हर्षवर्धन ने पेपर लीक से 30 दोस्तों को पटवारी बनवा दिया, एसओजी को करोड़ों की प्रॉपर्टी मिली, ससुराल में भी दी दबिश
एनसीआई@जयपुर
जेईएन पेपर लीक मामले में एसओजी ने गुरुवार को तीन जिलों जयपुर, दौसा और भरतपुर में करीब 12 जगहों पर दबिश दी। करीब 5 घंटे तक चली सर्च में एसओजी को आंसर शीट, पेपर के अलावा 20 करोड़ रुपए से ज्यादा की प्रॉपर्टी के दस्तावेज बरामद हुए। साथ ही दो और सरकारी भर्तियों में पेपर लीक करवाने के सम्बन्ध में अहम दस्तावेज हर्षवर्धन मीणा के मकान से मिले हैं।
हर्षवर्धन मीणा ने दौसा में एक बाबा के आश्रम में 4 बार फरारी काटी थी। पता चला है कि मीणा ने पेपर चुराकर अकेले महुआ के 30 लोगों को पटवारी परीक्षा पास करवा दी थी। उसके ये सभी साथी आज भी नौकरी कर रहे हैं, जिनका डेटा एसओजी जुटाएगी।

एसओजी ने हर्षवर्धन मीणा की पत्नी की नौकरी के मामले में उसके ससुराल भरतपुर के उच्चैन में भी दबिश दी। वहां उसके साले से पूछताछ कर अहम जानकारी जुटाई गई है।
पेपर लीक का नया मास्टर माइंड आया सामने, विदेश भागा
राजस्थान में पेपर लीक कांड में एक नया नाम सामने आया है। यह एसओजी को चकमा देकर विदेश भाग गया है। एडीजी एसओजी वीके सिंह ने बताया कि यूनिक भांभू ही सेंटरों से पेपर लीक कराता था। वह वन विभाग में फॉरेस्टर है। इससे अंदेशा है कि वनपाल और वनरक्षक भर्ती का भी पेपर लीक किया होगा। यूनिक का जेईएन भर्ती के अलावा भी कई पेपरों को लीक कराने में नाम सामने आया है।
यूनिक भांभू मूल रूप से चूरू का रहने वाला है। राजेन्द्र यादव ने जयपुर के सरकारी स्कूल में स्ट्रॉन्ग रूम से जेईएन भर्ती परीक्षा का पेपर लीक करवाने के बाद भांभू के मोबाइल पर ही भेजा था। एसओजी उसको गिरफ्तार करने ही वाली थी, लेकिन उससे पहले वो 20 फरवरी को विदेश भाग गया। एम्बेसी ने एसओजी को इसकी जानकारी पुख्ता भी कर दी है।

तीन जिलाें में 14 टीमों ने दी दबिश, रात 2 बजे हुई प्लानिंग
एडीजी एसओजी वीके सिंह ने बताया कि एसओजी की 12 से अधिक टीमों ने सुबह 4 बजे से जयपुर, दौसा व महुआ में हर्षवर्धन मीणा और राजेन्द्र कुमार यादव के 12 ठिकानों पर दबिश दी थी। इसकी प्लानिंग बुधवार देर रात 2 बजे करने के बाद एक्शन शुरू हो गया था। 100 से ज्यादा लोगों की 12 टीमों को खुद एडीजी वीके सिंह ने देर रात 3 बजे रवाना किया और हर पल की मॉनिटरिंग करते रहे।
एसओजी की इस रेड की थानों को भी भनक नहीं थी। एसओजी की टीमों ने डायरेक्ट पहले से तय ठिकानों पर जाकर छापेमारी की। एक तरफ हर्षवर्धन मीणा तो दूसरी तरफ उसके सहयोगी ग्रेड थर्ड टीचर राजेन्द्र यादव के ठिकानों जयपुर में चित्रकूट नगर, वैशाली नगर व वर्धमान नगर में भी सर्च किया गया। दोनों जगहों से करोड़ों की प्रॉपर्टी के दस्तावेज बरामद किए गए हैं।
हर्षवर्धन से तीन गुना ज्यादा प्रॉपर्टी का मालिक राजेन्द्र यादव
हर्षवर्धन मीणा के पास एसओजी को अब तक 5 करोड़ 71 लाख रुपए की प्रॉपर्टी होने की जानकारी मिली है। इसमें जयपुर का एक बंगला, प्लॉट और खेती की जमीनें शामिल हैं। वहीं, स्कूल के स्ट्रॉन्ग रूम से जेईएन भर्ती का पेपर चुराने वाले हर्षवर्धन मीणा के सहयोगी एवं ग्रेड थर्ड टीचर राजेन्द्र कुमार यादव के पास 14 करोड़ 90 लाख की प्रॉपर्टी मिली है। यह हर्षवर्धन मीणा से लगभग तीन गुना है।

