May 6, 2026

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बीजेपी के कृष्णेंदु मुखर्जी ने जीतते ही निभाया वादा, सालों से बंद दुर्गा माता के मंदिर का ताला खोला, अब पूरे साल खुला रहेगा, श्रद्धालुओं ने जमकर मनाई खुशी

बीजेपी के  कृष्णेंदु मुखर्जी ने जीतते ही निभाया वादा, सालों से बंद दुर्गा माता के मंदिर का ताला खोला, अब पूरे साल खुला रहेगा, श्रद्धालुओं ने जमकर मनाई खुशी

पश्चिम बंगाल में बीजेपी की प्रचंड जीत के बाद पश्चिम बर्धमान जिले के आसनसोल उत्तर में एक दुर्गा मंदिर को साल के सभी 365 दिनों के लिए खोल दिया गया है। बीजेपी ने आसनसोल उत्तर के साथ पश्चिम बर्धमान जिले की सभी सीटों पर जीत हासिल की है। चुनावों नतीजों के मंदिर के द्वार खुलने पर लोगों ने जमकर खुशी मनाई।

एनसीआई@कोलकाता

पश्चिम बंगाल में बीजेपी की ऐतिहासिक जीत के बाद आसनसोल में सालों से बंद दुर्गा मंदिर को हमेशा के लिए खोल दिया गया है। बीजेपी ने पश्चिम बर्धमान की सभी सीटों पर जीत के बाद यह फैसला लिया। विजयी रहे कृष्णेंदु मुखर्जी ने चुनावी वादा निभाते हुए मंदिर को सालभर खोलने की पहल की, जिससे स्थानीय लोगों में खुशी की लहर दौड़ गई। कृष्णेंदु मुखर्जी ने 1 लाख 4 हजार 516 वोट हासिल कर टीएमसी के मोलोय घटक को शिकस्त दी। इस सीट पर बीजेपी को पहली बार जीत मिली। 2011 से इस सीट पर टीएमसी का कब्जा था। इससे पहले 2001 में इसी सीट से टीएसमी उम्मीदवार के तौर पर कल्याण बनर्जी चुने गए थे।

दुर्गा मंदिर खुलने से लोगों में जबरदस्त खुशी

यह दुर्गा मंदिर आसनसोल के बस्तिन बाजार स्थित है। श्री-श्री दुर्गामाता चैरिटेबल ट्रस्ट के दुर्गा मंदिर के दरवाजे सालों से बंद थे। इन्हें कल सोमवार को चुनाव रिजल्ट घोषित होते ही खोल दिया गया। इसके बाद श्रद्धालुओं ने पूजा-अर्चना की, मां दुर्गा के जयकारे लगाए। स्थानीय लोगों ने मीडिया से बातचीत में कहा कि वे लम्बे समय से इस पल का इंतजार कर रहे थे, क्योंकि यह मंदिर उनकी आस्था का प्रमुख केन्द्र रहा है। आसनसोल उत्तर विधानसभा सीट से जीते कृष्णेंदु मुखर्जी ने चुनाव प्रचार के दौरान यह वादा किया था कि यदि वे जीतते हैं तो मंदिर को साल के 365 दिन आम श्रद्धालुओं के लिए खोल दिया जाएगा। यह क्षेत्र और विधानसभा टीएमसी सांसद शत्रुघ्न सिन्हा के सीट के अंर्तगत आता है।

यह था मामला 

पता चला है कि मुस्लिम बहुल क्षेत्र में इस मंदिर के होने से इसका विरोध किया जाता था। मुस्लिम लोगों के इसे दबाव के चलते प्रशासन और सरकार ने सालों पहले इस मंदिर को साल में केवल दो बार दुर्गा पूजा और लक्ष्मी पूजा के दिन ही खोलने का निर्णय लिया था। हिन्दू इससे काफी आक्रोशित थे।

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