‘मम्मी पापा खुश रहो’ लिखकर नीट की तैयारी कर रहा छात्र फंदे से लटक गया
एनसीआई@कोटा
दादाबाड़ी थाना क्षेत्र में रहकर नीट (NEET) की तैयारी कर रहे एक छात्र ने बुधवार रात आत्महत्या कर ली। इस साल अभी तक की यह तेरहवीं घटना है। पीजी संचालक की सूचना पर पहुंची पुलिस ने शव को फंदे से उतारा।

सीआई नरेश कुमार मीणा ने बताया कि उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर का निवासी आशुतोष चौरसिया (20) पुत्र भुवनेश्वर चौरसिया नीट की तैयारी करने के लिए कोटा में दूसरी बार आया था। उसकी बहन (बुआ की लड़की) भी यहां नीट की कोचिंग ले रही है। दोनों ही शास्त्री नगर के एक ही पीजी में रह रहे थे। बुधवार शाम को करीब 8 बजे कोचिंग इंस्टिट्यूट से लौटी बहन ने भाई के कमरे का दरवाजा खटखटाया तो अंदर से कोई जवाब नहीं मिला।
इस बीच आशुतोष के मम्मी-पापा भी उसे लगातार कॉल कर रहे थे, लेकिन उन्हें भी कोई जवाब नहीं मिल रहा था। इधर, दरवाजा खटखटाने पर कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली तो आशुतोष की बहन रोते हुए भाई को काफी देर तक आवाज देती रही। फिर उसने पीजी संचालक को यह जानकारी दी। उसने भी आशुतोष के कमरे का दरवाजा खुलवाने की काफी कोशिश की, मगर कोई बात नहीं बनी। इसी बीच सूचना पाकर मौके पर पहुंची पुलिस ने दरवाजा तोड़ा तो कमरे में आशुतोष पंखे से लटका हुआ मिला। पुलिस ने इसे एमबीएस अस्पताल की मोर्चरी में रखवाया और इसके परिजनों को सूचना दी।
बहन के कोचिंग इंस्टिट्यूट से लौटने पर चला पता
जानकारी के अनुसार आशुतोष बुधवार को भी कोचिंग इंस्टीट्यूट तो गया था, मगर वहां से दोपहर करीब 2 बजे लौटने के बाद वह कमरे से बाहर नहीं निकला। उसकी बहन शाम के बैच में कोचिंग के लिए जाती थी। रात को जब वह पीजी में वापस लौटी और खाना खाने के बाद भाई के कमरे पर पहुंची, तब पूरी घटना का खुलासा हुआ।
सीआई मीणा ने बताया कि आशुतोष के पास एक सुसाइड नोट भी मिला है। इसमें उसने लिखा है-‘मम्मी-पापा आप खुश रहो।’ इस सुसाइड नोट में आत्महत्या के पीछे के कारणों का स्पष्ट रूप से जिक्र नहीं है, लेकिन यह घटना छात्र पर पढ़ाई का मानसिक दबाव होने की ओर इशारा करती है।
इस मामले में पुलिस की जांच में खुलासा हुआ है कि आशुतोष पढ़ने में तो काफी होशियार था और कोचिंग में भी उसके अच्छे नम्बर आ रहे थे, मगर वह न्यूरो की समस्या से ग्रसित था। इसका इलाज चल रहा था। इस बीमारी से वह परेशान रहता था।
कमरे में नहीं था एंटी हेंगिंग डिवाइस
कोटा में कोचिंग छात्र-छात्राओं की आत्महत्याओं के बढ़ते मामलों के कारण प्रशासन काफी पहले सभी पीजी व हॉस्टल के कमरों में सीलिंग फैन पर एंटी हेंगिंग डिवाइस लगाना अनिवार्य कर चुका है, इसके बावजूद कई जगहों पर इसकी पालना नहीं हो रही है। पीजी में आशुतोष के कमरे में भी यह आवश्यक डिवाइस नहीं था।
प्रशासन की तमाम सख्ती के बाद भी पीजी संचालक एंटी हेंगिंग डिवाइस नहीं लगा रहे हैं, जबकि पहले भी प्रशासन कई बार ऐसे हॉस्टल और मकान के कमरों को सीज कर चुका है।
ऐसे काम करती है यह डिवाइस
उल्लेखनीय है कि एंटी हेंगिंग डिवाइस एक स्प्रिंग है जो पंखा लटकाने वाली रॉड के अंदर लगती है और यह अलार्म डिवाइस से जुड़ सकता है। कोई भी इस पर लटकेगा तो पंखा नीचे लटक जाएगा।
पंखे की भार वहन लोड क्षमता 40 किलो तक होती है। इस पर 40 किलो से ज्यादा भार आने पर स्प्रिंग फैल जाती है और पंखा नीचे आ जाता है। मान लीजिए कि कोई 40 किलो से ज्यादा वजन वाला व्यक्ति पंखे पर लटकता है तो पूरा लोड स्प्रिंग और क्लेम्प पर आ जाता है। जैसे ही कोई 40 किलो से ज्यादा वजन की चीज लटकती है, जॉइंट टूट जाता है और स्प्रिंग फैलकर नीचे आ जाती है। इससे आत्महत्या की कोशिश करने वाले व्यक्ति को कोई नुकसान नहीं होता है, इस प्रकार उसे बचाया जा सकता है। जिन पंखों में अलार्म सिस्टम लगा होता है, उनमें अलार्म बज जाता है।
हालांकि इस डिवाइस के साथ पंखा लगाने पर टेक्निकल इश्यू यह भी आ सकता है कि कभी-कभी यह जॉइंट लूज होने के बाद अपने आप ही नीचे आ जाता है। एक बार क्लेम्प टूटने के बाद डिवाइस फिर लगानी पड़ती है।
