एनसीआई@संभल
उत्तर प्रदेश के संभल की जामा मस्जिद में अदालत के आदेश पर रविवार सुबह सर्वे करने पहुंची टीम की सुरक्षा में तैनात पुलिसकर्मियों पर मुस्लिमों की भीड़ ने भारी पथराव कर दिया। इससे एसपी सहित कई पुलिसकर्मी घायल हो गए। उपद्रवियों की ओर से चलाई गई एक गोली एसपी के पीए के पैर में जा लगी। भीड़ ने इधर-उधर आगजनी करने के साथ कई वाहनों को भी आग लगा दी। इनमें पुलिस के वाहन मुख्य रूप में शामिल रहे। खास बात यह रही कि इस टार्गेटेड हमले में मुस्लिम समुदाय के वाहनों को नुकसान नहीं पहुंचाया गया। इसके बाद पुलिस ने भी अपनी जवाबी कार्रवाई शुरू की। पहले आंसू गैस के गोले दागे गए। मगर इससे कुछ देर ही शांति रह सकी। गलियों से निकल कर आए शहर भर के मुस्लिमों सहित आसपास के घरों तक से फिर जोरदार पत्थरबाजी करनी शुरू कर दी। बड़ी बात यह है कि इससे पहले उपद्रवियों ने आसपास की दुकानों के बाहर लगे सीसीटीवी कैमरों को तोड़ा, ताकि उनकी पहचान नहीं हो पाए। इन्होंने अपने मुंह को ढक रखा था। ऐसे में पुलिसकर्मियों को भाग कर अपनी जान बचानी पड़ी। इतने पत्थर फेंके कि सड़क पूरी तरह पत्थरों से ढक गई।
फिर पुलिसकर्मियों ने जवाबी कार्रवाई शुरू की। जो पत्थर इन पर फेंके गए थे, उन्हीं को उठा कर उपद्रवियों पर फेंकना शुरू किया। मगर बात नहीं बनी। ऐसे में अपनी जान संकट में देख लाठीचार्ज के साथ आंसू गैस के गोले और रबर बुलेट छोड़ी। इस हिंसा में चार उपद्रवियों नोमान, बिलाल, नईम और मोहम्मद कैफ की मौत हो गई। मुस्लिम पक्ष का दावा है कि इनकी मौत पुलिस की गोलियों से हुई, जबकि पुलिस का कहना है कि उसकी ओर से गोलीबारी की ही नहीं गई थी। पोस्टमार्टम रिपोर्ट से ही साबित हो पाएगा कि इनकी मौत का कारण क्या रहा। अब संभल में शांति, मगर भारी तनाव के हालात हैं। 24 घंटे के लिए इंटरनेट बंद कर दिया गया है।
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छतों से महिलाएं भी कर रहीं थी पत्थरबाजी
पुलिस अधिकारियों ने बताया कि इस मामले में दो महिलाओं सहित 21 लोगों को हिरासत में लिया गया है। वीडियो से आरोपियों की पहचान की जा रही है। महिलाएं छतों पर से पत्थरबाजी करने वालों में शामिल थीं। सब इंस्पेक्टर विकास निर्वाल ने बताया कि कि सुबह पहले आगे की तरफ तो करीब 300 लोगों की भीड़ थी, मगर उनके पीछे काफी लोग थे। इनकी कुल संख्या डेढ़ से दो हजार के बीच थी। इन लोगों ने पुलिस को टारगेट किया। इससे उनके पैर में भी चोट आई है।
ऐसे चला घटनाक्रम
घटनाक्रम के अनुसार सुबह साढ़े सात बजे सर्वे टीम अदालत के आदेश पर जामा मस्जिद में पहुंची थी। इसके करीब 1 घंटे तक तो शांति रही, मगर फिर वहां भारी भीड़ जमा होने लगी। इस पर डीएम और एसपी उन्हें समझाने गए मगर भीड़ ने उनकी बात सुनने की बजाय नारेबाजी करनी शुरू कर दी। इसी के साथ पत्थरबाजी भी शुरू हो गई। इस पर पुलिस को आंसू गैस के गोले दागने पड़े। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने आगजनी भी शुरू कर दी।
एनएसए के तहत होगी कार्रवाई
एसपी कृष्ण कुमार ने कहा, 'पत्थरबाजों ने पुलिस की गाड़ियों में आग लगाने के साथ उन्हें निशाना बनाने की भी कोशिश की। उनके खिलाफ एनएसए के तहत कार्रवाई की जाएगी। ड्रोन से वीडियोग्राफी की गई है। सीसीटीवी कैमरों की मदद से इन सभी लोगों की पहचान की जाएगी और उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
इधर, मुरादाबाद के डीआईजी मुनिराज के साथ बरेली जोन के एडीजी रमित शर्मा को भी सरकार ने मौके पर भेज दिया था। इसके अलावा पीएसी की तीन कम्पनियों की भी इलाके में तैनाती कर दी गई थी।
सर्वे हो गया है पूरा
यहां खास बात यह भी है कि शनिवार सुबह साढ़े सात बजे से लेकर दस बजे तक मस्जिद में हुए सर्वे के बाद एडवोकेट कमिश्नर का काम पूरा हो गया है। पूरे सर्वे की वीडियोग्राफी और फोटोग्राफी कराई गई है। एडवोकेट कमिश्नर को अदालत में यह रिपोर्ट 29 नवम्बर को सौंपनी है।
मंदिर तोड़कर मस्जिद बनाने का दावा

जो रिपोर्ट एडवोकेट कमिश्नर अदालत में देंगे, उसमें बताया जाएगा कि सर्वे के दौरान वहां क्या-क्या मिला। यह विवाद दरअसल इसलिए हो रहा है क्योंकि हिन्दू पक्ष ने दावा किया है कि इस मुगलकालीन मस्जिद को एक प्राचीन हिन्दू मंदिर के स्थल पर बनाया गया है। इस दावे के बाद ही अदालत के आदेश पर पांच दिन में दूसरी बार वरिष्ठ वकील विष्णु शंकर जैन की अगुवाई में टीम सर्वे करने के लिए जामा मस्जिद के अंदर गई थी।
पूर्व सीएम अखिलेश का ऐतराज, पूछा दोबारा सर्वे क्यों ?
वहीं सर्वे को लेकर बवाल बढ़ने के बाद पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने नाराजगी जताते हुए कहा, ‘जब सर्वे हो चुका था तो दोबारा क्यों कराया, वो भी सुबह-सुबह, कोई दूसरे पक्ष को सुनने वाला नहीं है। यह इसलिए किया गया है, ताकि चुनाव को छोड़कर किस बात पर चर्चा हो यह वो (बीजेपी) तय कर सकें।
पूर्व सीएम अखिलेश ने कहा, ‘संभल में जो हुआ है, वह बीजेपी और प्रशासन ने मिलकर किया है, जिससे चुनाव की बेईमानी पर चर्चा न हो सके। सच्ची जीत लोक से होती है तंत्र से नहीं। यहां लोगों को वोट नहीं डालने दे रहे हैं और तंत्र को आगे कर रहे हैं।’
