एलडीसी के पास मिली करोड़ों की बेनामी सम्पत्ति और 13 लाख नगद
एनसीआई@झालावाड़
एसीबी बूंदी की टीम ने झालावाड़ नगर परिषद के कनिष्ठ सहायक श्यामलाल गुर्जर के खिलाफ आय से अधिक सम्पत्ति मामले में कार्रवाई कर बड़ी सफलता पाई है। झालावाड़ नगर परिषद कंगाली के दौर में है। स्थिति यह है कि सफाई कर्मचारियों को समय पर वेतन तक नहीं दे पा रही है। कर्मचारी वेतन के लिए आंदोलनरत हैं। वहीं कर्मचारी दो नम्बर की कमाई से तिजोरी भर रहे हैं।
एसीबी की पूछताछ में गुर्जर ने नगर परिषद में भ्रष्टाचार के बारे में भी हैरान करने वाली जानकारी दी है। इसके बाद एसीबी के रडार पर नगर परिषद के कुछ अन्य कर्मचारी व अधिकारी भी आ गए हैं। उनकी सम्पत्तियों की गोपनीय जानकारी जुटाई जाएगी। बूंदी एसीबी ने कोटा रेंज के कार्यवाहक पुलिस अधीक्षक ठाकुर चन्द्रशील के निर्देश पर यह कार्रवाई की। कार्रवाई का नेतृत्व में बूंदी एसीबी के पुलिस उपाधीक्षक ज्ञानचंद मीणा ने की।
बूंदी एसीबी ने नगर परिषद के कनिष्ठ सहायक श्यामलाल गुर्जर के घर तलाशी में करोड़ों रुपए का हिसाब-किताब व दस्तावेज जब्त किए हैं। बेनामी सम्पत्तियों के दस्तावेज भी मिले हैं। एसीबी जांच में सामने आया है गुर्जर दो नम्बर की आय को प्रॉपर्टी मे निवेश करने में ज्यादा रूचि ले रहा था। शहर के पॉश इलाकों में निवेश कर रखा था। प्रॉपर्टी से सम्बन्धित कई अन्य दस्तावेज भी मिले हैं। इससे जांच का दायरा बढ़ सकता है। कुछ साझेदारों के नाम के दस्तावेज भी मिले हैं। उनकी जांच की जा रही है।
एसीबी ने बताया कि कुछ कच्ची पर्चियां भी मिली हैं, जिनकी जांच की जाएगी। एसीबी ने कई दस्तावेज जब्त किए हैं, उनका विस्तृत अनुसंधान किया जाएगा। एसीबी के अधिकारियों ने बताया कि गुर्जर के आवास पर 13 लाख रुपए नगद भी मिले हैं। इसके बारे में वह कोई संतोषप्रद जवाब नहीं दे पाया है। उसने फसल बेचने से यह राशि प्राप्त होने की बात कही है, लेकिन यह एसीबी के गले नहीं उतरी। इस राशि के स्रोत के बारे में जानकारी जुटाई जाएगी। एसीबी ने उसे अपने कब्जे में ले लिया है।
बूंदी एसीबी के पुलिस उपाधीक्षक मीणा का कहना है कि आय से अधिक सम्पत्ति का केस होने से गहनता से जांच कर की जा रही है। अभी बैंक खातों व लॉकर की भी जांच की जाएगी। इसके पूरी होने के बाद अभी करोड़ों रुपए का हिसाब और सामने आ सकता है। एसीबी ने बताया कि श्यामलाल गुर्जर नगर परिषद में 1997 में एलडीसी बना था। इस 24 साल के सेवाकाल का उसका कुल वेतन 45 लाख रुपए बन रहा है। उसे अभी करीब 55 हजार रुपए वेतन मिलता है। ऐसे में आय से अधिक सम्पत्ति मिलने पर एसीबी ने कोर्ट के ओदश पर कार्रवाई की है।
