एनसीआई@जयपुर
राजस्थान की राजधानी जयपुर में सोमवार को राजस्थान एंटी टेररिस्ट स्क्वॉड (एटीएस) ने आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद की महिला स्लीपर सेल को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार महिला बबीता धाकड़ उर्फ ‘खदीजा'(37) मूल रूप से सवाई माधोपुर जिले की रहने वाली है। उसे जयपुर में वाटिका क्षेत्र से रविवार को हिरासत में लिया गया था। यह कार्रवाई मिलिट्री इंटेलीजेंस से प्राप्त इनपुट के आधार पर की गई। प्रारम्भिक जांच में सामने आया है कि बबीता का कट्टरपंथी विचारधारा के जरिए ब्रेनवॉश किया गया था। उसे आतंकी संगठन के लिए तैयार किया जा रहा था।
एटीएस के एसपी मनीष त्रिपाठी ने बताया कि जांच एजेंसियों को जानकारी मिली थी कि बबीता की पाकिस्तान जाने की इच्छा है। उसके धर्म परिवर्तन कराने के प्रयास किए जाने की भी बात सामने आई है। सुरक्षा एजेंसियां बबीता की सोशल मीडिया गतिविधियों और उसके नेटवर्क की जांच में जुटी हैं। त्रिपाठी ने बताया- बबीता को 27 जून तक रिमांड पर लिया गया है।
करीब 4 महीने से किया जा रहा था वॉच
एटीएस के एसपी मनीष त्रिपाठी ने बताया- सोशल मीडिया और अन्य जगह हम सर्विलांस करते रहते हैं। 3-4 महीनों से संदिग्ध गतिविधियों के कारण बबीता को ट्रेक कर रहे थे। मूल रूप से सवाई माधोपुर की रहने वाली यह महिला जयपुर के वाटिका क्षेत्र में अपने सेवानिवृत्त पिता के साथ रहती है। 10-15 साल पहले इसकी शादी हुई थी। यह वॉट्सएप सहित अन्य सोशल मीडिया के जरिए आतंकी संगठनों से जुड़ी थी।
मोबाइल डेटा किया डिलीट, कर रहे रिकवर
बबीता के मोबाइल से पाकिस्तान को डॉक्यूमेंट सहित अन्य जानकारियां भेजी गई हैं। अभी जांच प्राइमरी स्तर पर है। मोबाइल का काफी डेटा मिटा दिया गया है। इसे रिकवर किया जा रहा है। इसी के बाद अन्य सबूत मिल सकेंगे। बबीता को आतंकी संगठनों से रुपए मिलने सहित दूसरे देश जाने सम्बंधी मामले की जांच की जा रही है।
लश्कर-ए-तैयबा का आतंकी भी जयपुर में रहा था, देश छोड़कर भागा
लश्कर-ए-तैयबा के आतंकी उमर हारिस उर्फ ‘खरगोश’ ने पहचान बदलकर जयपुर में निकाह किया था। निकाह के लिए उसने फर्जी दस्तावेज बनवाए थे। इनका इस्तेमाल कर भारतीय पासपोर्ट भी बनवाया और देश से भाग निकला। उसके सऊदी अरब में छिपे होने की आशंका है। वर्ष 2023 में आतंकी खरगोश नूंह-मेवात से जयपुर आया था और अगस्त 2024 तक यहां रहा।
जैश-ए-मोहम्मद ने बनाई है महिला आतंकी यूनिट
करीब 8 महीने पहले जानकारी सामने आई थी कि पाकिस्तान के आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद (JeM) ने पहली बार महिला आतंकियों की एक अलग यूनिट बनाई है। इसका नाम ‘जमात-उल-मोमिनात’ रखा गया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इसकी जानकारी ग्लोबल आतंकी मौलाना मसूद अजहर के नाम से जारी एक लेटर के जरिए सामने आई थी।
लेटर के मुताबिक, इस नई यूनिट में भर्ती प्रोसेस 8 अक्टूबर से पाकिस्तान के बहावलपुर में मरकज उस्मान-ओ-अली में शुरू हुई।
इस यूनिट की कमान मसूद अजहर की बहन सादिया अजहर संभाल रही है। सादिया का पति यूसुफ अजहर 7 मई को ऑपरेशन सिंदूर के दौरान मारा गया था।
प्रारम्भिक जानकारी के अनुसार बबीता, लम्बे समय से देश विरोधी नेटवर्क के लिए काम कर रही थी। जांच एजेंसियों के अनुसार, यह गिरफ्तारी राजस्थान में आतंकवाद के बदलते स्वरूप और महिलाओं को निशाना बनाने की पाकिस्तानी साजिश का एक बड़ा प्रमाण है। आरोपी महिला सोशल मीडिया और एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग ऐप्स के जरिए सीधे सीमा पार बैठे आकाओं के निर्देश ले रही थी।
सवाई माधोपुर की बबीता बनी ‘खदीजा’
