पटाखा फेक्ट्री में जलकर मरे 4 दोस्त, 5 वां चिल्लाता रहा, विस्फोट हुए तो सुपरवाइजर बोला- टेस्टिंग है
एनसीआई@डूंगरपुर
डूंगरपुर से करीब 75 किलोमीटर दूर गुजरात के मोडासा में गुरुवार शाम पटाखा फेक्ट्री में लगी भीषण आग में डूंगरपुर के 4 युवक जिंदा जल गए। जिंदा बचा पांचवां युवक इन्हीं चार में से एक का सगा बड़ा भाई है। हादसे से चंद सेकंड पहले ही वह पहली मंजिल से लकड़ी की टेंपरेरी सीढ़ियों से नीचे उतरा था, इसलिए वह बच गया, लेकिन चारों साथियों की जलकर मौत हो गई। यहां आज शुक्रवार सुबह तक आग बुझाने का काम चला।

गुरुवार शाम 4 बजे के करीब इस पटाखा फेक्ट्री में विस्फोट के साथ आग लग गई। ऐसे में ये चारों युवक पहली मंजिल पर फंस गए। जहां सीढ़ी थी वहीं आग धधकी। इसके बाद आग फैल गई। चारों जहां थे, वहीं जल कर कोयले में तब्दील हो गए।
डूंगरपुर से गए थे 5 मजदूर
यह फेक्ट्री गुजरात में हिम्मतनगर मोडासा हाईवे पर लालपुरा क्षेत्र में है। अजय, सचिन, ललित, हरीश और रामलाल डूंगरपुर से मजदूरी के लिए मोडासा गए थे। ये लोग भवन निर्माण में सेंटिंग और मजदूरी का काम करते थे। गुरुवार को ये पटाखा फेक्ट्री के गोदाम की ही एक निर्माणाधीन इमारत में सेंटिंग का काम कर रहे थे। इस दौरान आग लगी और सचिन को छोड़ कर चारों की मौत हो गई।
मृतकों में गेंजी निवासी ललित (42) पुत्र गैबीलाल ननोमा, बांसिया निवासी अजय (21) पुत्र खेमराज कोटेड, गुंडलारा निवासी हरीश गोदा (21) और रामलाल गोदा (25) शामिल हैं।
सचिन ने यह बताया घटनाक्रम

सचिन ने बताया कि हम पांचों गुरुवार को एक साथ फेक्ट्री परिसर में ही पटाखा गोदाम के पास निर्माणाधीन इमारत में पहली मंजिल पर काम कर रहे थे। सेंटिंग का काम हमने एक साथ शुरू किया था। दोपहर को सभी ने एक साथ खाना खाया। फिर दोबारा काम में लग गए। शाम के 4 बजने वाले थे। मैं रिंग बनाने नीचे उतरा। उसी समय पटाखा फेक्ट्री से धमाकों की आवाज आने लगी। मैंने गेट पर बैठे सुपरवाइजर से पूछा तो उसने पटाखों की टेस्टिंग होना बताकर बात टाल दी।
कुछ ही देर में पटाखों के धमाके बढ़ते गए। फिर आग की लपटें उठने लगीं। मैं जोर से चिल्लाया और अपने भाई अजय सहित उसके साथ काम कर रहे साथियों को बचाने दौड़ा, लेकिन आग के साथ धमाके बढ़ने पर दूसरे लोगों ने मुझे पकड़ कर बाहर निकाल दिया।
मेरा भाई अजय और उसके साथी पहली मंजिल पर ही फंस गए। पहली मंजिल से नीचे उतरने के लिए लकड़ी की टेंपरेरी सीढ़ी लगी थी। उसी जगह पर सबसे ज्यादा आग लगी थी। वे लोग नीचे नहीं उतर सके। पटाखों के धमाकों और आग में फंसकर वे वहीं झुलस गए। अजय सहित चारों की मौत हो गई। मलाल है कि मैं अपने भाई और साथियों को नहीं बचा सका।
सचिन ने कहा कि धमाकों की गूंज कई किलोमीटर तक सुनाई दी। अजय, ललित, हरीश और रामलाल के आग में घिरने के बाद फेक्ट्री मालिक को फोन किया। दमकलों ने शुक्रवार सुबह तक आग पर काबू पाया।
ललित एक दिन पहले, दोस्त 3 दिन पहले पहुंचे थे
ललित 19 अप्रेल की शाम को ही मोडासा गया था। इससे पहले दो दिन अपने घर पर रुका था। जबकि अजय, हरीश और रामलाल तीन दिन पहले 16 अप्रेल को मोडासा पहुंचे थे। सभी सेंटिंग और मजदूरी का काम करते थे।
गुरुवार देर रात जले हुए शव निकालकर मोडासा अस्पताल की मॉर्च्युरी में रखवाए गए। घटना की सूचना पर रात में ही चारों युवकों के परिजन मोडासा पहुंच गए।
शव गांव पहुंचे, फूट फूटकर रोए परिजन
बांसिया निवासी अजय कोटेड, गेंजी पाकरोण निवासी ललित ननोमा, गुंडलारा निवासी हरीश गोदा और रामलाल गोदा के शव शुक्रवार दोपहर गांव पहुंचे। शव आते ही मातम पसर गया। बांसिया गांव में बड़ी संख्या में लोग जुटे। परिजन फूट-फूट कर रोए। गांव में चूल्हे नहीं जले। सचिन ने बताया कि अजय की अभी शादी नहीं हुई थी। अजय तीन भाइयों में से एक था।
गुंडलारा निवासी हरीश की सगाई हो गई थी। परिवार शादी के लिए मुहूर्त निकलवा रहा था। खुशियां आने से पहले ही परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। हरीश बीए फाइनल कर रहा था। हरीश का एक बड़ा भाई और 2 बहनें हैं।
रामलाल का 9 महीने का बेटा है। उसके एक भाई की पहले ही मौत हो चुकी है। एक छोटा भाई और 2 बहनें हैं। रामलाल पर परिवार की बड़ी जिम्मेदारी थी। ललित के दो बेटे एक बेटी है। एक बेटे की शादी हो चुकी है।
