क्या पाकिस्तान के पीएम करेंगे भारत के नए संसद भवन का उद्घाटन? कांग्रेस नेता ने ही अपनी पार्टी सहित विपक्ष से किया सवाल
एनसीआई@नई दिल्ली
कांग्रेस नेता एवं प्रियंका गांधी वाड्रा के राजनीतिक सलाहकार माने जाने वाले आचार्य प्रमोद कृष्णम ने विपक्ष से नए संसद भवन के उद्घाटन के बहिष्कार के अपने फैसले पर पुनर्विचार करने की अपील की है। आचार्य का बयान कांग्रेस सहित 20 विपक्षी दलों द्वारा नए संसद भवन के अनावरण समारोह का बहिष्कार करने की घोषणा के बाद आया है। उन्होंने कहा कि हमें राष्ट्र को पहले रखना चाहिए और फिर राजनीति करनी चाहिए। न्यूज़ एजेंसी एएनआई की एक रिपोर्ट में यह बात कही गई है।
पार्टी से अलग रुख अपना रहे प्रमोद कृष्णम
इस रिपोर्ट के अनुसार, आचार्य कृष्णम ने यह कहते हुए अपनी पार्टी से अलग रुख अख्तियार किया कि विपक्ष को पीएम मोदी की नीतियों का विरोध करने का अधिकार है, लेकिन पूरे देश का विरोध करना सही नहीं है, क्योंकि संसद पूरे देश के लिए है, किसी विशेष के लिए नहीं।

उन्होंने यह भी कहा कि विपक्ष को प्रधानमंत्री के पद पर सवाल नहीं उठाना चाहिए, क्योंकि वह किसी एक पार्टी के नहीं बल्कि पूरे देश के प्रधानमंत्री हैं।
मोदी विरोध के साथ राष्ट्र का विरोध सही नहीं
कांग्रेस नेता ने कहा- “अगर भारत की संसद का उद्घाटन भारत के पीएम द्वारा नहीं किया जाता है, तो क्या इसका उद्घाटन पाकिस्तान के पीएम द्वारा किया जाएगा? हमें मोदी का विरोध करने का अधिकार है, लेकिन देश का विरोध करना सही नहीं है। मैं विपक्ष से पुनर्विचार करने की अपील करता हूं।”
20 दल कर रहे बहिष्कार
पीएम मोदी 28 मई को नए संसद भवन को राष्ट्र को समर्पित करने वाले हैं। कांग्रेस सहित कुल 20 विपक्षी दलों ने नए संसद भवन के उद्घाटन के बहिष्कार की घोषणा की है। उन्होंने कहा है कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के बिना भवन का उद्घाटन करने का प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का निर्णय ‘राष्ट्रपति का अपमान करना है और संविधान का उल्लंघन करता है’।
संसद के उद्घाटन समारोह का बहिष्कार करने वालों में कांग्रेस, एआईयूडीएफ, डीएमके, आम आदमी पार्टी, शिवसेना (यूबीटी), समाजवादी पार्टी, टीएमसी, जनता दल (यूनाइटेड), राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी), राजद शामिल हैं। भारतीय यूनियन मुस्लिम लीग, नेशनल कॉन्फ्रेंस, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी, झारखंड मुक्ति मोर्चा, केरल कांग्रेस (मणि), विधुथलाई चिरुंथाईगल काची, राष्ट्रीय लोकदल, क्रांतिकारी, सोशलिस्ट पार्टी और एमडीएमके भी इनके साथ हैं।
