कांग्रेस का प्रधानमंत्री के खिलाफ विशेषाधिकार हनन का नोटिस, आरोप-राष्ट्र के नाम सम्बोधन में विपक्षी सांसदों के वोट पर सवाल उठाए, कार्यवाही की मांग
एनसीआई@नई दिल्ली
कांग्रेस ने पीएम नरेन्द्र मोदी के खिलाफ लोकसभा में विशेषाधिकार हनन का नोटिस दिया है। पार्टी महासचिव केसी वेणुगोपाल ने मंगलवार को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र लिखकर कहा कि पीएम ने ‘राष्ट्र के नाम सम्बोधन’ में विपक्षी सांसदों के वोट और उनके इरादों पर सवाल उठाए थे। यह नियमों के खिलाफ है।
वेणुगोपाल ने लिखा कि पीएम ने करीब 29 मिनट के सम्बोधन में विपक्षी दलों पर महिला आरक्षण बिल रोकने का आरोप लगाया। सांसदों के वोटिंग पेटर्न पर सवाल उठाए। उनके फैसलों के पीछे की मंशा पर भी टिप्पणी की।
कांग्रेस सांसद ने मांग की है कि इस मामले को लोकसभा की विशेषाधिकार समिति को भेजा जाए और प्रधानमंत्री के खिलाफ कार्रवाई शुरू की जाए।
स्पीकर को लिखे पत्र की मुख्य बातें-
• इस तरह के बयान चुने हुए सांसदों की स्वतंत्रता और उनकी ईमानदारी पर सवाल खड़े करते हैं। इससे सांसद की गरिमा और अधिकार कमजोर होते हैं।
• संविधान सांसदों को स्वतंत्र रूप से काम करने का अधिकार देता है। कोई भी व्यक्ति यहां तक कि प्रधानमंत्री भी, उनके वोट या आचरण पर सवाल नहीं उठा सकता।
• किसी सांसद ने संसद में क्या कहा या कैसे वोट किया, उसके पीछे कारण बताना गलत है। ये सदन के विशेषाधिकार का गंभीर उल्लंघन और अवमानना है।
• यह विधेयक महिला आरक्षण के नाम पर लाया गया था, लेकिन इसके जरिए परिसीमन से जुड़े प्रावधानों में बदलाव की कोशिश थी। विपक्ष इसी का विरोध कर रहा था।
जयराम रमेश बोले- पीएम ने कांग्रेस पर 59 बार टारगेट किया
कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने कहा कि प्रधानमंत्री का राष्ट्र के नाम सम्बोधन आमतौर पर देश को जोड़ने और भरोसा बढ़ाने के लिए होता है। इस बार सम्बोधन में खुलकर राजनीतिक बात हुई। कांग्रेस पर 59 बार निशाना साधा गया। इसे प्रधानमंत्री के रिकॉर्ड पर एक और दाग माना जाएगा।
मोदी ने कहा था-विपक्ष ने आधी आबादी का अधिकार छीना, उन्हें इस पाप की सजा मिलेगी
पीएम नरेन्द्र मोदी ने 18 अप्रेल को देश को सम्बोधित किया था। उन्होंने कहा था कि कांग्रेस, टीएमसी, डीएमके जैसे विपक्षी दल इस भ्रूण हत्या के गुनहगार हैं। ये देश के संविधान के अपराधी हैं। नारी शक्ति के अपराधी हैं। जिन लोगों ने आधी आबादी का अधिकार छीना, उन्हें इस पाप की सजा मिलेगी।
दरअसल, लोकसभा में 17 अप्रेल को महिला आरक्षण से जुड़ा संविधान (131वां संशोधन) बिल पास नहीं हो सका था। बिल में लोकसभा सीटें 543 से बढ़ाकर 816 करने का प्रस्ताव था। बिल के पक्ष में 298 और विरोध में 230 वोट पड़े, जबकि इसे पास करने के लिए 352 वोटों की जरूरत थी।
यह है विशेषाधिकार हनन?
संसद के सांसदों और समितियों को कुछ खास अधिकार दिए जाते हैं, ताकि वे बिना दबाव के अपना काम कर सकें। अगर कोई सांसद या कोई बाहरी व्यक्ति इन अधिकारों में दखल देता है या उन्हें नुकसान पहुंचाता है तो इसे विशेषाधिकार हनन माना जाता है। ऐसे मामले में कोई भी सांसद सदन में प्रस्ताव ला सकता है और कार्यवाही की मांग कर सकता है।