फरार बाबा के आश्रम पर भी पहुंची एसओजी की टीम, भूमिका की जांच जारी
एसओजी की एक टीम सुबह दौसा में एक बाबा के आश्रम में पहुंची। यह आश्रम गोविंद देव मंदिर के पास बना हुआ है। करीब 5 घंटे तक इस आश्रम में सर्च किया गया। यहां एक अलग से मकान भी बना हुआ है। इसी मकान में एक बाबा आकर रुकता था। मूल रूप से ग्वालियर का रहने वाला यह बाबा आश्रम में कभी कभार ही आता था। जब बाबा को इसकी जानकारी लगी कि हर्षवर्धन मीणा का नाम पेपर लीक में आ गया है, तब से वह भी फरार बताया जा रहा है। अभी तक बाबा की पेपर लीक में भूमिका के बारे में एसओजी जांच कर रही है।
हर्षवर्धन के नाम है आश्रम की जमीन
जांच में पता लगा कि हर्षवर्धन फरारी के दौरान इसी आश्रम में 4 बार आकर रुका था। आश्रम में ही छिपकर रहता था, फिर चुपचाप नेपाल भाग जाता था। आश्रम की जमीन हर्षवर्धन के नाम पर ही पाई गई है। नकल गिरोह से मिले रुपयों को जनसेवा में दिखाकर हर्षवर्धन मीणा व्हाइट मनी में बदल लेता था। वह एक भोले बाबा संगठन से भी जुड़ा हुआ था। संगठन से जुड़कर लोगों में सामाजिक कार्यकर्ता की इमेज बना रखी थी।

एसओजी की टीम ने सर्च में आश्रम से आंसरशीट, कई परीक्षाओं के पेपर व बिजली बिल के अलावा कई अन्य दस्तावेज बरामद किए हैं। आश्रम में एक अलग से टेंट भी बना रखा है, जहां पर पाठ-पूजा की जाती है। सुबह-शाम यहीं पर कीर्तन भी किया जाता है। ज्यादातर समय यह आश्रम सूना ही रहता है। बाबा के आने पर ही आश्रम में काफी भीड़ देखी जाती थी।
हाईवे पर चार दुकानों का मालिक, रिटायर्ड जेलर पिता करता देखरेख
हर्षवर्धन ने दौसा में कई जगहों पर प्रॉपर्टी खरीद रखी है। उसने टिंकरी मोड़ पर हाईवे पर चार दुकानें खरीदी थीं, जिन्हें किराए पर दे रखा था। वहीं टेंट हाउस चल रहा था। एसओजी की टीमें इन दुकानों पर भी पहुंची। वहां कोई भी नहीं मिला तो इन चारों दुकानों को सील कर दिया गया।
सूत्रों के अनुसार एसओजी को यहां से सिलेंडर व चूल्हा मिला है। गांव में लगातार दबिश देने के बाद हर्षवर्धन का रिटायर्ड जेलर पिता मुरारीलाल यहीं पर रहने लगा था। वह यहीं पर खाना बनाकर खाता था और यहीं सो जाता था।
आश्रम में जब भी कार्यक्रम होते थे तो उसमें टेंट का सामान इसी दुकान से जाता था। इस टेंट हाउस में हर्षवर्धन मीणा की 39 लाख रुपए की हिस्सेदारी सामने आई है। इसके अलावा दौसा में एक मकान और तीन प्लाट की जानकारी मिली है। वह गोवर्धन वाटिका स्थित उसी मकान में ज्यादा रहता था।
एपीआरओ, फोरेस्ट गार्ड भर्ती भी जांच के दायरे में
एसओजी को दौसा की गोवर्धन वाटिका स्थित हर्षवर्धन के निवास से एपीआरओ परीक्षा-2022, पटवारी भर्ती परीक्षा 2021, फोरेस्ट गार्ड भर्ती 2020 में चयनित अभ्यर्थियों के प्रश्न पत्र, लिस्ट व फोटो प्रतियां भी मिली हैं। इस प्रकार अब एसओजी की रडार पर 2 नई भर्तियां भी आ गई हैं।

अकेले महुआ से 30 लोगों को पटवारी लगवाया
एसओजी को एक महत्वपूर्ण इनपुट यह हाथ लगा है कि हर्षवर्धन ने अपने साथ के करीब 30 से ज्यादा लोगों को पटवारी परीक्षा पास करवाई थी। ये सभी अभी नौकरी पर हैं। ये सभी 30 लोग महुआ के ही रहने वाले हैं। इनके बारे में भी एसओजी की टीम अब डाटा जुटाएगी।
गांव में 3 बीघा जमीन, दो दुकानें अभी खरीदीं
हर्षवर्धन का मूल गांव महुआ का सालिमपुर है। वहां पर उसके पिता मुरारीलाल मीणा ही रहते हैं। एसओजी सालिमपुर गांव पहुंची तो हर्षवर्धन का पिता वहां भी नहीं मिला।

