एनसीआई@बूंदी
सखी वन स्टॉप सेंटर बूंदी की संवेदनशीलता और मानवीय पहल से अपनों से बिछड़ी एक महिला का उसकी मां से पुनर्मिलन हो सका। महिला के साथ महज 10 दिन की नवजात बच्ची भी थी। महिला अधिकारिता विभाग की सहायक निदेशक मेरिंगठन सोनी के निर्देशन में केन्द्र की टीम ने महिला को सुरक्षित आश्रय, परामर्श और देखभाल उपलब्ध कराने के साथ उसके परिजनों की तलाश कर परिवार से मिलवाया।
सहायक निदेशक मेरिंगठन सोनी ने बताया कि सम्पर्क पोर्टल पर प्राप्त सूचना के आधार पर क्षेत्र में एक महिला के लावारिस अवस्था में घूमने की जानकारी मिली थी। जिस पर सखी वन स्टॉप सेंटर की टीम ने तत्काल मौके पर पहुंचकर महिला को रेस्क्यू किया और सुरक्षित केन्द्र पर लाया। महिला मानसिक रूप से असहज प्रतीत हो रही थी। शुरुआत में अपना नाम-पता और परिवार के बारे में जानकारी देने में असमर्थ थी।
भावनात्मक सम्बल प्रदान करते हुए काउंसलिंग
केन्द्र प्रबंधक हीना शर्मा ने महिला को भावनात्मक सम्बल प्रदान करते हुए उसकी काउंसलिंग शुरू की। साथ ही महिला और उसके साथ मौजूद नवजात बच्ची की भोजन, देखभाल एवं अन्य आवश्यकताओं का विशेष ध्यान रखा गया। करीब दस दिनों तक लगातार संवाद और समझाइश के प्रयासों से महिला का विश्वास जीता गया। धीरे-धीरे उसने अपना नाम और निवास स्थान बताया। महिला के बूंदी जिले की ही निवासी होने की जानकारी मिलने पर केन्द्र की टीम ने परिजनों की तलाश शुरू की। काफी प्रयासों के बाद महिला के परिवार का पता लगा कर उसकी माता को केन्द्र पर बुलाया गया। लम्बे समय से बिछड़ी बेटी को सामने देखकर मां भावुक हो उठी। मां-बेटी ने एक-दूसरे को गले लगाया तो दोनों की आंखों से खुशी के आंसू छलक पड़े।
बेहद भावुक और हृदयस्पर्शी क्षण
वर्षों की दूरी के बाद हुआ यह मिलन वहां मौजूद सभी लोगों के लिए बेहद भावुक और हृदयस्पर्शी क्षण बन गया। बेटी से पुनः मिलकर भावुक हुई माता ने केन्द्र की पूरी टीम का आभार जताया। सखी वन स्टॉप सेंटर बूंदी की यह पहल महिला सुरक्षा, संवेदनशील परामर्श और मानवीय सेवा का सराहनीय उदाहरण बनी। इस पुनर्मिलन में केन्द्र प्रबंधक हीना शर्मा, सामाजिक परामर्शदाता राजेश कुमारी, केस वर्कर संगीता पारीक, पैरामेडिकल स्टाफ सुनीता राठौर, आईटी वर्कर ललित राठौर, बहुउद्देशीय कर्मी हंसा शर्मा एवं सुरक्षाकर्मी शंकर लाल की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
