एनसीआई@जयपुर
अगर सब कुछ सरकार की योजनानुसार सही रहा तो जल्दी ही किसानों को बड़ी राहत मिलने जा रही है। दरअसल, राजस्थान में किसानों को खाद के लिए लम्बी कतारों में नहीं लगना पड़ेगा। वह ऐसे कि कृषि विभाग 15 अगस्त के बाद प्रदेशभर में यूरिया-डीएपी की ऑनलाइन बुकिंग सुविधा लागू करने जा रहा है। इसके बाद अगले चरण में खाद की होम डिलीवरी की भी तैयारी है।
किसान घर बैठे ही एफएफएस एप (फ्रेमवर्क फॉर फर्टिलाइजर सेल) डाउनलोड कर खाद की बुकिंग कर सकेंगे। खाद कहां मिलेगी, उस वितरण केन्द्र की जानकारी भी किसानों को एप से मिलेगी। जिन किसानों को एप चलाना नहीं आता, वे ई-मित्र के जरिए भी बुकिंग करा सकेंगे। खास बात यह है कि डीलर-वितरक स्टॉक नहीं होने का बहाना नहीं बना सकेंगे, क्योंकि स्टॉक की पूरी जानकारी विभाग के पास रहेगी।
कृषि आयुक्त गोयल ने दी पूरी जानकारी
कृषि आयुक्त नरेश कुमार गोयल इस योजना के बारे में जानकारी देते हुए बताते हैं कि भारत सरकार का एफएफएस एप है। किसान इस मोबाइल एप को डाउनलोड करने के बाद आसान तरीके से खाद की बुकिंग कर सकते हैं।
गोयल कहते हैं, इसके लिए एप में जाकर अपना राज्य, जिला और गांव चुनना होगा। इसके बाद आधार या फार्मर आईडी से अपनी पहचान वेरिफाई करनी होगी। इससे किसान की जमीन का रकबा और अन्य जानकारी सामने आ जाएगी। किसान ने जो फसल बोई है, उसका चयन करना होगा। उस फसल और रकबे से ही तय होगा कि कितने कट्टे खाद की जरूरत है। फिर नजदीकी वितरण केन्द्र की लिस्ट दिखेगी, जहां खाद उपलब्ध है, उसका चुनाव करना होगा। अब बुकिंग आईडी के साथ एक क्यूआर कोड जेनरेट होगा। इसी को ई-टोकन कहा जाता है। किसान इस टोकन के साथ एप पर चुने गए सरकारी सहकारी केंद्र या निजी रिटेलर से खाद ले सकेगा। जिन किसानों को एप नहीं चलाना आता वे ई-मित्र पर जाकर भी बुकिंग करा सकेंगे। बस वहां फार्मर आईडी बतानी होगी।
किसान अपनी सुविधानुसार चुन सकेंगे सेंटर
कृषि आयुक्त गोयल ने बताया कि एप में किसान को आसपास के सरकारी और निजी खाद विक्रेताओं की लोकेशन और जानकारी मिलेगी। किसान अपनी सुविधा के अनुसार सेंटर चुनकर वहां ई-टोकन दिखाकर खाद ले सकेगा। इसके लिए किसान की फार्मर आईडी का इस्तेमाल होगा। प्रदेश में अब तक करीब 88 लाख किसानों की फार्मर आईडी बन चुकी है। इसमें किसान की जमीन, रकबा, डिजिटल नक्शे और फसल से जुड़ी जानकारी दर्ज है। फार्मर आईडी को जनाधार से भी लिंक कर दिया।
गोयल बताते हैं, हमने किसानों को दो ऑप्शन दिए हैं। अगर किसान सहकारी समितियों के सदस्य हैं तो अपनी समिति से खाद ले सकते हैं। अगर सदस्य नहीं हैं तो प्राइवेट रिटेलर का चुनाव करके वहां से खाद उठा सकते हैं।
खाद की कीमत की जानकारी भी एप से मिलेगी
खाद की कीमत की जानकारी के बारे में कृषि आयुक्त गोयल ने बताया कि किसान जब एप से खाद बुक करेंगे तो उन्हें पूरी जानकारी मिलेगी। बुकिंग के बाद ओटीपी आएगा और खाद लेने पर उसका बिल भी मिलेगा। बिल में कितने कट्टे लिए गए और उनकी कीमत कितनी है, इसकी जानकारी दर्ज होगी।ऑनलाइन बुकिंग के बाद जारी किया गया टोकन 48 घंटे तक वैध रहेगा। इसके बाद टोकन स्वतः निरस्त हो जाएगा और दोबारा बुकिंग करनी होगी।
इस व्यवस्था को लागू करने के लिए कृषि विभाग की तैयारी पूरी है। किसानों, खाद डीलरों और अधिकारियों को ट्रेनिंग दी जा रही है। विभाग का लक्ष्य 15 अगस्त के बाद प्रदेशभर में व्यवस्था शुरू करना है। इसके लिए केन्द्र सरकार की स्वीकृति का इंतजार है।
डीलर के पास उपलब्ध खाद का स्टॉक भी लाइव दिखेगा
नई व्यवस्था में कृषि अधिकारियों को डीलर के पास उपलब्ध खाद का स्टॉक भी लाइव दिखाई देगा। इससे स्टॉक होने के बावजूद किसान को खाद देने से इनकार करने की समस्या कम करने की कोशिश है।
गोयल ने बताया कि कृषि विभाग फिलहाल होम डिलीवरी का मॉडल तैयार कर रहा है। इसके लिए ज्यादा संख्या में वितरण केन्द्रों की जरूरत होगी। ऐसे में किसानों के घर तक खाद पहुंचाने की योजना पर काम चल रहा है। हालांकि प्रदेशभर में होम डिलीवरी कब से शुरू होगी, इसकी तारीख अभी तय नहीं है। हमने जून में सिरोही और राजसमंद में पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया था। दोनों जिलों में अब तक 70 हजार से ज्यादा किसानों को करीब 10 हजार टन यूरिया एप के माध्यम से वितरित कर चुके हैं।
कृषि आयुक्त बताते हैं, पायलट प्रोजेक्ट के परिणाम सकारात्मक रहे हैं। राजस्थान इस तरह की व्यवस्था लागू करने वाला मध्यप्रदेश के बाद देश का दूसरा राज्य बनने जा रहा है। इसके लिए केंद्र सरकार से कृषि विभाग को 175 करोड़ रुपए की प्रोत्साहन राशि भी मिली है।
