एनसीआई@नई दिल्ली
विदेश मंत्री एस जयशंकर ने पश्चिमी देशों की आलोचना के बीच रूस के साथ भारत के रिश्तों की मजबूती को साफ करते हुए कहा कि जब-जब नई दिल्ली की सुरक्षा और क्षेत्रीय अखंडता खतरे में आई है, तब मॉस्को उसके साथ खड़ा रहा है। मॉस्को के साथ भारत के रिश्तों पर पश्चिमी देशों के सवालों का जवाब देते हुए जयशंकर ने कहा कि हर देश अपने अनुभव से रिश्तों को आंकता है।
नई दिल्ली में म्यूनिख सिक्योरिटी कॉन्फ्रेंस में बोलते हुए, जयशंकर ने कहा कि दोनों देशों के बीच ऐतिहासिक रूप से अच्छे रिश्ते रहे हैं, और यह अनुभव उनके रिश्तों को आकार देता रहता है। यहां विदेश मंत्री ने साफ कहा कि, “लोग अच्छा इतिहास या बुरा इतिहास नहीं भूलते।” उन्होंने रूस और सोवियत संघ के सपोर्ट को याद किया, खासकर 1950 के दशक से, जब दुनिया के ज़्यादातर देशों ने पाकिस्तान के सैन्य शासन का साथ दिया था।
इस टिप्पणी में पाकिस्तान के साथ 1971 के युद्ध के दौरान भारत को सोवियत के सपोर्ट का ज़िक्र था, जब वाशिंगटन ने इस्लामाबाद के सपोर्ट में बंगाल की खाड़ी में एक नेवल टास्क फोर्स भेजी थी।
रूस के साथ भारत का अपना अनुभव
मॉस्को के साथ भारत के रिश्तों पर पश्चिमी देशों के सवालों के जवाब में, जयशंकर ने कहा कि हर देश अपने अनुभव से रिश्तों को आंकता है।
जैसे यूरोप से रूस के बारे में भारत का नज़रिया अपनाने की उम्मीद नहीं की जा सकती, वैसे ही उन्होंने कहा कि नई दिल्ली का चुनाव मॉस्को के साथ उसके अपने इतिहास को दिखाता है।
जयशंकर ने कहा, “भारत का अनुभव पॉज़िटिव रहा है और लगातार पॉज़िटिव रहा है।”
जयशंकर ने कहा कि 1970 और 1980 के दशक से यह पार्टनरशिप बढ़ी है, जिसमें मिलिट्री और न्यूक्लियर सहयोग के साथ-साथ ट्रेड, एनर्जी और रिसोर्स की भूमिका बढ़ रही है।
भारत ने रूस से तेल खरीदने का बचाव किया
उनकी यह टिप्पणी अमेरिका और यूरोप की ओर से रूस के साथ भारत के लगातार जुड़ाव, खासकर यूक्रेन युद्ध के दौरान तेल खरीदने की आलोचना के बीच आई है।
विदेश मंत्रालय ने इस आलोचना को ‘गलत और बेबुनियाद’ बताया है और कहा कि वॉशिंगटन ने शुरू में भारत को ग्लोबल मार्केट को स्थिर करने के लिए रूस से तेल खरीदने के लिए बढ़ावा दिया था। जयशंकर की टिप्पणी उस दिन आई जब उन्होंने रूस के साथ व्यापार, निवेश और ऊर्जा सहयोग का विस्तार करने की योजनाओं पर एक संसदीय सलाहकार समिति को जानकारी दी। उन्होंने पैनल को बताया कि भारत की प्राथमिकता उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा करना है। बैठक में शामिल रहे सूत्रों के अनुसार, जयशंकर ने कहा कि “हमारा दृष्टिकोण आपूर्ति के कई स्रोतों को बनाए रखना है।”
यूक्रेन युद्ध को समाप्त करने के लिए वार्ता
यूक्रेन पर बोलते हुए जयशंकर ने बातचीत, कूटनीति और वार्ता के माध्यम से युद्ध को समाप्त करने के लिए भारत के आह्वान को दोहराया। उन्होंने कहा कि नई दिल्ली हाल के महीनों में शांति की वकालत करने से आगे बढ़ गई है और रूस और यूक्रेन दोनों के साथ बातचीत की है। इनमें ब्लेक सी शिपिंग, अनाज आयात, ऊर्जा निर्यात और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे पर हमले शामिल हैं। इस मसले पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बार-बार भारत का पक्ष रखा है। वर्ष 2022 में ही उन्होंने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से कहा था कि “आज का दौर युद्ध का दौर नहीं है”।
समिति की बैठक में जयशंकर ने पुतिन को दिए गए पीएम मोदी के हालिया संदेश का भी ज़िक्र किया कि “अब अंतहीन युद्ध की जगह , युद्ध के अंत को लेनी चाहिए”।
