एनसीआई@बीकानेर
माध्यमिक शिक्षा निदेशक ललित कुमार ने स्कूल परिसरों में बाहरी व्यक्तियों के प्रवेश, फोटो-वीडियोग्राफी, इंटरव्यू, ऑडियो रिकॉर्डिंग और लाइव स्ट्रीमिंग के सम्बंध में कड़े नियम तय कर दिए हैं। विभाग ने सभी सम्बंधित अधिकारियों को इन निर्देशों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।
शिक्षा विभाग ने ‘In Loco Parentis’ यानी अभिभावक के समान दायित्व के सिद्धांत का हवाला देते हुए आदेश में कहा है कि सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों की सुरक्षा, गरिमा, निजता और कल्याण की विशेष जिम्मेदारी स्कूल प्रशासन की है। माध्यमिक शिक्षा निदेशक ने संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत बच्चों के जीवन, गरिमा, निजता के अधिकार और सुप्रीम कोर्ट के निजता सम्बंधी निर्णय का भी उल्लेख किया गया है।
इससे साफ है कि राज्य के सरकारी स्कूलों में मीडिया को भी अब प्रिंसिपल की अनुमति के बाद ही प्रवेश मिल सकेगा। साथ ही विद्यार्थियों की फोटोग्राफी, वीडियोग्राफी, इंटरव्यू, ऑडियो रिकॉर्डिंग और लाइव स्ट्रीमिंग भी बिना अनुमति नहीं की जा सकेगी। आगंतुक को रजिस्टर में एंट्री करना भी अनिवार्य होगा।

यह कहा गया है आदेश में-
1. हर आगंतुक को करनी होगी रजिस्टर में एंट्री
स्कूल में आने वाले प्रत्येक व्यक्ति को प्रवेश से पहले विजिटर रजिस्टर में एंट्री करनी होगी। बाहरी व्यक्ति प्रिंसिपल, शिक्षक या अधिकृत स्कूल अधिकारी के साथ के बिना कक्षा-कक्ष, प्रयोगशाला, पुस्तकालय, छात्रावास, खेल मैदान, शौचालय अथवा स्टूडेंट्स की गतिविधियों वाले क्षेत्र में प्रवेश नहीं कर सकेगा।
2. फोटो-वीडियो और लाइव स्ट्रीमिंग पर भी रोक
प्रिंसिपल की पूर्व लिखित अनुमति के बिना विद्यार्थियों, शिक्षकों या स्कूल की गतिविधियों की फोटोग्राफी, वीडियोग्राफी, साक्षात्कार, ऑडियो रिकॉर्डिंग या लाइव स्ट्रीमिंग नहीं की जा सकेगी। स्टूडेंट्स की फोटो, वीडियो अथवा व्यक्तिगत जानकारी का ऐसा संग्रह या प्रसार भी प्रतिबंधित रहेगा, जिससे उनकी निजता, गरिमा या सुरक्षा प्रभावित हो।
3. नियम तोड़ने पर इन कानूनों के तहत कार्रवाई
आदेश में कहा गया है कि यदि कोई व्यक्ति बिना अनुमति स्कूल में प्रवेश करता है। परिसर छोड़ने से इनकार करता है, अनधिकृत फोटो-वीडियोग्राफी का प्रयास करता है या स्कूल के कामकाज में बाधा डालता है तो प्रधानाचार्य तत्काल स्थानीय पुलिस और जिला शिक्षा अधिकारी को सूचना देंगे।
मामले की परिस्थितियों के अनुसार भारतीय न्याय संहिता, 2023 (BNS), लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम, 2012 (POCSO), किशोर न्याय (बालकों की देखरेख एवं संरक्षण) अधिनियम, 2015 तथा सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 सहित अन्य लागू कानूनों के तहत कार्रवाई शुरू की जा सकती है।
4. सुरक्षा को खतरा होने पर प्रवेश से इनकार
प्रिंसिपल ऐसे किसी आगंतुक को एंट्री से मना कर सकते हैं, जिसकी मौजूदगी से स्कूल की सुरक्षा, स्टूडेंट्स की निजता, अनुशासन या शैक्षणिक वातावरण प्रभावित होने की आशंका हो। जरूरत पड़ने पर स्थानीय पुलिस की सहायता से बाहरी व्यक्ति को स्कूल परिसर से बाहर भी कराया जा सकता है।
शिक्षा विभाग ने सभी पर्यवेक्षण अधिकारियों और संस्था प्रधानों को निर्देशों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने को कहा है। विभाग ने स्टूडेंट्स की सुरक्षा और निजता को सर्वोच्च प्राथमिकता देने तथा जारी निर्देशों का सख्ती से पालन कराने के निर्देश दिए हैं।
