April 22, 2026

News Chakra India

Never Compromise

सोनम वांगचुक को लेह पुलिस ने किया गिरफ्तार, लद्दाख में हिंसा के बाद पुलिस का बड़ा एक्शन, 4 लोगों की मौत और करोड़ों की सम्पत्ति का हुआ था नुकसान

सोनम वांगचुक को लेह पुलिस ने किया गिरफ्तार, लद्दाख में हिंसा के बाद पुलिस का बड़ा एक्शन, 4 लोगों की मौत और करोड़ों की सम्पत्ति का हुआ था नुकसान

लेह पुलिस ने सोनम वांगचुक को गिरफ्तार कर लिया और उन्हें अज्ञात स्थान पर ले गई। वांगचुक पर ‘भड़काऊ बयान’ देने के आरोप लगे हैं, जिसके बाद लद्दाख में हिंसा भड़क गई थी।

एनसीआई@नई दिल्ली/सेन्ट्रल डेस्क

लद्दाख के सामाजिक और पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। लद्दाख में हाल ही में हुई हिंसा के बाद पुलिस ने बड़ा एक्शन लिया है। वांगचुक को राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत गिरफ्तार किया गया है, लेकिन अभी तक जेल नहीं भेजा गया है। सोनम वांगचुक भड़ाकऊ बयान देकर भीड़ को उकसाने का आरोप लगा है। अधिकारियों के मुताबिक, वांगचुक की अगुवाई में लद्दाख राज्य का आंदोलन बुधवार को लेह में हिंसा, आगजनी और हिंसा में बदल गया, जिसमें चार लोगों की मौत हो गई और 40 पुलिसकर्मियों सहित कम से कम 80 लोग घायल हो गए। इस मामले में कमसे कम 50 संदिग्धों को हिरासत में लिया गया है।

पुलिस का आरोप है कि वांगचुक ने लद्दाख को छठी अनुसूची में शामिल करने और पूर्ण राज्य का दर्जा देने की मांग को लेकर अपनी भूख हड़ताल के दौरान दिए बयानों से भीड़ को भड़काया। उन्हें डीजीपी एसडी सिंह जामवाल के नेतृत्व वाली पुलिस टीम ने हिरासत में लिया।

मुझे ‘बलि का बकरा’ बनाने की रणनीति – सोनम वांगचुक

हालांकि, सोनम वांगचुक ने सरकार के आरोपों को खारिज किया है। उन्होंने लद्दाख में हाल ही में हुए हिंसक विरोध प्रदर्शनों के लिए गृह मंत्रालय द्वारा उन्हें जिम्मेदार ठहराए जाने को ‘बलि का बकरा’ बनाने की रणनीति बताते हुए कहा कि इसका उद्देश्य हिमालयी क्षेत्र की मूल समस्याओं से निपटने से बचना है। उन्होंने बताया, “ये कहना कि यह (हिंसा) मेरे या कांग्रेस द्वारा भड़काई गई थी, समस्या के मूल से निपटने के बजाय बलि का बकरा ढूंढ़ने जैसा है, और इससे कोई हल नहीं निकलेगा।”

सोनम वांगचुक के NGO का FCRA लाइसेंस रद्द

इससे पहले केंद्र सरकार ने सोनम वांगचुक के नेतृत्व वाली संस्था स्टूडेंट्स एजुकेशनल एंड कल्चरल मूवमेंट ऑफ लद्दाख (SECMOL) का विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम (Foreign Contribution Regulation Act – FCRA) लाइसेंस रद्द कर दिया है। सरकार के आदेश के अनुसार, संस्था अब विदेश से चंदा या किसी भी तरह की आर्थिक सहायता प्राप्त नहीं कर सकेगी।

उल्लेखनीय है कि स्टूडेंट्स एजुकेशनल एंड कल्चरल मूवमेंट ऑफ लद्दाख की स्थापना 1988 में सोनम वांगचुक ने की थी। यह संस्था लद्दाख में शिक्षा सुधार, पर्यावरण संरक्षण और सांस्कृतिक गतिविधियों के लिए काम करती रही है। सरकार के इस कदम के बाद लद्दाख में राजनीतिक और सामाजिक हलचल तेज हो गई है। सोनम वांगचुक पहले से ही लद्दाख की पर्यावरणीय और संवैधानिक मांगों को लेकर चर्चा में बने हुए हैं।

धारा 144 लागू, इंटरनेट बंद

इधर, लेह के अलावा कारगिल सहित अन्य शहरों में भी धारा 144 लागू कर दी गई है। इंटरनेट बंद कर दिया गया है। उपराज्यपाल कविंद्र गुप्ता ने हाईलेवल सुरक्षा बैठक की और हिंसा की घटनाओं को षड्यंत्र का नतीजा बताते हुए सतर्कता बढ़ाने के निर्देश दिए।

लेह हिंसा के बाद गृह मंत्रालय ने सोनम वांगचुक पर आरोप लगाया कि उनके भड़काऊ बयानों ने भीड़ को उकसाया, जिसके चलते प्रदर्शन हिंसक हो गए। मंत्रालय के मुताबिक वांगचुक ने अरब स्प्रिंग और नेपाल के Gen-Z आंदोलनों का हवाला देकर युवाओं को भड़काया, जिसके बाद लेह में बीजेपी कार्यालय और कुछ सरकारी गाड़ियों में आग लगा दी गई। गृह मंत्रालय ने कहा कि 24 सितम्बर को सुबह 11.30 बजे वांगचुक के भाषण के बाद भीड़ उनके भूख हड़ताल स्थल से निकलकर बीजेपी ऑफिस और लेह के सीईसी दफ्तर पर हमला करने पहुंच गई।

भूख हड़ताल और मांगें

सोनम वांगचुक ने 10 सितम्बर से भूख हड़ताल शुरू की थी, उनकी मांग थी कि लद्दाख के लिए संवैधानिक गारंटी, अधिक स्वायत्तता, राज्य का दर्जा और छठी अनुसूची का दर्जा दिया जाए। बुधवार को हिंसा बढ़ने के बाद उन्होंने अपना 2 हफ्ते का अनशन खत्म कर दिया था।

मीटिंग्स का दौर जारी

सरकार ने कहा कि लद्दाख में लेह एपेक्स बॉडी और कारगिल डेमोक्रेटिक अलायंस जैसे क्षेत्रीय संगठनों से उच्चस्तरीय समिति (HPC), उपसमितियों और अनौपचारिक बैठकों के जरिए बातचीत चल रही है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You may have missed

Copyright © All rights reserved. | Newsphere by AF themes.