किरोड़ी लाल मीणा स्वेच्छा से इलाज के लिए दिल्ली रवाना, कहा- तबीयत बिगड़ती जा रही है, सरकार क्रूरता-लापरवाही बरत रही है
एनसीआई@जयपुर
एसएमएस अस्पताल में भर्ती राज्यसभा सांसद किरोड़ी लाल मीणा आज मंगलवार को स्वेच्छा से इलाज के लिए दिल्ली रवाना हो गए। इससे पहले उन्होंने मीडिया से बात करते हुए कहा कि, अगर दीन हीन, गरीबों के लिए लड़ना सरकार के लिए आतंक है तो मैं आतंक करता रहूंगा।
मीणा ने आगे राज्य सरकार पर गम्भीर आरोप लगाते हुए कहा कि मेरी तबीयत लगातार बिगड़ती जा रही है। हाथ- बाएं पैर की कमजोरी बढ़ती जा रही है। चक्कर लगातार बढ़ रहे हैं, घबराहट बहुत ज्यादा हो रही है। हालत बिगड़ सकती है। मुझे रेफर करो दिल्ली या किसी हायर सेंटर पर, मगर जब रेफर नहीं किया तो मैं जीवन बचाने के लिए एसएमएस छोड़कर मेरी इच्छा से जा रहा हूं। मीणा ने आरोप लगाया- यह सरकार इलाज में भी क्रूरता कर रही है, लापरवाही बरत रही है। डॉक्टरों ने केयर तो खूब किया, लेकिन ये सरकार के दबाव में हैं, जो कुछ बोलना नहीं चाहते।
गौरतलब है कि जयपुर के पास सामोद में शनिवार को पुलिस ने राज्यसभा सांसद किरोड़ी लाल मीणा को पकड़ा था। वे देर रात करीब 3 बजे जयपुर में धरने से जबरन उठाई गईं तीन वीरांगनाओं से मिलने उनके गांव जा रहे थे। पुलिस पर मीणा ने हाथापाई का आरोप लगाया था।
हिरासत के दौरान किरोड़ी लाल मीणा की तबीयत खराब हो गई थी। उनके शरीर पर चोट आने से उन्हें उपचार के लिए गोविंदगढ़ सीएचसी ले जाया गया। फिर वहां से उन्हें एसएमएस अस्पताल रेफर कर दिया गया था। तभी से वह यहां भर्ती थे। मगर मीणा के अलावा उनके परिजन भी यहां के इलाज से संतुष्ट नहीं थे। उन्हें चक्कर व उल्टी आने की शिकायत बनी हुई थी। इसके चलते वे दिल्ली रेफर करने की मांग कर रहे थे। वही डॉक्टर उनकी हालत को स्थिर बता रहे थे। यहां उनकी विभिन्न प्रकार की जांचें करवाई गईं थीं।
समर्थकों में फैल गया था आक्रोश
सांसद मीणा की गिरफ्तारी की खबर फैलते ही उनके समर्थक सड़कों पर उतर आए थे। विरोध में जयपुर-आगरा नेशनल हाईवे तथा लालसोट-दौसा हाईवे पर जाम लगा दिया था। उप नेता प्रतिपक्ष राजेन्द्र राठौड़ के आह्वान पर बाद में भाजपा ने भी विरोध प्रदर्शन किए थे। इससे पूर्व एसएमएस अस्पताल के बाहर सैकड़ों की संख्या में आक्रोशित समर्थक जमा हो गए थे। वे अस्पताल में अंदर जाने की मांग को लेकर हंगामा करने लगे थे। नेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़ भी वहां पहुंचे। उन्होंने कहा कि पुलिस ने जो कुछ भी किरोड़ी लाल मीणा के साथ किया, वो प्रदेश के गृहमंत्री के कहने पर किया है और प्रदेश के गृह मंत्री मुख्यमंत्री अशोक गहलोत हैं। मीणा के साथ 50 से अधिक लोगों ने अभद्रता की। बीजेपी नेता अरुण चतुर्वेदी ने कहा- एसएमएस हॉस्पिटल पहुंचे किरोड़ी लाल मीणा के समर्थकों पर पुलिस ने लाठीचार्ज किया, जो गलत है। यहां पर समर्थक आए थे, उन्हें समझाया भी जा सकता था, लेकिन लाठियां चलाना सही नहीं है।
