April 20, 2026

News Chakra India

Never Compromise

राजस्थान: बहुचर्चित रकबर मॉब लिंचिंग केस में 4 दोषी करार, 7-7 साल की सजा, एक आरोपी बरी

राजस्थान: बहुचर्चित रकबर मॉब लिंचिंग केस में 4 दोषी करार, 7-7 साल की सजा, एक आरोपी बरी

एनसीआई@अलवर

जिले के रामगढ़ में हुए बहुचर्चित रकबर मॉब लिंचिंग केस में गुरुवार को कोर्ट ने 5 में से 4 आरोपियों को दोषी करार दिया। एडीजे कोर्ट नम्बर-1 ने चारों दोषियों को 7-7 साल की सजा सुनाई। इसी के साथ उन पर 10-10 हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया गया है। पांचवें आरोपी को संदेह का लाभ देकर सभी धाराओं से बरी कर दिया गया।

कोर्ट का फैसला आने से पहले सुबह से ही बड़ी संख्या में लोग वहां पहुंच गए थे। इस बीच एहतियातन कई थानों की पुलिस वहां तैनात कर दी गई थी।

पीड़ित पक्ष के एडवोकेट अशोक शर्मा ने बताया कि करीब 5 पांच साल पहले गौ तस्करी के शक में रामगढ़ के ललावंडी में हरियाणा के कोल गांव निवासी 40 साल के रकबर उर्फ अकबर के साथ कई लोगों ने मारपीट की थी। इससे अकबर को अंदरूनी चोटें आईं थीं। उसे गम्भीर घायल अवस्था में अस्पताल ले जाया गया, लेकिन कुछ घंटों बाद रकबर ने वहां दम तोड़ दिया।

इस मामले में कोर्ट ने आरोपी परमजीत, धर्मेन्द्र, नरेश व विजय कुमार को धारा 341 व 304 पार्ट एक के तहत दोषी पाया। एक अन्य आरोपी नवल किशोर के खिलाफ पर्याप्त सबूत नहीं होने से उसे बरी कर दिया गया। कोर्ट का फैसला आते ही चारों आरोपियों को पुलिस कस्टडी में ले लिया गया। उधर, कोर्ट के आदेश के बाद कुछ लोगों ने गहलोत सरकार और रामगढ़ विधायक सफिया खान के खिलाफ नारेबाजी की।

पीड़ित पक्ष के वकील का दावा- ये मॉब लिंचिंग

एडवोकेट अशोक कुमार ने कहा कि मॉब लिंचिंग का काेई सेक्शन नहीं है। यह एक्ट अभी अस्तित्व में नहीं आया है। यह लागू नहीं हुआ है। लेकिन है तो मॉब लिंचिंग ही। आरोपियों को जिन धाराओं में दोषी माना गया है, वे धारा 302 के ही पार्ट हैं। जहां हत्या करने वाले को नॉलेज तो होता है, लेकिन इरादा हत्या का नहीं होता। दोषियों ने जो मारपीट रकबर से की वह हत्या में न आकर 304 प्रथम में आती है। लिंचिंग का मतलब है कि अन्याय पूर्ण दंड देना। इसमें खुद कानून हाथ में लेकर मारपीट मानी जाती है, इसमें पीड़ित की बाद में मौत हो जाती है। कोर्ट ने इस विषय पर कोई टिप्पणी नहीं की है। कोर्ट से सजा मिलने के बाद पुलिस कस्टडी में आरोपियों को ले जाया गया। इस दौरान सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे।

बचाव पक्ष बोला- ये मॉब लिंचिंग नहीं

आरोपी पक्ष के वकील हेमराज गुप्ता का कहना है कि मॉब लिंचिंग मानते तो आरोपियों को 147 में भी दोषी माना जाता, लेकिन कोर्ट ने धारा 147 में सबको बरी कर दिया है। धारा 304 में दोषी माना है। कोर्ट के आदेश में लिखा है कि उस समय के रामगढ़ थाने के एएसआई मानसिंह ने घटना को गम्भीरता से नहीं लिया। घायल को तुरंत अस्पताल ले जाकर इलाज नहीं कराया गया। कुशल व अनुभवी अधिकारी की तरह काम नहीं किया। इस प्रकार एएसआई ने अपने कर्तव्य का निर्वहन नहीं किया, गैर जिम्मेदाराना कृत्य किया गया।

जंगल में घेरकर मारपीट

घटनाक्रम के अनुसार रामगढ़ के ललावंडी गांव के पास 2020-21 जुलाई 2018 की रात काे जंगल से पैदल गाय ले जा रहे हरियाणा के कोलगांव निवासी रकबर उर्फ अकबर एवं उसके साथी असलम काे लोगों ने घेरकर मारपीट की थी। इस दाैरान असलम लाेगाें से छूटकर भाग गया था, लेकिन रकबर घायल हाे गया था। घायल काे पुलिस के हवाले कर दिया था। रामगढ़ सीएचसी पर ले जाने के दाैरान रकबर की माैत हाे गई थी। पुलिस ने इस मामले में धर्मेन्द्र, परमजीत सिंह, नरेश, विजय व नवल काे आरोपी मानते हुए गिरफ्तार किया था। ये सभी आरोपी हाईकोर्ट के आदेश से जमानत पर थे।

