एनसीआई@कोटा
सावन की हरियाली, लोकगीतों और पारम्परिक उल्लास को जीवंत करते हुए रोटरी क्लब पद्मिनी की ओर से सावन महोत्सव का आयोजन किया गया। थेकड़ा स्थित एक रिसॉर्ट में आयोजित इस कार्यक्रम में 60 से अधिक महिलाओं ने उत्साह से भाग लिया। सावन से जुड़े सवालों पर आधारित प्रश्नोत्तरी, सावन गीत प्रतियोगिता सहित विभिन्न मनोरंजक गतिविधियों ने कार्यक्रम को यादगार बना दिया।
क्लब अध्यक्ष दीप्ति राजावत ने कहा कि सावन केवल ऋतु परिवर्तन का पर्व नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, लोक परम्पराओं और प्रकृति के प्रति जुड़ाव का प्रतीक है। सावन आते ही वातावरण हरियाली से भर उठता है और लोकजीवन में गीत-संगीत एवं उत्सव का रंग घुल जाता है।
सावन गीतों की प्रतियोगिता भी हुई
सचिव प्रीति शर्मा ने बताया कि कार्यक्रम में सावन से जुड़ी परम्पराओं, रीति-रिवाजों और लोक संस्कृति पर आधारित प्रश्नोत्तरी आयोजित की गई। इसके साथ ही सावन गीतों की प्रतियोगिता में महिलाओं ने पारम्परिक गीतों की मनमोहक प्रस्तुतियां देकर वातावरण को संगीतमय बना दिया।
क्लब की वरिष्ठ सदस्य प्रीति आनंद ने सावन के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भारतीय संस्कृति में सावन का विशेष स्थान है। यह महीना प्रकृति के नवजीवन, हरियाली, उमंग और सामाजिक मेलजोल का संदेश देता है। सावन के झूले, लोकगीत और पारम्परिक उत्सव हमारी सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।