बीजेपी के वरिष्ठ नेता ओम माथुर ने अस्पताल पहुंचकर किरोड़ी मीणा से मुलाकात की थी। इधर, एसएमएस अस्पताल की ओर से हेल्थ बुलेटिन जारी किया गया था। अधीक्षक डॉक्टर अचल शर्मा ने बताया था कि- किरोड़ी जब अस्पताल पहुंचे तो उन्होंने गर्दन और सिर में दर्द की शिकायत बताई थी। इस पर सिटी स्केन किया गया है। अभी तक की जांच में सभी पैरामीटर सामान्य है। डॉक्टरों ने उनके सभी जरूरी टेस्ट किए, उनका इलाज जारी है। ट्रॉमा सेंटर के बाहर अतिरिक्त फोर्स लगा दी गई है।
यह था मामला
उल्लेखनीय है कि किरोड़ी लाल मीणा दोपहर 12 बजे सामोद हनुमान जी के मंदिर दर्शन करने जा रहे थे। इसके बाद वह वीरांगना मंजू जाट के परिवार से मिलने उनके घर जाने वाले थे। इसी दौरान पुलिस ने सामोद थाने के पास किरोड़ी लाल मीणा को रोक लिया। इस दौरान पुलिस और किरोड़ी लाल मीणा के बीच तीखी नोकझोंक भी हुई। करीब डेढ़ घंटे तक किरोड़ी लाल मीणा को मुख्य सड़क पर पुलिस ने रोक कर रखा था। करीब डेढ़ बजे सीनियर ऑफिसर्स मौके पर पहुंचे। किरोड़ी लाल को वापस लौट जाने के लिए समझाया। मगर जब वह मौके से नहीं हटे तो पुलिस ने मीणा को जबरन मौके से हटाया।
इस घटनाक्रम पर किरोड़ी लाल ने कहा था, ‘पुलिस ने मुझे मारने की कोशिश की, लेकिन वीरांगनाओं, युवा, बेरोजगारों और गरीबों के आशीर्वाद से बच गया। मुझे चोट आई है।’ इस बीच बीजेपी के प्रदेश प्रभारी अरुण सिंह भी उनसे मिलने पहुंचे थे।
पुलिस ने मारपीट और बदसलूकी की
किरोड़ी लाल मीणा ने पुलिस पर बदसलूकी करने का आरोप लगाया था। उन्होंने ट्वीट किया था- पुलिस का एक सांसद के साथ में यह कैसा व्यवहार है? हिरासत में लेने के लिए मेरे साथ धक्का-मुक्की व हाथापाई की गई। मेरे कपड़े फाड़ दिए गए। सरकार कान खोलकर सुन ले- इस तानाशाही के बाद मैं झुकने और रुकने वाला नहीं हूं। शहीदों की वीरांगनाओं को हर हाल में न्याय दिलवा कर रहूंगा।
दरअसल, एक वीरांगना मंजू को धरना स्थल से उठाकर पुलिस ने देर रात करीब तीन बजे उनके गांव गोविंदपुरा बासड़ी छोड़ दिया था। फिर उन्हें अमरसर पीएचसी में भर्ती करवाया गया। किरोड़ी मंजू से मिलने के लिए जा रहे थे। वहीं एक अन्य वीरांगना सुंदरी को भरतपुर के अस्पताल में भर्ती करवाया गया था।
शुक्रवार सुबह पुलिस शहीद की पत्नी सुंदरी, देवर विक्रम और बड़ी बेटी सुमन को धरना स्थल जयपुर से उठा लाई थी और नगर के अस्पताल में जबरन भर्ती करा दिया था। विक्रम ने कहा था कि हम स्वस्थ हैं, फिर भी हमें जबरन भर्ती करा दिया। पहले पुलिस सुंदरी को घर लेकर आई, फिर अस्पताल ले गई।