बहस पहले ही हो चुकी थी पूरी

मॉब लिंचिंग केस में पहले ही अदालत में दोनों पक्षों की बहस पूरी हाे गई थी। केस में फैसले की तारीख पहले 15 मई तय की गई थी, बाद में 25 मई तय हुई। इस मामले में सरकार की ओर से 67 गवाहों के बयान तथा 129 पेज के दस्तावेज साक्ष्य पेश किए गए। इस बहुचर्चित मॉब लिंचिंग केस में पैरवी के लिए राजस्थान सरकार ने जयपुर हाईकोर्ट के वरिष्ठ एडवोकेट नासिर अली नकवी काे 2021 में विशिष्ट लोक अभियोजक नियुक्त किया था। केस की सुनवाई अलवर एडीजे नम्बर 1 में हुई।

पहले आरोपी गिरफ्तार हुए थे

एडवोकेट नकवी ने बताया कि 20-21 जुलाई 2018 काे रकबर की मारपीट की हत्या कर दी गई थी। इस केस में पुलिस ने परमजीत, धर्मेन्द्र व नरेश काे गिरफ्तार किया था। बाद में विजय व नवल काे गिरफ्तार किया गया था। इस तरह मॉब लिंचिंग में कुल 5 आरोपियों के खिलाफ चालान पेश किया था। केस में 67 गवाहों के बयान कराए गए।

इनमें कांस्टेबल नरेंद्र सिंह, तत्कालीन रामगढ़ थाना प्रभारी एवं एएसआई मोहन सिंह, रकबर का साथी असलम सहित पांच लाेग चश्मदीद गवाह बने। 129 पेज के दस्तावेजी साक्ष्य पेश किए गए। इनमें आरोपियों के मोबाइल की कॉल डिटेल व लोकेशन भी है। पुलिस ने मारपीट में काम में लिए डंडे भी बरामद किए थे। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में रकबर के शरीर पर 13 चोटों के निशान थे। डॉक्टरों ने उसकी माैत भी चोट के कारण मानी थी। पुलिस हिरासत में मारपीट के काेई साक्ष्य नहीं मिले हैं।

केस के ट्रांसफर की भी लगाई थी याचिका

रकबर मॉब लिंचिंग के मामले में परिजनों ने जिला जज अदालत में केस ट्रांसफर की याचिका भी लगाई थी। हालांकि याचिका खारिज हाे गई थी और केस एडीजे-1 की अदालत में चला। प्रशासन ने यह मामला राज्य सरकार के गृह व विधि विभाग को भेजा था। बाद में राज्य सरकार ने इसमें हाईकोर्ट के सीनियर एडवोकेट नासिर अली नकवी काे पैरवी के लिए नियुक्त किया था।

आरोपी पक्ष के वकील ने कहा 302 व 147 से बरी माना

आरोपी पक्ष के वकील एडवोकेट हेमराज गुप्ता का कहना है कि नवल को सब धाराओं से बरी किया गया है। बाकी मुल्जिमों को 302 व 147 से बरी कर दिया। सिर्फ 304 व 341 में सजा दी गई है। 304 का मतलब है कि हत्या का इरादा नहीं था। इसलिए मॉब लिंचिंग साबित नहीं होती है।

न्यायिक जांच में पुलिस को दोषी माना था, लेकिन अदालत ने उसको नजरअंदाज किया है। असलम के बयान में किसी भी आरोपी का नाम नहीं था। लेकिन न्यायिक जांच को अभियोजन ने जानबूझकर न्यायालय में प्रस्तुत नहीं किया। हमने पुलिस अधीक्षक व डीजी को नोटिस दिया है कि न्यायिक जांच में अधिकारियों को दोषी माना, लेकिन पुलिसकर्मियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई। हम इस मामले में उच्च न्यायालय में अपील करेंगे।

मामले में बनाए गए थे 5 आरोपी

आरोपियों में विजय कुमार (28) पुत्र रमेश निवासी ललावंडी, नवल किशोर (48) पुत्र चंद्र लाल निवासी ललावंडी, धर्मेन्द्र (28) पुत्र कैलाश चंद यादव निवासी ललावंड़ी, परमजीत सिंह (32) उर्फ छोटा पुत्र हरवंत सिंह व नरेश कुमार पुत्र दुलीचंद निवासी ललावंड़ी शामिल थे। इनमें से नवल किशोर को बरी किया गया है।

अकबर उर्फ रकबर के 7 बच्चे हैं। तीन लड़के व चार लड़की। रकबर की मौत के करीब 7 महीने बाद एक्सीडेंट में उसकी पत्नी असमीना की रीढ़ की हड्डी टूट गई। वह बीमार है। करीब 2 साल बाद अकबर के पिता सुलेमान की बीमारी से मौत हो गई।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You may have missed

Copyright © All rights reserved. | Newsphere by AF themes.