एक मामले में प्रसवोत्तर अत्यधिक रक्तस्राव (PPH) और दूसरे में प्रसव के बाद सांस लेने में तकलीफ की स्थिति सामने आई, दोनों की जांच कर दो दिन में रिपोर्ट देने के निर्देश
एनसीआई@बूंदी/कोटा
बूंदी में सिजेरियन प्रसव के बाद दो प्रसूताओं की मृत्यु के प्रकरणों को राज्य सरकार ने गम्भीरता से लेते हुए दोनों मामलों की विस्तृत जांच के लिए राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय, कोटा के स्तर पर चार सदस्यीय जांच समिति का गठन किया है। समिति को दोनों प्रकरणों की जांच कर दो दिन में रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।
पीएमओ डॉ. लक्ष्मीनारायण मीना ने बताया कि उपलब्ध चिकित्सकीय रिकॉर्ड के अनुसार, एक प्रकरण में प्रसव के बाद अत्यधिक रक्तस्राव (Postpartum Haemorrhage—PPH) की स्थिति सामने आई। रक्तस्राव को नियंत्रित करने के लिए बैलून टैम्पोनाड, दवाइयों एवं रक्त आधान सहित आवश्यक उपचार किया गया। स्थिति नियंत्रित नहीं होने तथा उच्च स्तरीय उपचार की आवश्यकता को देखते हुए प्रसूता को उच्च चिकित्सा संस्थान रेफर किया गया।
पीएमओ डॉ. मीना ने बताया कि दूसरे प्रकरण में सिजेरियन प्रसव के बाद प्रसूता को सांस लेने में तकलीफ की स्थिति सामने आई। चिकित्सकीय परीक्षण एवं आवश्यक उपचार के बाद स्थिति को देखते हुए उन्हें उच्च चिकित्सा संस्थान रेफर किया गया। रेफरल के बाद 17 सितम्बर 2026 को कोटा में प्रसूता की मृत्यु होने का उल्लेख रिकॉर्ड में है। दोनों मामलों में मृत्यु के अंतिम चिकित्सकीय कारणों का निर्धारण जांच समिति की रिपोर्ट के आधार पर किया जाएगा।
वर्षा सेन के मामले में चार एएनसी जांचें
पीएमओ मीना ने बताया कि सिलोर, बूंदी निवासी वर्षा सेन की गर्भावस्था के दौरान उपस्वास्थ्य केन्द्र सिलोर पर नियमित एएनसी जांचें की गई थीं। उपलब्ध रिकॉर्ड के अनुसार उनकी चार एएनसी जांचें 19 फरवरी, 16 अप्रेल, 25 जून एवं 20 अगस्त 2026 को हुई थीं।
प्रारंभिक रिपोर्ट के अनुसार 15 सितम्बर 2026 को सामान्य चिकित्सालय, बूंदी में प्रसूता को भर्ती किया गया। चिकित्सकीय रिपोर्ट के अनुसार उनकी गर्भावस्था करीब 8½ माह की थी तथा बच्चे की स्थिति ट्रांसवर्स होने के कारण सिजेरियन प्रसव का निर्णय लिया गया। सिजेरियन के बाद प्रसूता ने करीब 2.800 किलोग्राम वजन की बच्ची को जन्म दिया तथा उन्हें पोस्ट ऑपरेटिव वार्ड में शिफ्ट किया गया।
प्रारम्भिक रिपोर्ट के अनुसार ऑपरेशन के बाद प्रसूता की स्थिति की निगरानी की गई। बाद में उनकी स्थिति में जटिलता उत्पन्न होने पर ऑन-ड्यूटी चिकित्सक द्वारा परीक्षण एवं आवश्यक उपचार किया गया। स्थिति को देखते हुए उन्हें उच्च चिकित्सा संस्थान के लिए रेफर किया गया। रेफरल के बाद 17 सितम्बर 2026 को कोटा में प्रसूता की मृत्यु होने का उल्लेख रिकॉर्ड में है।
दूसरे प्रकरण में प्रसवोत्तर रक्तस्राव के बाद रेफरल
पीएमओ ने बताया कि दूसरे प्रकरण में प्रसूता को 16 सितम्बर 2026 को सामान्य चिकित्सालय बूंदी में भर्ती किया गया था। प्रसव के बाद करीब 12.12 बजे उन्होंने 2.280 किलोग्राम वजन के बच्चे को जन्म दिया। बाद में करीब 3:40 बजे प्रसूता में वेजाइनल ब्लीडिंग की स्थिति सामने आई। ऑन-ड्यूटी चिकित्सक द्वारा तत्काल उपचार शुरू किया गया तथा पीपीएच के प्रबंधन के लिए बैलून टेम्पोनाड, दवाइयां एवं रक्त आधान किया गया।
इसके बावजूद रक्तस्राव नियंत्रित नहीं होने तथा एचडीयू/आईसीयू की उपलब्धता नहीं होने के कारण प्रसूता को बेहतर उपचार के लिए उच्च चिकित्सा संस्थान रेफर किया गया। रेफरल से पूर्व एक यूनिट रक्त चढ़ाया गया ।
यह चार सदस्यीय समिति करेगी दोनों प्रकरणों की जांच
राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय, कोटा के प्रधानाचार्य एवं नियंत्रक द्वारा गठित जांच समिति में—
• डॉ. ऊषा दडिया, आचार्य, निश्चेतन विभाग — संयोजक
• डॉ. पंकज जैन, आचार्य, मेडिसिन विभाग — सदस्य
• डॉ. राहुल अग्रवाल, सह-आचार्य, माइक्रोबायोलॉजी विभाग — सदस्य
• डॉ. आशिमा विजय, सह-आचार्य, प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग — सदस्य, को शामिल किया गया है।
समिति दोनों प्रकरणों से सम्बंधित चिकित्सकीय रिकॉर्ड, ऑपरेशन, उपचार, प्रसवोत्तर प्रबंधन एवं रेफरल प्रक्रिया की जांच कर दो दिन में अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करेगी। आगे की कार्यवाही जांच रिपोर्ट के आधार पर की जाएगी।