शहीद के भाई विक्रम का कहना था कि भाई की शहादत के बाद 50 लाख की आर्थिक मदद मिल गई। नगर के सरकारी कॉलेज का नाम शहीद भाई के नाम पर रखने की फाइल अभी प्रोसेस में है। अब मेरे लिए सरकारी नौकरी की मांग की जा रही है। सरकार कहती है कि भाई को नौकरी नहीं दी जा सकती।
रात 3 बजे जबरन खत्म करवाया धरना
इससे पहले देवर को नौकरी देने सहित विभिन्न मांगों को लेकर जयपुर में 5 दिन से सचिन पायलट के आवास के बाहर धरना दे रहीं वीरांगनाओं काे पुलिस ने देर रात 3 बजे जबरन उठा दिया था और वीरांगनाओं को उनके घरों तक अलग-अलग एंबुलेंस में भेजा गया था। वहीं, उनके परिजनों सहित आठ लोगों को भी गिरफ्तार कर लिया गया था।
सरकार का कहना है कि शहीदों के लिए जो अनाउंस किया गया था और नियमों में था, वो दिया जा चुका है। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने ट्वीट कर इस धरने को राजनीति से प्रेरित बताया था।
सरकार दमन पर उतर आई, हम फिर धरना देंगे
राज्यसभा सांसद किरोड़ी लाल मीणा ने कहा था- सरकार पत्थर दिल हो गई है। कल वीरांगनाओं ने मुंह में दूब (घास) लेकर सीएम से गुहार की थी, लेकिन इससे भी वह नहीं पिघले। उस गुहार को सुनने की जगह देर रात पुलिस ने वीरांगनाओं को जबरन धरने से उठवा दिया।
वीरांगनाओं से मिलने उनके गांव रवाना होने से पहले मीणा ने कहा था कि तीनों वीरांगनाओं का कोई अता पता नहीं है कि पुलिस उन्हें कहां ले गई है। तीनों से सम्पर्क नहीं हो पा रहा है। साथ वालों को अरेस्ट कर लिया है। सरकार पूरी तरह दमन पर उतर आई है, लेकिन इस तरह हम झुकेंगे नहीं। हम फिर धरना देंगे।
मुंह में घास का मतलब- ‘मैं तुम्हारी गाय’
मुंह में घास दबाकर दुश्मन सेना का कोई भी सैनिक क्षमा मांगता था तो उसकी जान बख्श दी जाती थी। बताया जाता है पठान जब हारने लगते थे, तो वह घास का टुकड़ा मुंह में लेकर आते थे। जिसका अर्थ होता था कि वह यह कह रहे हैं कि वह उनकी गाय है, तो क्षमा कर दिया जाए। बाबरनामा में इसका जिक्र भी है।गुरुवार को तीनों वीरांगनाओं ने मुंह में घास लेकर सीएम हाउस की तरफ जाने का प्रयास किया था।
ये हैं वीरांगनाओं की मांगें
पुलवामा शहीदों की वीरांगना मंजू जाट और सुंदरी देवी देवर के लिए सरकारी नौकरी मांग रही हैं। सरकार का तर्क है कि देवर को सरकारी नौकरी देने का नियमों में प्रावधान नहीं है।
शहीद हेमराज मीना की पत्नी की मांग है कि सांगोद चौराहे पर भी उनकी मूर्ति लगाई जाए। एक स्कूल का नामकरण शहीदों के नाम पर करें।
