April 28, 2026

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कर्नाटक में सिद्धारमैया के शपथ ग्रहण समारोह में कांग्रेस का शक्ति प्रदर्शन, ये रही प्रमुख बातें

कर्नाटक में सिद्धारमैया के शपथ ग्रहण समारोह में कांग्रेस का शक्ति प्रदर्शन, ये रही प्रमुख बातें

एनसीआई@बेंगलुरु

कांग्रेस नेता सिद्धारमैया ने आज बेंगलुरु में एक भव्‍य कार्यक्रम में शपथ लेने और औपचारिकताएं पूरी करने के बाद कर्नाटक के नए मुख्यमंत्री के रूप में कार्यभार सम्भाला। सिद्धारमैया के शपथ ग्रहण समारोह में राहुल गांधी व प्रियंका गांधी सहित कांग्रेस के कई दिग्‍गज नेताओं के साथ विपक्षी नेता भी शामिल हुए। इसके अलावा समारोह स्‍थल के अंदर करीब डेढ़ हजार और इसके बाहर हजारों लोगों की भीड़ जमा रही।

कर्नाटक कांग्रेस के अध्यक्ष डीके शिवकुमार, जो अपनी पार्टी की शानदार जीत के बाद एक सप्ताह तक शीर्ष पद के लिए सिद्धारमैया के साथ एक ‘अनकही जंग’ में उलझे हुए थे, उन्‍होंने भी सिद्धारमैया के बाद शपथ ग्रहण की। सिद्धारमैया 2013 से 2018 तक अपने पहले के पांच साल के कार्यकाल के बाद दूसरी बार मुख्यमंत्री बने हैं। 61 वर्षीय डीके शिवकुमार, जिन्होंने पहले सिद्धारमैया के अधीन मंत्री के रूप में काम किया था, पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष के पद पर अगले साल संसदीय चुनाव होने तक भी बने रहेंगे।

राहुल गांधी ने की यह बड़ी घोषणा

कांग्रेस के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी अपनी बहन और पार्टी की राष्ट्रीय महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा के साथ कार्यक्रम में शामिल हुए। उन्‍होंने एक बार फिर दोहराया कि पार्टी के घोषणा पत्र में शामिल रहीं पांच गारंटियां एक-दो घंटे बाद होने वाली केबिनेट की बैठक में कानून बन जाएंगी।

राहुल गांधी ने कहा कि कांग्रेस की जीत के बाद कई बातें कही गईं कि कांग्रेस ने यह चुनाव कैसे जीता, अलग-अलग विश्लेषण किए गए, लेकिन मैं कहना चाहता हूं कि कांग्रेस इसलिए जीती, क्योंकि हम गरीबों, दलितों और आदिवासियों, पिछड़ों के साथ खड़े थे। हमारे साथ सच्चाई और गरीब जनता थी। भाजपा के पास पैसा था, पुलिस थी और सब कुछ था, लेकिन कर्नाटक के लोगों ने उनकी सारी शक्तियों को हरा दिया।

इन्होंने ली शपथ

सिद्धारमैया डीके शिवकुमार के साथ प्रदेश कांग्रेस कमेटी के पूर्व अध्यक्ष जी परमेश्वर, एमबी पाटिल, पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के पुत्र प्रियांक खरगे, वरिष्ठ नेता के एच मुनियप्पा, केजे जॉर्ज, सतीश जार्कीहोली, रामालिंगा रेड्डी और बी जेड जमीर अहमद खान ने मंत्री पद की शपथ ली।

जी परमेश्वर पूर्व उपमुख्यमंत्री और राज्य के गृह मंत्री रहे हैं। वह 2013 में केपीसीसी अध्यक्ष थे, जब कांग्रेस जीती थी। वह दक्षिण कर्नाटक में पार्टी का दलित जाति चेहरा हैं। केएच मुनियप्पा सात बार के सांसद, पूर्व केन्द्रीय मंत्री और पार्टी के एक मजबूत नेता हैं। वह भी अनुसूचित जाति से आते हैं। अखिल भारतीय कांग्रेस समिति के अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के पुत्र प्रियांक खड़गे चार बार के विधायक और शीर्ष अनुसूचित जाति नेता हैं। सतीश जरकीहोली बेलगावी के शक्तिशाली झारखियोली परिवार से ताल्लुक रखते हैं। वह पार्टी के अनुसूचित जनजाति का चेहरा भी है।

रामलिंगा रेड्डी बेंगलुरु से आठ बार के विधायक हैं और पार्टी का एक शक्तिशाली चेहरा हैं। केजे जॉर्ज राज्य के पूर्व गृह मंत्री और कांग्रेस के एक महत्वपूर्ण नेता हैं। वह पार्टी के अल्पसंख्यक चेहरों में से एक हैं। बीजेड जमीर अहमद खान को सिद्धारमैया का करीबी माना जाता है। वह बेंगलुरु शहर से पार्टी का एक और अल्पसंख्यक चेहरा हैं। एमबी पाटिल कांग्रेस प्रचार समिति के प्रमुख थे। वह पार्टी का लिंगायत चेहरा हैं।

शपथ ग्रहण समारोह में ये रहे शामिल

शपथ समारोह में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू आदि कांग्रेस के वरिष्ठ नेता शामिल हुए।

राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) के प्रमुख शरद पवार, बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और उप मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव, तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम के स्टालिन, झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, नेशनल कांफ्रेंस (नेकां) के नेता फारूक अब्दुल्ला, पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) की नेता महबूबा मुफ्ती और कई अन्य विपक्षी नेताओं ने भी इस शपथ समारोह में शिरकत की।

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, तेलंगाना के के चंद्रशेखर राव और समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव इस कार्यक्रम में शामिल नहीं थे।

यह रहा था चुनाव परिणाम

कर्नाटक के राज्यपाल थावरचंद गहलोत ने बेंगलुरु के कांटेरावा स्टेडियम में शपथ ग्रहण समारोह में निर्वाचित प्रतिनिधियों को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। कर्नाटक में 224 सदस्यीय विधानसभा के लिए 10 मई को हुए चुनाव में कांग्रेस ने 135 सीटें जीती थीं। भारतीय जनता पार्टी को 66 और पूर्व प्रधानमंत्री एच डी देवेगौड़ा नीत जनता दल (सेक्युलर) को 19 सीटें मिली थीं।

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