April 21, 2026

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कच्चातिवु द्वीप विवाद पर दिग्विजय सिंह ने दे दिया ऐसा बयान कि फंस गई कांग्रेस

कच्चातिवु द्वीप विवाद पर दिग्विजय सिंह ने दे दिया ऐसा बयान कि फंस गई कांग्रेस

पीएम मोदी ने कहा था कि कांग्रेस ने अपनी सरकार के दौरान कई दशक पहले कच्चातिवु द्वीप श्रीलंका को दे दिया था। किस केबिनेट में ये निर्णय हुआ? इस पर कांग्रेस की बोलती बंद है। पीएम मोदी के इस बयान पर कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने भोपाल में पलटवार तो किया, मगर इस पर जो बयान दिया, उससे कांग्रेस की ही किरकिरी हो गई है।

एनसीआई@सेन्ट्रल डेस्क

लोकसभा चुनाव 2024 के लिए धुआंधार प्रचार किया जा रहा है। सियासी पारा चढ़ा हुआ है। कुल मिलाकर सत्तापक्ष और विपक्ष की ओर से जुबानी जंग तेज है। इन सब के बीच भारतीय जनता पार्टी व प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी एक नए मुद्दे को उठाकर कांग्रेस को कठघरे में खड़ा कर रहे हैं। ये मुद्दा कच्चातिवु द्वीप का है। पीएम मोदी का कहना है कि इसे वर्ष 1974 में पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने श्रीलंका को सौंप दिया था। इस पर अब पार्टी के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह का जो बयान आया है, उसे लेकर विवाद और गहरा गया है।

दरअसल, कच्चातिवु द्वीप को लेकर प्रधानमंत्री मोदी के बयान पर कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने भोपाल में पलटवार किया। उन्होंने पूछा, उस द्वीप पर कोई रहता है क्या?, मैं पूछना चाहता हूं। दरअसल, पिछले कई दिन से पीएम मोदी इस मसले को सार्वजनिक मंचों पर उठा रहे हैं। उन्होंने इसका जिक्र बुधवार को तमिलनाडु के वेल्लोर की रैली में भी किया।

कांग्रेस और डीएमके ने किया पाखंड- पीएम मोदी

पीएम मोदी ने कहा कि कांग्रेस और डीएमके पार्टी के एक पाखंड की चर्चा आज पूरा देश कर रहा है। कांग्रेस ने अपनी सरकार के दौरान कई दशक पहले कच्चातिवु द्वीप श्रीलंका को दे दिया। किस केबिनेट में ये निर्णय हुआ? किसके फायदे के लिए ये फैसला हुआ? इस पर कांग्रेस की बोलती बंद है। उन्होंने आगे कहा, ‘बीते वर्षों में उस द्वीप के पास जाने पर तमिलनाडु के हजारों मछुआरे गिरफ्तार हुए हैं। उनकी नौकाएं गिरफ्तार कर ली गई हैं।’

पीएम मोदी ने कहा, ‘गिरफ्तारी पर कांग्रेस और डीएमके झूठी हमदर्दी दिखाते हैं, लेकिन ये लोग तमिलनाडु के लोगों को ये सच नहीं बताते हैं कि कच्चातिवु द्वीप इन लोगों ने स्वयं श्रीलंका को दे दिया और तमिलनाडु की जनता को अंधेरे में रखा। एनडीए सरकार ऐसे मछुआरों को निरंतर रिहा कराकर वापस ला रही है। इतना ही नहीं 5 मछुआरों को श्रीलंका ने फांसी की सजा दे दी थी। हम उन्हें भी जिंदा वापस लेकर आए हैं। डीएमके और कांग्रेस सिर्फ मछुआरों के नहीं बल्कि देश के भी गुनहगार हैं।’

श्रीलंका भी जारी कर चुका है बयान

इससे पहले कच्चातिवु द्वीप को लेकर श्रीलंका ने भी अपनी बात रखी है। उसके मत्स्य पालन मंत्री डगलस देवानंद का कहना है कि कच्चातिवु द्वीप को दोबारा हासिल करने के सम्बन्ध में भारत के दावों में कोई दम नहीं है। उन्होंने कहा था, ‘मुझे लगता है कि भारत इस स्थान को सुरक्षित करने के लिए अपने हितों पर काम कर रहा है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि श्रीलंकाई मछुआरों की उस क्षेत्र तक पहुंच न हो और श्रीलंका को उस संसाधनपूर्ण क्षेत्र पर किसी भी अधिकार का दावा नहीं करना चाहिए।’

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