April 22, 2026

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1,442 करोड़ रुपए से विकसित बहुचर्चित चम्बल रिवर फ्रंट का शानदार उद्घाटन, बने विश्व रिकॉर्ड

1,442 करोड़ रुपए से विकसित बहुचर्चित चम्बल रिवर फ्रंट का शानदार उद्घाटन, बने विश्व रिकॉर्ड

एनसीआई@कोटा

बहुचर्चित चम्बल रिवर फ्रंट का आज मंगलवार, 12 सितम्बर की सुबह 10 बजे यूडीएच मंत्री शांति धारीवाल ने उद्घाटन किया। इस दौरान राजस्थान सरकार के मंत्री और विधायक मौजूद रहे। इसी क्रम में शाम करीब साढ़े छह बजे चम्बल माता की प्रतिमा का लोकार्पण भी किया गया। इसी के साथ 4 वर्ल्ड रिकॉर्ड भी बन गए हैं। इस पूरे निर्माण की लागत 1,442 करोड रुपए बताई गई है।

बड़ी बात यह रही की इस दो दिवसीय (12-13 सितम्बर) समारोह में सीएम अशोक गहलोत को भी आना था, लेकिन सोमवार, 11 सितम्बर को देर रात 2.28 बजे उन्होंने अपने एक्स हेंडल पर मैसेज डाल कर अपरिहार्य कारण से 12 सितम्बर के कार्यक्रम में न आ पाने की बात कही थी। जैसे ही यह जानकारी लोगों के सामने आई, सब अचंभित रह गए। कई कयास लगाए जाने लगे।

सुबह चम्बल रिवर फ्रंट के उद्घाटन के बाद यूडीएच मंत्री धारीवाल और विधानसभा अध्यक्ष जोशी सहित अन्य मंत्रियों के साथ 25 देशों के राजदूतों ने प्रत्येक घाट का अवलोकन किया। वहीं शाम को चम्बल माता की प्रतिमा के लोकार्पण के दौरान 125 पंडितों ने चम्बल माता की आरती उतारी। इस कार्यक्रम के दौरान बारिश आ जाने से घाट की जगह छत के नीचे खड़े होकर आरती की गई। इसके बाद कार्यक्रम में मौजूद मंत्री-विधायकों की ओर से रिमोट का बटन दबाकर प्रतिमा का लोकार्पण किया गया। इस प्रतिमा से 1 घंटे में 7 लाख लीटर पानी चम्बल नदी में गिरेगा।

रिवर फ्रंट पर दुनिया के सभी देशों के मॉडल बने होने का दावा

अधिकारियों के अनुसार यह एकमात्र ऐसा रिवर फ्रंट है, जहां सभी देशों के मॉडल बनाए गए हैं। प्रत्येक देश के मॉडल के पास उस देश के जायके का लुफ्त भी उठाया जा सकेगा।यह पूरा रिवर फ्रंट दोनों छोर पर करीब साढ़े पांच किलोमीटर के एरिया में फैला हुआ है। यहां सबसे बड़ी घंटी है, जिसकी आवाज 8 किलोमीटर दूर तक सुनाई देगी।

15 हजार लोग एक बार में देख सकेंगे, तीन एंट्री पॉइंट

यहां करीब 22 घाट बनाए गए हैं। इसके अलावा दुबई की तर्ज पर यहां फाउंटेन लगाए गए हैं, जहां हर शाम म्यूजिकल शो होगा। इस पूरे रिवर फ्रंट में एक बार में करीब 15 हजार लोग घूमने आ सकते हैं। यहां तीन एंट्री पॉइंट बनाए गए हैं। हालांकि जनता के लिए यह कब खुलेगा और कितना चार्ज लगेगा, यह अभी तय नहीं है।

यहां 30 गोल्फ कार्ट लगाई गई हैं। सिक्याेरिटी के लिए रिवर फ्रंट के दोनों छोर पर 189 सीसीटीवी कैमरे लगे हैं। स्टाफ और सिक्योरिटी गार्ड को मिलाकर 400 लोग यहां तैनात रहेंगे।

इन रिकॉर्ड के बनने का दावा

• नेहरू का सबसे बड़ा फेस मास्क

यहां बनाए गए पं. जवाहरलाल नेहरू के फेस मास्क को देश का सबसे बड़ा फेस मास्क बताया गया है। इसकी ऊंचाई 264.50 मीटर है। 5.50 करोड़ रुपए से गन मेटल से बना यह मुखौटा 25 टन वजन का है। पर्यटक मुखौटे की आंख में से रिवर फ्रंट देख सकेंगे।

• दुनिया का सबसे बड़ा नंदी

रिवर फ्रंट के पश्चिमी जोन में बनाई गई नंदी की प्रतिमा है दुनियाभर में सबसे बड़ी बताई गई है। इसकी ऊंचाई 6.5 मीटर, लम्बाई 10.5 मीटर और चौड़ाई 4.5 मीटर है। इसे जोधपुर स्टोन पर ओडिशा के 200 कारीगरों ने 6 महीने में तराशा है।

• सबसे ऊंची चम्बल माता की प्रतिमा

रिवर फ्रंट के बैराज गार्डन में देश की सबसे ऊंची चम्बल माता की मूर्ति लगाई गई है। इसकी ऊंचाई 42 मीटर है। इसे 20 मीटर पेडस्टल पर लगाया है। वियतनाम मार्बल से जयपुर में बनाई गई इस प्रतिमा का वजन 20 हजार 800 क्विंटल है। इसे 1500 पीस में यहां लाया गया था।

