राजस्थान में मानसिक तनाव और 24 घंटे की अनिश्चित ड्यूटी से परेशान होकर 24 पुलिस कांस्टेबलों ने नौकरी छोड़कर स्वास्थ्य विभाग में चपरासी का पद चुना है। 7 वें वेतन आयोग के तहत दोनों नौकरियों के वेतन में महज 700 रुपए का अंतर है, लेकिन चपरासी की नौकरी में 8 घंटे की तय ड्यूटी, होम डिस्ट्रिक्ट पोस्टिंग और छुट्टियां मिलती हैं। पुलिसकर्मियों के अलावा रेलवे ग्रुप-डी, बीएसएफ और आयकर विभाग के कर्मचारियों ने भी इस भर्ती में चयन पाया है। पुलिस महकमे ने अभी तक इनके इस्तीफे स्वीकार नहीं किए हैं।
एनसीआई@जयपुर
राजस्थान में पुलिस की वर्दी पहनकर चौबीसों घंटे की ड्यूटी का तनाव झेलने से बेहतर अब जवान चतुर्थ श्रेणी यानी चपरासी की नौकरी को मान रहे हैं। पुलिस विभाग में लगातार बढ़ते काम के दबाव, अनिश्चित कार्य घंटों और पारिवारिक जीवन में आ रहे तनाव के कारण कई पुलिसकर्मियों ने यह कड़ा कदम उठाया है। स्वास्थ्य विभाग में हाल ही में आयोजित हुई चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी भर्ती के नतीजों ने हर किसी को हैरान कर दिया है। इस भर्ती परीक्षा में चयन पाने वाले अभ्यर्थियों में 24 ऐसे अभ्यर्थी शामिल हैं, जो वर्तमान में पुलिस में कांस्टेबल के पद पर कार्यरत हैं। इन जवानों ने खाकी वर्दी छोड़कर स्वास्थ्य विभाग में चपरासी का पद चुनने के लिए अपना इस्तीफा सौंप दिया है।
विशेषज्ञों और चयनित अभ्यर्थियों के अनुसार 7वें वेतन आयोग की सिफारिशों के लागू होने के बाद पुलिस कांस्टेबल और स्वास्थ्य विभाग के चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी के वेतन में कोई बड़ा अंतर नहीं रह गया है।
दोनों पदों के पे-ग्रेड में मात्र 700 रुपए का मामूली फर्क है। ऐसे में पुलिसकर्मी थोड़े से पैसों के अंतर के मुकाबले मानसिक शांति और नियमित जीवनशैली को प्राथमिकता दे रहे हैं। चपरासी की नौकरी में जहां रोजाना 8 घंटे की तय ड्यूटी होती है, वहीं त्योहारों और छुट्टियों के दिन भी परिवार के साथ बिताने का समय मिल जाता है। इसके विपरीत पुलिस सेवा में 16 से 24 घंटे तक अलर्ट मोड पर रहना पड़ता है।
ड्यूटी का कोई निश्चित समय तय नहीं होता। होली, दिवाली जैसे बड़े त्योहारों पर भी छुट्टियां न मिलना और गृह जिले से दूर थानों में पदस्थापन रहने से पुलिसकर्मियों का पारिवारिक जीवन बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। इसके अलावा लम्बे समय तक लगातार काम करने से जवान डिप्रेशन, बीपी और अन्य मानसिक बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं। इसी कारण अब युवा सिपाही इस उच्च तनाव वाली नौकरी को छोड़कर सीमित जिम्मेदारी वाली नौकरी अपना रहे हैं।
इस्तीफे अटके, जॉइनिंग के लिए मिला 23 नवम्बर तक का समय
चपरासी पद पर चयन के बाद कई सिपाहियों ने पुलिस महकमे में अपना त्यागपत्र सौंप दिया है, लेकिन पुलिस विभाग की ओर से प्रशासनिक औपचारिकताओं और तकनीकी कारणों से अभी तक इनका इस्तीफा स्वीकार नहीं किया गया है। स्थिति को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने इन अभ्यर्थियों को कार्यग्रहण (जॉइनिंग) करने के लिए 23 नवम्बर तक का अतिरिक्त समय प्रदान किया है। पुलिस विभाग में वरिष्ठ अधिकारियों के बीच इस बात को लेकर गहरी चिंता जताई जा रही है कि क्यों उनके जवान खाकी का मोह छोड़कर चतुर्थ श्रेणी पदों की ओर रुख कर रहे हैं।
