बेनजीर भुट्टो के कार्यकाल में थे पाकिस्तान के सांसद, इतने जुल्म हुए कि ली भारत में शरण, सीएए लागू होने से अब पूरी होगी दशकों पुरानी हसरत
पाकिस्तान से आए डिवायाराम और कुछ लोग हरियाणा के रोहतक में बस गए थे। कुछ समय बाद ये लोग फतेहाबाद के गांव रतनगढ़ में आ गए। नागरिकता संशोधन बिल लागू हो जाने से डिवायाराम काफी खुश हैं।
एनसीआई@फतेहाबाद (हरियाणा)
पाकिस्तानी मुस्लिमों के अत्याचार से तंग आकर भारत में आकर बसे कई हिन्दू परिवारों की तरह एक खास हिन्दू परिवार में भी इन दिनों खुशी का माहौल है, वजह है नागरिकता संशोधन कानून (CAA) का लागू होना। इस कानून के लागू हो जाने से अब इन्हें भी भारत की नागरिकता मिल जाने की आस जगी है।
यह हिन्दू परिवार वर्ष 2000 में वीजा लेकर पाकिस्तान से भारत आया था, फिर वीजा अवधि खत्म होने के बाद यहीं बस गया। इस परिवार के मुखिया हैं डिवायाराम।डिवायाराम फतेहाबाद जिले के गांव रतनगढ़ में मजदूरी करके अपना और परिवार का भरण पोषण कर रहे हैं।
डिवायाराम पाकिस्तान मे कोई छोटी मोटी हस्ती नहीं थे। उनके अनुसार वे बेनजीर भुट्टो के शासनकाल में पाकिस्तान के सांसद रहे थे। उनके अनुसार पाकिस्तान की संसद में अल्पसंख्यकों लिए कुछ पद आरक्षित होते हैं, इसी के तहत उन्हें सांसद बनाया गया था। डिवायाराम भारत में आने का जो कारण बताते हैं, उसे सुनकर हर कोई हैरान रह जाने के साथ पाकिस्तान के हालातों के खिलाफ आक्रोशित भी हो उठता है। डिवायाराम ने बताया कि वहां गैर मुस्लिमों पर मुसलमान बेहताशा अत्याचार करते हैं। उनके सांसद बनने के बाद वहां के दबंग लोगों ने उनके परिवार की एक लड़की को उठा लिया और उसके साथ जबरदस्ती की। सत्ता में होने के बावजूद वे कुछ नहीं कर पाए। इससे हताश होकर उन्होंने कुछ ही दिन में अपने पद से इस्तीफा दे दिया।
पाकिस्तानियों के अत्याचारों से तंग आकर आ गए भारत
इसके बाद आए दिन हिन्दुओं पर हो रहे अत्याचारों से तंग आकर वे और उनका परिवार वीजा लेकर भारत आ गया। वो अपने पीछे अपनी तमाम सम्पत्ति, जमीन-जायदाद वहीं छोड़ कर आ गए। उन्होंने बताया कि भारत आने के बाद वे रोहतक जिले में रहे। जहां वीजा अवधि समाप्त होने के बाद वे पाकिस्तान वापस नहीं लौटे और वहां के तत्कालीन उपायुक्त के समक्ष पेश होकर भारत में रहने की अनुमति मांगी। इसके बाद वे वर्ष 2006 में फतेहाबाद के रतिया कस्बे के निकट गांव रतनगढ़ में आकर रहने लगे।
पाकिस्तान में थी 25 बीघा जमीन
74 वर्षीय डिवायाराम ने बताया कि पाकिस्तान में उनके परिवार के पास 25 बीघा जमीन थी। परंतु मुस्लिम समाज व उनके मौलवियों के प्रताड़ित करने से उन्हें सब छोड़ना पड़ा। वे उन पर मुसलमान बनने के लिए दबाव डालते थे। जब उन्होंने मुस्लिम धर्म अपनाने से मना कर दिया तो मुसलमानों ने कई तरह से शोषण करना शुरू कर दिया। मजबूरन उन्हें जमीन व घर छोड़ भारत आना पड़ा। उन्होंने बताया कि वे सीएए विधेयक लागू होने होने से बहुत खुश हैं। उन्हें उम्मीद है कि अब उन्हें और उनके परिवार को भी भारत की नागरिकता मिल जाएगी।