रिवर फ्रंट की यह बातें भी हैं खास

नयापुरा गार्डन: यहां खूबसूरत बावड़ी और गार्डन बनाया गया है। यह रिवर फ्रंट का एंट्री पॉइंट है। इसके पास में ही पार्किंग स्थल हैं।

सिंह घाट– बांसवाड़ा के मार्बल से बनाई गईं 9 शेरों की प्रतिमाएं यहां लगाई गईं हैं। इनका वजन लगभग 35 टन, ऊंचाई 15 फीट, लम्बाई 11 फीट और चौड़ाई 6 फीट है। इसके बीच में रानी महल बनाया गया है। जहां फूड कोर्ट डेवलप किया जाएगा। कुछ कमर्शियल प्रॉपर्टी भी यहां बनाई गई है।

उत्सव घाट– इसमें बैंक्वेट हॉल, खूबसूरत छतरियां, केस केड और स्टार फाउंटेन बनाए गए हैं।

साहित्य घाट– साहित्य घाट में बांसवाड़ा मार्बल से खूबसूरत विशाल खुली किताब और पुस्तक महल का निर्माण किया गया है। फसाड में ग्राउंड फ्लोर पर लाइब्रेरी और फर्स्ट फ्लोर पर केफेटेरिया बनाया गया है।

रंगमंच घाट– इसमें एम्फीथिएटर में ग्रीन रूम का निर्माण किया गया है। घाटों को पियानो के की बोर्ड की तरह बनाया गया है।

फव्वारा घाट– इसमें खूबसूरत लगून मय सीढ़ियों का निर्माण किया गया है। यहां दुबई में बने लीनियर फांउटेन हैं, जहां फाउंटेन शो होगा। इसी एरिया के आसपास फूड कोर्ट भी होगा।

कनक महल– इसमें 6 टावर बनाए गए हैं। इस पर बने डोम्स पर गोल्डन कलर की टाइल्स लगाई गई हैं। यहां वाॅटर पार्क और रेस्टोरेंट बनाया गया है।

छोटी-बड़ी समाध और दशावतार– छोटी समाध में अरोमा गार्डन और फाउंटेन लगाया गया है। बड़ी समाध में वृंदावन (तुलसी वन) और भगवान विष्णु के दशावतार की स्थापना की गई है।

महात्मा गांधी सेतु– रामपुर घाट पर पर्यटकों के आने-जाने के लिए महात्मा गांधी सेतु का निर्माण भी किया गया है।

हाड़ाैती घाट– फसाड में हाड़ौती की समृद्ध वास्तुशिल्प को अंकित किया गया है। इसमें बूंदी के तारागढ़ किले के मुख्य द्वार गणेश पाल का निर्माण किया गया है। हाड़ी रानी और पन्नाधाय की गनमेटल की आदमकद मूर्तियां लगाई गई हैं। इसके अलावा 84 खभों की छतरी का निर्माण भी किया गया है।

विश्व मैत्री घाट– इस घाट पर विशाल बैंक्वेट हॉल का निर्माण किया गया है। इसमें 10 मीटर व्यास के ग्लोब का निर्माण किया गया है। इसमें वन वर्ल्ड वन ड्रीम और भारतीय संस्कृति ‘वसुधैव कुटुम्बकम’ पर आधारित है।

जंतर-मंतर घाट– इस घाट पर ZODIAC टावर का निर्माण किया गया है। इसमें 12 राशि चक्रों को दर्शाया गया है। यहां पर्यटक अपनी राशि के अनुसार भविष्य भी जान सकेंगे।

मरू घाट– इस घाट पर गन मेटल की ऊंटों की छह प्रतिमाएं लगाई गई हैं। घाट और फसाड वॉल के बीच जमीन पर टेंट सिटी विकसित की जा रही है।

मुकुट महल– मुकुट-महल में रिवर फ्रंट का मॉडल संग्रहालय बनाया गया है। यहां व्यू पॉइंट का निर्माण भी किया गया है।

गीता घाट– गीता घाट में वियतनाम मार्बल की पट्टिका में गीता के सम्पूर्ण 18 अध्याय के श्लोक लिखे गए हैं। ये 700 श्लोक अलग-अलग तीन भाषाओं (संस्कृत, हिंदी और अंग्रेजी) में लिखे हैं।

शांति घाट– इस घाट पर योग मुद्रा में इन्विजिबल स्कल्पचर लगाया गया है। एक हिस्से से इसे देखने पर ऐसा लगता है कि यह गायब हो गई है। इसमें मानव शरीर के सातों चक्रों को दर्शाया गया है।

वैदिक घाट– इस घाट पर पंच तत्वों का आभास करते हुए बाडोली शैली में पांच मंदिरों का निर्माण कराया गया है।

रोशन घाट– इस घाट में इस्लामिक वास्तुकला को दर्शाया गया है। इसके बीच में जन्नती दरवाजे का निर्माण किया गया है और जलती हुई 9 मशालें बनाई गई हैं।

शौर्य घाट– यह पश्चिमी छोर का एंट्री पॉइंट है। इस चौक में पर्यटकों के लिए पार्किंग, इन्फॉर्मेशन सेंटर, रेस्टोरेंट आदि की व्यवस्था की गई है।

राजपूताना घाट– इस घाट में राजस्थान के विभिन्न क्षेत्रों जैसे मेवाड़, मारवाड़, ढूंढाड़, वागड़, हाड़ोती क्षेत्रों की प्रसिद्ध इमारतों के मॉडल बनाए गए हैं। इनमें पोद्दार हवेली, जग मंदिर, जगनिवास, गणगौरी घाट, हवामहल, गणेश पोल, सरगासूली, विजय स्तंभ, ब्रह्मा मंदिर, रणकपुर, पटवा हवेली शामिल हैं।

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