सुरक्षा बलों और खुफिया एजेंसियों की पूछताछ में जो तथ्य सामने आए हैं, वे बेहद चौंकाने वाले हैं। बबीता धाकड़ मूल रूप से राजस्थान के सवाई माधोपुर जिले की रहने वाली है। कुछ समय पहले वह इंटरनेट पर कुछ ऐसे संदिग्ध ग्रुप्स और प्रोफाइल्स के सम्पर्क में आई, जो युवाओं को कट्टरपंथी बनाने का काम करते हैं।
जांच में सामने आई मुख्य कड़ियां इस प्रकार हैं:-
• डिजिटल ब्रेनवॉश: पाकिस्तानी हेंडलर्स ने बबीता को भारत विरोधी सामग्री और प्रोपेगैंडा वीडियो दिखाकर उसका पूरी तरह से मानसिक ब्रेनवॉश (Brainwash) किया।
• ऑनलाइन कलमा: पूरी तरह प्रभावित होने के बाद बबीता ने इंटरनेट के माध्यम से ही ऑनलाइन कलमा पढ़ा और अपना नाम बदलकर ‘खदीजा’ रख लिया।
• पाकिस्तानी सम्पर्क: धर्म परिवर्तन के बाद वह पूरी तरह से जैश-ए-मोहम्मद के स्लीपर सेल मॉड्यूल (Sleeper Cell Module) के रूप में सक्रिय हो गई और देश के भीतर की संवेदनशील जानकारियां जुटाने लगी।
सेना केम्प हमले और विमान अपहरण के आरोपियों से जुड़े थे मोबाइल नम्बर
प्रारम्भिक जानकारी के अनुसार एटीएस ने बबीता के पास से मिले स्मार्टफोन और डिजिटल उपकरणों की जब तकनीकी फॉरेंसिक जांच शुरू की तो देश के बड़े आतंकी हमलों के मास्टर माइंड से उसके तार जुड़े मिले। बबीता के मोबाइल कॉन्टेक्ट्स और चैट हिस्ट्री में भारत के सबसे वांटेड आतंकियों के करीबी नेटवर्क के नम्बर सक्रिय पाए गए हैं।
मुख्य रूप से इन दो बड़े आतंकी नेटवर्कों से सम्बंध सामने आए हैं:-
• कारी जरार नेटवर्क: बबीता के मोबाइल से जैश कमांडर कारी जरार के नेटवर्क के नं५बर मिले हैं। कारी जरार 2016 में जम्मू-कश्मीर के नगरोटा में हुए भारतीय सेना के केम्प पर आत्मघाती हमले का मुख्य आरोपी है।
• युसूफ अजहर नेटवर्क: इसके अलावा उसके फोन से कुख्यात आतंकी मसूद अजहर के साले युसूफ अजहर उर्फ गोरी के नेटवर्क के नम्बर भी मिले हैं। युसूफ अजहर 1999 में इंडियन एयरलाइंस के विमान IC-814 के अपहरण की साजिश में सीधे तौर पर शामिल था।
पाकिस्तान भागने की तैयारी की आशंका
खुफिया एजेंसियों की इस कार्रवाई से जैश-ए-मोहम्मद द्वारा हाल ही में शुरू की गई एक नई और खतरनाक रणनीति का पर्दाफाश हुआ है। जैश ने भारत में सुरक्षा एजेंसियों की नजरों से बचने के लिए अपनी एक विशेष महिला विंग शुरू की है, जिसे ‘जमात-उल-मुमिनात’ नाम दिया गया है।
इस विंग का मुख्य काम भारत के भीतर रहने वाली महिलाओं और युवतियों को ऑनलाइन माध्यमों से ढूंढना, उन्हें कट्टरपंथी बनाना और फिर उन्हें स्लीपर सेल के रूप में इस्तेमाल करना है।
बबीता इसी विंग की एक बेहद महत्वपूर्ण कड़ी बन चुकी थी। वह लगातार भारत विरोधी साजिशों को अंजाम दे रही थी और सुरक्षा एजेंसियों के रडार पर आने से पहले ही भारत की सीमा लांघकर पाकिस्तान भागने की फिराक में थी, जिसके लिए उसके पाकिस्तानी आकाओं ने पूरा रूट मैप तैयार कर लिया था।
राजस्थान में स्थानीय मददगारों की तलाश तेज
वर्तमान में मिलिट्री इंटेलिजेंस और राजस्थान एटीएस की संयुक्त टीमें बबीता उर्फ खदीजा को एक अज्ञात और सुरक्षित स्थान पर रखकर लगातार कड़ाई से पूछताछ कर रही हैं। सुरक्षा अधिकारियों का मुख्य फोकस अब इस बात पर है कि बबीता ने जयपुर ग्रामीण और सवाई माधोपुर या सेना के अन्य ठिकानों के आसपास रहकर अब तक कितनी संवेदनशील, रणनीतिक और गोपनीय सूचनाएं सीमा पार भेजी हैं।
इसके साथ ही, राजस्थान पुलिस इस बात की भी गहनता से तफ्तीश कर रही है कि प्रदेश के भीतर बबीता को लॉजिस्टिकल सपोर्ट, इंटरनेट डेटा, फर्जी सिम कार्ड या वित्तीय मदद पहुंचाने वाले स्थानीय मददगार (Local Support System) कौन हैं। पुलिस को अंदेशा है कि इस नेटवर्क से कुछ और स्थानीय लोग जुड़े हो सकते हैं, जिनकी धर-पकड़ के लिए एटीएस की टीमें अलग-अलग जिलों में छापेमारी कर रही हैं।