वीरांगना मंजू जाट का कहना है कि अब सरकार नियमों में नहीं होने का तर्क दे रही है। जबकि मंत्रियों ने पहले घोषणा की थी। सरकार ने तर्क दिया है कि पुलवामा शहीदों को कारगिल शहीदों से ज्यादा पैकेज दिया है। वीरांगनाओं ने अब बदसलूकी करने वाले पुलिसवालों पर कार्रवाई करने की मांग भी जोड़ ली है।
शहीद रोहिताश लांबा की पत्नी मंजू जयपुर के गोविंदपुरा की रहने वाली हैं। शहीद हेमराज मीणा की पत्नी मधुबाला मीणा कोटा के विनोदकलां में रहती हैं और जीतराम गुर्जर की पत्नी सुंदरी देवी भरतपुर के सुंदरवाली तहसील की रहने वाली हैं।
गृह मंत्रालय दे सकता है किसी आश्रित को नौकरी
इधर, शुक्रवार को राज्य सैनिक कल्याण सलाहकार समिति के अध्यक्ष मानवेंद्र सिंह जसोल ने वीरांगनाओं के साथ जयपुर में हुए व्यवहार की निंदा की। जोधपुर में मीडिया से कहा- वीरांगनाएं हो या अन्य महिलाएं बदसलूकी नहीं करनी चाहिए थी। उन्होंने कहा कि यह दुर्भाग्य है कि पुलवामा को फिर से राजनीतिक मुद्दा बनाया गया है।
जसाेल ने कहा- सैनिक कल्याण बोर्ड और राज्य सरकार वीरांगनाओं और उनके बच्चे को नौकरी दे सकती है। यह नौकरी उनके लिए सुरक्षित है। गृह मंत्रालय में यह प्रावधान है कि वह शहीद के परिवार में किसी भी आश्रित को नौकरी दे सकते हैं। ऐसे में वीरांगना को अपने देवर की नौकरी की मांग केन्द्र में गृह मंत्रालय से करनी चाहिए।
सीएम ने दिया था मांगों का जवाब
सीएम अशोक गहलोत ने 8 मार्च को लिखित बयान जारी करके कहा था कि पुलवामा शहीदों की वीरांगनाओं को पैकेज दिया जा चुका है। बीजेपी के कुछ नेता वीरांगनाओं का इस्तेमाल सियासी रोटियां सेंकने के लिए कर रहे हैं। उनकी मौजूदा मांगें अनुचित हैं। गहलोत ने कहा- बीजेपी के कुछ नेता अपनी राजनीतिक रोटियां सेंकने के लिए वीरांगनाओं का इस्तेमाल कर उनका अनादर कर रहे हैं। यह कभी भी राजस्थान की परम्परा नहीं रही है। मैं इसकी निंदा करता हूं।
गहलोत ने कहा- शहीद हेमराज मीणा की पत्नी उनकी तीसरी मूर्ति एक चौराहे पर स्थापित करवाना चाहती हैं। पहले शहीद की दो मूर्तियां राजकीय कॉलेज, सांगोद के ग्राउंड और उनके पैतृक गांव विनोद कलां स्थित पार्क में लगाई जा चुकी है। ऐसी मांग अन्य शहीद परिवारों को देखते हुए उचित नहीं है।
शहीद के देवर को नौकरी दी तो बच्चों का क्या होगा?
गहलोत ने कहा- शहीद रोहिताश लाम्बा की पत्नी अपने देवर के लिए अनुकंपा नियुक्ति मांग रही है। अगर आज शहीद लांबा के भाई को नौकरी दे दी जाती है तो आगे सभी वीरांगनाओं के परिजन और रिश्तेदार उनके अथवा उनके बच्चे के हक की नौकरी दूसरे परिजन को देने का अनुचित सामाजिक-पारिवारिक दबाव डालने लग सकते हैं। शहीदों के बच्चों का हक मारकर किसी अन्य रिश्तेदार को नौकरी देना कैसे उचित ठहराया जा सकता है? जब शहीद के बच्चे बालिग होंगे तो उन बच्चों का क्या होगा? उनका हक मारना उचित है क्या?
