपक्ष की महिला सांसदों ने सत्ताधारी नेताओं की कुर्सियां घेर लीं, इनमें पीएम मोदी की कुर्सी भी थी। इस नजारे को देख हर कोई अचम्भित था। कोई भी भारतीय नागरिक संसद में इस तरह की निम्नस्तरीय गतिविधि की कल्पना तक नहीं कर सकता था। भारतीय संसदीय इतिहास को कलंकित करने वाला दिन रहा था। महिला सांसदों के हाथों में बड़े बैनर थे, जिन पर लिखा था- जो सही है, वो करो।

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