हर्षवर्धन की मां की कुछ साल पहले ही मौत हो चुकी है। वह गांव में छिप कर जाता था। एसओजी की टीम ने उसके गांव में पहुंच कर परिवार और रिश्तेदारों से भी पूछताछ की है। घर से भी कुछ दस्तावेज बरामद किए हैं। इसके बाद उसके मकान को भी सील कर दिया गया है। एसओजी को हर्षवर्धन के चाचा छोटू मीणा से पूछताछ में पता चला है कि उसकी गांव में करीब 3 बीघा जमीन है। पिछले साल ही उसने गांव में दो दुकानें भी खरीदी थीं।
पत्नी की नौकरी को लेकर साले से की पूछताछ
एसओजी की टीम हर्षवर्धन की ससुराल उच्चैन के गांव मिलकपुर में भी पहुंची। वहां पर उसके साले मनोज मीणा से भी पूछताछ की गई है। यह पूछताछ मनोज की बहन और हर्षवर्धन की पत्नी सरिता के सम्बन्ध में की गई थी। एसओजी ने वहां से भी कई दस्तावेज बरामद किए हैं।

पहले डीएसपी शिवकुमार गांव में पहुंचे तो उन्हें कोई नहीं मिला था। फिर वे भरतपुर की जसवंत नगर कॉलोनी में पहुंचे। वहां से हर्षवर्धन के साले मनोज मीणा को साथ लेकर उच्चैन के मिलकपुर गांव पहुंचे।
हर्षवर्धन की पत्नी सरिता वर्तमान में भीलवाड़ा में किसी जगह पटवारी के पद पर कार्यरत है। उसे डमी केंडिडेट के जरिए सब इंस्पेक्टर भर्ती परीक्षा पास करवाई गई थी। इसमें वह पास हो गई थी। पूरे गांव में उसके एसआई परीक्षा पास करने की काफी चर्चा हुई थी। मगर इसके बाद हुए फिजिकल टेस्ट में वह फेल हो गई थी।
एसओजी ने सरिता मीणा की असली फोटो और एसआई परीक्षा के रिकॉर्ड वाला फोटो मैच कराया तो पूरी पोल खुल गई थी। इस पर एसओजी ने सरिता मीणा पुत्री रमनलाल मीणा के खिलाफ भी मुकदमा दर्ज किया है। हर्षवर्धन मीणा को जयपुर के सांगानेर थाने में भी 2020 में गिरफ्तार किया गया था।
एसआई भर्ती परीक्षा 2021 में सरिता मीणा के साथ ही एक सब इंस्पेक्टर डालूराम मीणा का भी नाम सामने आया है। डालूराम मीणा आरपीए में ट्रेनिंग कर रहा था। जांच में पता लगा था कि डालूराम की जगह पर जालोर के हरचंद ने डमी केंडिडेट के रूप में परीक्षा दी थी। दोनों की परीक्षा में फोटो मैच कराए गए थे, जिसके बाद एसओजी ने दोनों को गिरफ्तार कर लिया था।

हर्षवर्धन मीणा भी पश्चिमी राजस्थान में लम्बे समय तक नौकरी पर रहा था। उसकी पत्नी सरिता भी चितौड़गढ़ में पोस्टेड थी। ऐसे में पश्चिमी राजस्थान के जालोर, सिरोही सहित अन्य जिलों में हर्षवर्धन का नेटवर्क बन चुका था।
नेपाल से पकड़े गए थे मास्टर माइंड
एसओजी की टीम ने हर्षवर्धन मीणा, राजेन्द्र यादव उर्फ राजू को नेपाल, शिक्षक राजेन्द्र को झोटवाड़ा व शिवरतन लाइब्रेरियन को श्रीगंगानगर से गिरफ्तार किया था। पूछताछ के बाद इनके बड़े नेटवर्क का खुलासा हुआ था। हर्षवर्धन और राजू ने नेपाल में नई मोबाइल सिम ले ली थी। इस कारण उनकी लोकेशन नहीं मिल रही थी।
हर्षवर्धन अपनी पत्नी सरिता के साथ नेपाल की होटल में छिपा था। वे रिश्तेदारों से बात करते रहते थे। पता लगा कि वे छुप कर दौसा भी आते रहे। जांच में पता लगा कि इन्होंने पटवारी भर्ती, एसआई भर्ती, लाइब्रेरियन भर्ती परीक्षा के अलावा कई अन्य परीक्षाओं में डमी केंडिडेट बैठा कर परीक्षा दिलवाई थी। सरकारी शिक्षकों को रुपयों का लालच देकर पेपर आउट कर लेते थे।
