कोटा भामाशाह मंडी में बड़ा गड़बड़झाला: किसानों/हम्मालों/पल्लेदारों के खाने में घोटाला
एनसीआई@कोटा
भामाशाह मंडी कोटा में किसान कलेवा योजना के तहत संचालित रसोई घर में भारी गड़बड़झाले का मामला सामने आया है। इसके अनुसार एक तरफ तो जहां किसानों, हम्मालों व पल्लेदारों को निर्धारित मात्रा से काफी कम वजन का भोजन परोसा जा रहा है, वह भी मेनू के अनुसार नहीं है। इसके अलावा विभिन्न दिशा-निर्देशों की खुलकर धज्जियां भी उड़ाई जा रही हैं। इनमें कोविड-19 के सम्बन्ध में जारी की गई गाइड लाइन भी शामिल है। भामाशाह मंडी हम्माल यूनियन के अध्यक्ष शिवकरण गुर्जर ने खुद इन सब खामियों की पुष्टि की है। इन गड़बड़ियों के साक्ष्यों के रूप में #न्यूजचक्रइंडियाडॉटकॉम को वीडियो उपलब्ध कराए गए हैं।
प्राप्त साक्ष्यों से पता चलता है कि भामाशाह मंडी में किसान कलेवा रसोईघर का संचालन बोली की शर्तों के अनुसार 13 अप्रेल 2020 से 11 जून 2021 तक किया जाना है। इसमें तय शर्तों के अनुसार-
प्रति थाली 8 चपाती (250 ग्राम आटे की), दाल एक कटोरी (125 ग्राम), सब्जी एक कटोरी (125 ग्राम) दिया जाना तय है। अर्थात कुल मिलाकर 500 ग्राम वजन का भोजन देना होगा। इसके अलावा गुड़ 50 ग्राम (सर्दियों में अक्टूबर से मार्च तक) व छाछ 200 मिली लीटर (गर्मियों में अप्रेल से सितम्बर तक) भी देनी होगी।
प्रति थाली स्वीकृत दर 30 रुपए है। इसके लिए किसानों/हम्मालों/ पल्लेदारों को मात्र 5 रुपए प्रति थाली देने होंगे। सरकार की ओर से इस पर 25 रुपए का अनुदान देय है।
असलियत यह है
प्रति थाली निर्धारित मात्रा से काफी कम खाद्य सामग्री दी जा रही है। इसका पता हमें मिले वीडियो से चलता है। कई हम्मालों की गवाही भी हमारे पास है। वीडियो से पता चल रहा है कि जिस व्यक्ति ने कूपन के आधार पर किसान कलेवा रसोई घर से एक थाली भोजन लिया, उसने वहीं से तराजू लेकर उसे संचालक के सामने तोला। इसमें सारी सामग्री का वजन निर्धारित मात्रा 500 ग्राम की जगह, 340 ग्राम ही निकला, अर्थात 160 ग्राम कम।
इसमें दाल निर्धारित मात्रा 125 ग्राम की जगह 110 ग्राम, 250 ग्राम आटे की 8 चपातियों की जगह मात्र 150 ग्राम आटे की वजन वाली बाटियां व 80 ग्राम चावल निकला। यहां गौरतलब है कि निर्धारित मेनू में सब्जी भी शामिल है, मगर बाटियां व चावल शामिल नहीं है। सर्दियों में दिया जाने वाला 50 ग्राम गुड़ भी इस भोजन में शामिल नहीं था। यहां बताया गया कि इन दिनों सर्दियों में खाने के साथ न तो गुड़ दिया जा रहा है ना ही पहले गर्मियों में कभी छाछ दी गई।
यह आरोप भी आया सामने
किसान कलेवा रसोई घर के संचालक नीलम पारेता ने परिसर में अवैध रूप से गुटखा, सिगरेट, बीड़ी आदि बेचने के लिए ठेला भी लगवा रखा है। इसके अलावा यहां पर अधिकतर कर्मचारी ना तो मास्क लगाते हैं, ना ही सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हैं।
बोली की शर्तों में यह भी शामिल
कोरोना महामारी के नियंत्रण के लिए निम्न उपाय करने होंगे-
1. किसान कलेवा भवन के गेट पर साबुन से हाथ धोने की व्यवस्था करनी होगी। हाथ धोने के उपरांत ही कलेवा भवन में प्रवेश करने दिया जाएगा। 2. सेनिटाइजर की व्यवस्था करनी होगी। 3. भोजन के लिए आने वालों से सोशल डिस्टेंसिंग की पालना करवानी होगी। इसके लिए 1 मीटर की दूरी बनाए रखनी होगी। 4. किसान कलेवा भवन को समय-समय पर सेनेटाइज करना होगा। 5. बिना मास्क के कूपन धारी किसान/हम्माल/पल्लेदार को किसान कलेवा भवन में प्रवेश नहीं दिया जाएगा। भोजन वितरण करने वाले को भी मास्क एवं ग्लब्स का उपयोग करना होगा। मगर जो वीडियो सामने आया है, उसमें अधिकतर निर्धारित व्यवस्था नदारद है।
भामाशाह मंडी में किसान कलेवा योजना के तहत रसोईघर की संचालक फर्म मैसर्स हर्ष केंटीन झालरापाटन है। इसके कर्ताधर्ता नीलम पारेता नामक शख्स हैं। हमने उनसे सम्पर्क कर पक्ष लेने का प्रयास किया, मगर सम्भव नहीं हो सका। पारेता का पक्ष मिलने पर उसे भी प्रकाशित किया जाएगा।
50 कूपन के 500 रुपए देने को तैयार
एक अन्य वीडियो में किसान कलेवा रसोई घर में काउंटर सम्भालने वाली महिला के पास एक शख्स आता है। वह उससे कहता है कि मेरे पास 50 कूपन हैं, इसके बदले कितने रुपए मिल जाएंगे? इस पर कुछ सोचने विचारने के बाद वह महिला 500 रुपए देने पर सहमत हो जाती है।
